बच्चा फोन देखें बिना नहीं खाता खाना? तुरंत हो जाएं सावधान, रुक सकता है दिमाग का विकास, स्टडी में दावा

Last Updated:June 29, 2026, 18:23 IST
Poor Baby Brain: मोबाइल से हमें बहुत फायदा मिला है लेकिन यह इतना ही नुकसान भी पहुंचा रहा है. आजकल नवजात बच्चों को उनकी मम्मियां मोबाइल पर गाना दिखाते रहती हैं और खिलाती रहती हैं. यह बहुत ही डेंजर है. एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन दिखाना उसके दिमाग के लिए बहुत ही खराब है.बच्चों को स्क्रीन न दिखाएं.
Screen Time Danger: अगर आप अपने बच्चों को मोबाइल पर सॉन्ग सुनाकर खाना खिलाते हैं तो तुरंत इस आदत को बदल डालिए क्योंकि इससे बच्चों के दिमाग पर बेहद खराब असर हो सकता है. इससे बच्चों की बुद्धि का विकास रुक सकता है. अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि शिशु अवस्था में स्मार्टफोन, टैबलेट और अन्य डिजिटल स्क्रीन का उपयोग बच्चों के विकास से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है. शोधकर्ताओं ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इन उपकरणों से शिशुओं को होने वाले संभावित खतरों पर तत्काल और गहन शोध किए जाने की आवश्यकता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान में सरकारों और समाज का ध्यान मुख्य रूप से किशोरों की डिजिटल आदतों और 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों पर केंद्रित है. लेकिन नवजात बच्चों के स्क्रीन टाइम का मुद्दा हम सबके लिए बेबी ब्लाइंड स्पॉट बन गया है. इसपर तत्काल विचार-विमर्श, शोध, रिसर्च और नीति की जरूरत है.
पालन-पोषण का हिस्सा बनता जा रहाद गार्जियन की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया है कि आजकल कई परिवार मोबाइल, स्मार्ट फोन, टैबलेट आदि को अपने बच्चों के पालन-पोषण का हिस्सा बना रहे हैं. तत्काल उन्हें लग रहा है कि इससे बच्चा बहुत स्मार्ट होगा लेकिन यह बहुत ही खतरनाक चलन है. बेशक तत्काल पता न चले लेकिन इससे दीर्घकालिक दुष्परिणाम सामने आएगा. इससे बच्चों के दिमाग पर प्रतिकुल असर पड़ता है जो बौद्धिक विकास में बाधक बन सकता है. यह अध्ययन लीड्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रेफ क्लेटन के नेतृत्व में किया गया है. रेफ क्लेटन ने बताया कि माता-पिता को खुद पता नहीं रहता है कि वह अपने बच्चों को स्क्रीन डिवाइस दिखाएं या नहीं दिखाएं. ऐसे में वे अनजाने में अपने बच्चों में गलत आदत डाल रहे हैं. इस स्थिति को तत्काल बदलने की आवश्यकता है.
एक साथ कई तरह के नुकसान कई देशों में 2 साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने की सलाह दी जाती है लेकिन इसका पालन बहुत कम ही होता है. दिशा-निर्देश में कहा जाता है कि अगर नवजात बच्चों वाली उम्र से ही स्क्रीन टाइम पर समय बिताया जाए तो माता-पिता के साथ जुड़ाव कम होने लगता है. इससे बातचीत और संवाद को प्रोत्साहन नहीं मिलता. अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि शिशुओं के लिए स्क्रीन टाइम से कई संभावित नुकसान जुड़े हो सकते हैं. इनमें माता-पिता और देखभाल करने वालों के साथ जुड़ाव के अवसर कम हो जाएंगे. इससे बच्चे शारीरिक मेहनत वाले आउटडोर खेल नहीं खेल पाएंगे जिससे बच्चों का शारीरिक विकास भी कमजोर हो सकता है. इससे बच्चों की भाषा खराब हो सकती है. अध्ययन में कहा गया है कि इतनी कम उम्र में स्क्रीन का उपयोग बच्चों में अत्यधिक मानसिक उत्तेजना ला सकता है. इससे नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती है और आंखों की सेहत खराब हो सकती है. इसका सबसे बड़ा नुकसान बच्चों में ही मोटापा बढ़ सकता है.
जानबूझकर कभी न दें मोबाइल शोधकर्ताओं ने यह चिंता भी जताई कि कई शिशु सांत्वना और सुकून पाने के लिए माता-पिता की बजाय डिजिटल उपकरणों पर निर्भर होने लगे हैं. यानी पहले के जमाने में जब शिशु रोता था तो मां या केयर करने वाले उसे गोद में उठाकर झुलाते थे या उन्हें बोली से पुचकारते थे, उनके हाथों में कुछ चीज दे देते थे लेकिन अब अगर बच्चों को स्क्रीन की आदत लग गई तो वह सिर्फ स्क्रीन देखने के बाद ही रोना बंद करेंगे. ब्रिटेन के चार विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए विश्लेषण में स्क्रीन उपयोग और विकासात्मक विकार के बीच प्रत्यक्ष कारण-परिणाम संबंध स्थापित नहीं किया गया. लेकिन शोधकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि दो वर्ष से कम उम्र के किसी भी बच्चे को नियमित और जानबूझकर स्क्रीन टाइम नहीं दिया जाना चाहिए. किसी भी परिस्थिति में अगर जान-बूझकर बच्चों को स्क्रीन दिखाते हैं तो इससे कई तरह की जटिलताएं बढ़ सकती है जबकि दूसरी ओर इसका कोई भी लाभ नहीं है. इसलिए 2 साल से कम उम्र के बच्चों को उसी तरह लालन-पालन करें जैसे पहले की मांएं किया करती थीं.
About the AuthorLakshmi Narayan
18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें
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