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एयरपोर्ट की नौकरी छोड़ी, 5 बीघा में जुगनी की खेती से कमाए लाखों; किसान अभिमन्यु सिंह की सफलता बनी मिसाल

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35 दिन की फसल और लाखों का मुनाफा, किसान अभिमन्यु सिंह ने बदल दी खेती की तस्वीर

Last Updated:June 18, 2026, 14:07 IST

Jaipur Farmer Success Story: जयपुर के विराटनगर क्षेत्र के सताना गांव के 32 वर्षीय युवा किसान अभिमन्यु सिंह शेखावत ने पारंपरिक खेती छोड़ जुगनी की खेती में सफलता की नई मिसाल कायम की है. कोरोना काल में नौकरी छोड़कर गांव लौटे अभिमन्यु ने सोशल मीडिया से जानकारी लेकर 5 बीघा में जुगनी की खेती शुरू की. पहले ही वर्ष उन्हें करीब 5.40 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ. वे जुगनी के साथ टिंडा, बैंगन, मिर्च, मटर और गेहूं की खेती भी करते हैं. ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और जैविक घोलों के उपयोग से लागत कम और उत्पादन बेहतर हो रहा है. अब उनकी उपज सीधे दिल्ली की आजादपुर मंडी पहुंचती है. उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के 15 से 20 किसान भी इस फसल की खेती करने लगे हैं.

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जयपुर. राजधानी जयपुर के विराटनगर क्षेत्र के मेढ़ स्थित सताना गांव के किसान अभिमन्यु सिंह शेखावत ने पारंपरिक खेती से अलग राह चुनकर जुगनी की खेती में नई पहचान बनाई है. महज 32 वर्ष की उम्र में उन्होंने आधुनिक तकनीक और फसल चक्र की बेहतर योजना के दम पर खेती को लाभ का सौदा बना दिया है. क्षेत्र में जुगनी की व्यावसायिक खेती शुरू करने वाले शुरुआती किसानों में शामिल अभिमन्युसिंह अब अपनी उपज सीधे दिल्ली की आजादपुर मंडी तक भेजते हैं और सालभर खेती से अच्छी आमदनी कर रहे हैं.

अभिमन्यु सिंह पहले एयरपोर्ट पर कस्टमर सर्विस एजेंट के रूप में कार्यरत थे. कोरोना महामारी के दौरान नौकरी छोड़कर गांव लौटे और खेती की जिम्मेदारी संभाली. खेती में कुछ नया करने की इच्छा से उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो और रील्स देखकर जुगनी की खेती की जानकारी जुटाई. इसके बाद चौमूं मंडी से बीज लाकर 5 बीघा भूमि में पहली बार जुगनी की बुवाई की. पहले ही वर्ष लागत निकालने के बाद उन्हें करीब 5.40 लाख रुपए का शुद्ध लाभ हुआ. इस सफलता के बाद आसपास के 15 से 20 किसान भी जुगनी की खेती करने लगे.

दिल्ली की आजादपुर मंडी में है सबसे अधिक डिमांड

किसान अभिमन्यु सिंह शेखावत बताते हैं कि जुगनी की सबसे अधिक मांग दिल्ली की आजादपुर मंडी में रहती है. खासकर बिहार के लोग छठ पर्व के दौरान इसका अधिक उपयोग करते हैं. दीपावली के बाद से डाला छठ तक इसकी अच्छी बिक्री होती है. इसके बाद मांग कम हो जाती है. साथ ही रतलाम क्षेत्र की जुगनी बाजार में आने पर दाम भी प्रभावित होते हैं. इसी कारण उन्होंने ऐसा फसल चक्र तैयार किया कि उनकी फसल छठ पर्व से पहले ही बाजार में पहुंच जाए और उन्हें बेहतर कीमत मिल सके.

महज 40 दिन में तैयार हो जाती यह फसल

जुगनी की फसल महज 35 से 40 दिन में तैयार हो जाती है और लगभग 40 दिनों तक उत्पादन देती है. अभिमन्यु सिंह अपने 16 बीघा खेत में जुगनी के साथ देसी टिंडा, बैंगन, मिर्च, मटर और गेहूं जैसी फसलें भी उगाते हैं. फसल चक्र इस प्रकार बनाया गया है कि एक फसल समाप्त होते ही दूसरी तैयार हो जाती है, जिससे खेत और आय दोनों लगातार चलते रहते हैं.

फसल की देखभाल के लिए अपनाते हैं जैविक तरीका

फसल की देखभाल में भी वे जैविक और कम लागत वाली तकनीकों का उपयोग करते हैं. मल्चिंग के माध्यम से खरपतवार नियंत्रण करते हैं तथा गोबर, गुड़, बेसन, धतूरा और गोमूत्र से तैयार जैविक घोल ड्रिप सिंचाई के जरिए पौधों को देते हैं, जिससे जड़ों का विकास बेहतर होता है. मच्छर और अन्य कीटों से बचाव के लिए पुरानी छाछ और तांबे के बर्तन से तैयार घोल का छिड़काव करते हैं. वहीं अधिक पानी से होने वाले जड़ गांठ रोग के नियंत्रण के लिए हींग का पानी और नीला थोथा उपयोगी मानते हैं.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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