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300 की स्पीड वाली बुलेट ट्रेन, 62 सालों में कोई हादसा नहीं, यही आएगी भारत, खिड़की पर अगर सिक्का रख दो तो…

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300 की स्पीड वाली बुलेट ट्रेन, 62 सालों में कोई हादसा नहीं, यही आएगी भारत

Last Updated:June 18, 2026, 17:23 IST

जापान की बुलेट ट्रेन का नाम शिंकासेन ट्रेन है. ये वहां 300 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलती है. 60 के दशक से ये वहां शुरू हुई. इसको चलते हुए 62 साल हो चुके हैं. ये समय की इतनी पाबंद है कि मुश्किल 10-20 सेकेंड लेट हो सकती है. कहा जाता है कि इसमें सवारी करना अपने घर से ज्यादा सुरक्षित है. कभी इसका कोई एक्सीडेंट नहीं हुआ

जापान की शिंकांसेन यानि बुलेट ट्रेन 300 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है. आपको लग सकता है कि यह खतरनाक है. ये बुलेट ट्रेन जापान में 1964 में शुरू हुई. उसके बाद से अब तक ना तो कभी इसकी कोई टक्कर हुई और ना ही ये पटरी से उतरी. यानि इसकी एक भी जानलेवा दुर्घटना नहीं हुई. ये 10 अरब से अधिक यात्रियों को ले जा चुकी है. ये आपके अपने बिस्तर में रहने से भी ज्यादा सुरक्षित है. (japan media)

यह ट्रेन समय को लेकर बहुत सतर्क रहती है. हर ट्रेन की औसत देरी 1 मिनट से भी कम होती है. अक्सर केवल 20 सेकंड. अगर कोई ट्रेन 1 मिनट लेट होती है, तो कंडक्टर स्पीकर पर माफी मांगता है. अगर 5 मिनट लेट होती है, तो हो सकता है कि वे आपके बॉस के लिए “देरी प्रमाणपत्र” जारी कर दें. जापानी समय इसी ट्रेन के हिसाब से चलता है. (japan media)

ये सब कैसे चलता है? एक गुप्त हीरो है जिसे “डॉक्टर येलो” कहा जाता है. यह एक खास पीली शिंकानसेन ट्रेन है जो पटरियों पर बिजली और रेल की जाँच करने के लिए चलती है. यह इतनी दुर्लभ है कि इसे देखना शुभ माना जाता है. यही “डॉक्टर” मरीज़ यानि बुलेट ट्रेन को स्वस्थ रखता है. (japan media)

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जापान एक भूकंपग्रस्त देश है. तो ट्रेन कैसे बच पाती है? इसमें “यूरेडीएस” नामक एक प्रणाली लगी है. यह भूकंप के पहले छोटे झटकों यानि पी-तरंगों का पता लगा लेती है. बड़े झटके यानि एस-तरंगों के आने से पहले ही बिजली काटकर ट्रेन को रोक देती है. यह इंसानों से भी तेज़ सोचती है. (japan media)

यह ना केवल बेहद सुरक्षित है बल्कि बेहद आरामदायक भी. इसकी राइड इतनी स्थिर है कि आप खिड़की की चौखट पर सिक्का भी रख दें , तो भी यह पूरी रफ्तार में भी नहीं गिरेगा. अगर आप जापान जाएं तो इस “कॉइन चैलेंज” जरूर आजमाएं. यह जापानी इंजीनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण है. (japan media)

इस ट्रेन में अगर कोई बिना आरक्षण के बड़ा बैग लेकर आता है तो उस पर जुर्माना लग जाता है. .जापान की शिंकांसेन दुनिया की सबसे सुरक्षित और समय की पाबंद हाई-स्पीड रेल प्रणाली मानी जाती है। 1964 में टोक्यो ओलंपिक से पहले शुरू हुई यह प्रणाली आज जापान की तकनीकी पहचान बन चुकी है. (japan media)

शिंकांसेन के लिए विशेष पटरियां बनाई गई हैं. इन पर मालगाड़ी या सामान्य ट्रेनें नहीं चलतीं, इसलिए टक्कर का खतरा करीब खत्म हो जाता है. ड्राइवर के अलावा कंप्यूटर सिस्टम लगातार गति और दूरी की निगरानी करता है. यदि ड्राइवर गलती करे तो ट्रेन खुद ही धीमी हो जाती है या रुक जाती है. (japan media)

रात में जब ये ट्रेनें नहीं चलतीं, तब पटरियों, ओवरहेड तारों और सिग्नल सिस्टम का जबरदस्त निरीक्षण किया जाता है. पूरे जापान में शिंकांसेन के नौ प्रमुख मार्ग हैं. इन मार्गों पर रोज करीब 800–1000 ट्रेन सेवाएं संचालित होती हैं. सबसे व्यस्त टोकेडो लाइन पर पीक समय में हर 3–5 मिनट में एक ट्रेन चलती है. (AI Photo)

इस बुलेट ट्रेन से हर साल करीब 40–45 करोड़ यात्री यात्रा करते हैं. भारत में भी जो बुलेट ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद रुट पर चलाने की तैयारी हो रही है, वो यही बुलेट ट्रेन है. इसी तकनीक पर चलती है. जापान की कोशिश है कि भारत में भी वही सुरक्षा और समयपालन का स्तर स्थापित किया जाए. (AI Photo)

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