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Camel Milk Soap Bikaner | ऊंटनी के दूध से बने साबुन की देशभर में बढ़ी मांग, जानें खासियत

Last Updated:August 20, 2026, 10:17 IST

Camel Milk Soap Bikaner: बीकानेर की हिमांशी जैन ऊंटनी, गाय और बकरी के दूध से प्राकृतिक साबुन बना रही हैं. इसमें हल्दी, कॉफी, आम, पाइनएपल और विशेष तेलों का इस्तेमाल होता है. साबुन को पूरी तरह तैयार होने में करीब डेढ़ महीने का समय लगता है. 100 रुपये की शुरुआती कीमत वाले इन साबुनों की मांग अब पूरे देश में है.

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Bikaner: बदलते दौर में बाजार में तरह-तरह के साबुन उपलब्ध हैं, लेकिन बीकानेर की हिमांशी जैन ने घरों में साबुन बनाने के पुराने पारंपरिक तरीके को आधुनिक स्वरूप देकर इसे अपने व्यवसाय में बदल दिया है. वे ऊंटनी, गाय और बकरी के दूध के साथ ही रसोई में मिलने वाली हल्दी, कॉफी, फल और सब्जियों जैसी प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल कर अलग-अलग तरह के साबुन तैयार कर रही हैं. खास बात यह है कि एक साबुन को बनाने की शुरुआती प्रक्रिया में भले ही पांच से छह घंटे का समय लगता है, लेकिन इसे इस्तेमाल के लिए पूरी तरह तैयार होने में करीब डेढ़ महीने का समय लगता है.

सबसे खास प्रयोग ऊंटनी के दूध से तैयार साबुन का है. हिमांशी बताती हैं कि उन्हें ऊंटनी के दूध से साबुन बनाते हुए करीब पांच साल हो चुके हैं. रेगिस्तान की पहचान माने जाने वाले ऊंट के दूध को उन्होंने एक अनोखे ब्यूटी प्रोडक्ट के रूप में इस्तेमाल किया. अब पारंपरिक तरीके, दूध, फल-सब्जियों और विभिन्न आयुर्वेदिक तेलों का यह मेल उनके स्टार्टअप की असली पहचान बन चुका है. हिमांशी ने शुरुआत में यह काम केवल शौक के तौर पर किया था, लेकिन जब लोगों को उनके बनाए साबुन पसंद आने लगे और मांग बढ़ी, तो उन्होंने इसे बड़े बिजनेस में बदल दिया.

दूध के साथ फल-सब्जियों और प्राकृतिक तेलों का अनूठा संगम

हिमांशी अपने साबुन में कई तरह के नवाचार कर रही हैं. वे ऊंटनी के अलावा गाय और बकरी के दूध से भी साबुन तैयार करती हैं. इसके अलावा रसोई में आसानी से मिलने वाली चीजों जैसे हल्दी, कॉफी, फलों के ताजे जूस, आम और पाइनएपल के साथ-साथ सब्जियों का भी उपयोग करती हैं. त्वचा को पोषण देने के लिए साबुन में नारियल का तेल, जैतून का तेल और अरंडी का तेल मुख्य रूप से मिलाया जाता है. सामग्री के हिसाब से हर साबुन की अपनी अलग विशेषता होती है.

5 से 6 घंटे की मेहनत, डेढ़ महीने बाद तैयार होता है साबुन

हिमांशी के मुताबिक साबुन बनाने की प्रक्रिया काफी धैर्य वाली है. शुरुआती मिश्रण और सांचे में ढालने में 5 से 6 घंटे लगते हैं, लेकिन साबुन को पूरी तरह तैयार और उपयोग योग्य बनने में करीब डेढ़ महीने का वक्त लगता है. यही वजह है कि वे बाजार की मांग के अनुसार पहले से ही एडवांस ऑर्डर पर काम करती हैं. इन साबुनों की शुरुआती कीमत 100 रुपये है. शुरुआत में स्थानीय स्तर पर बिकने वाले ये हर्बल साबुन अब पूरे भारत में सप्लाई हो रहे हैं. हिमांशी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आयोजित होने वाली प्रमुख राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में अपने इन खास साबुनों का प्रदर्शन कर चुकी हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Bikaner,Bikaner,Rajasthan

First Published :

August 20, 2026, 10:17 IST

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