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दिलीप कुमार की वो कालजयी फिल्म, जिसका आइडिया चुराकर बनीं 3 मूवी, दो ब्लॉकबस्टर, तीसरी एवरेज

Last Updated:July 07, 2026, 20:06 IST

Dilip Kumar Iconic Movie : बॉलीवुड के लीजेंड एक्टर दिलीप कुमार ने अपने करियर में 60 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. दिलीप कुमार का मूल नाम मोहम्मद यूसुफ खान था. जन्म 11 दिसंबर 1922 को पेशावर (वर्तमान में पाकिस्तान) के किस्सा ख्वानी बाजार इलाके में हुआ था. उन्हें ‘ट्रेजडी किंग’ के नाम से भी जाना जाता है. सीरियस-इंटेंस रोल के लिए जाने जाते थे. दिलीप कुमार ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक क्लासिक फिल्मों में काम किया. 60 के दशक में उनकी एक ऐसी सुपरहिट फिल्म आई थी जिसकी कहानी की आइडिया चुराकर बॉलीवुड में तीन और फिल्में बनाई गईं. दो फिल्में ब्लॉकबस्टर साबित हुईं तो मूवी औसत रही. ये तीनों फिल्में कौन सी है, दिलीप कुमार की वो सुपरहिट मूवी कौन सी थी, आइये जानते हैं………

दिलीप कुमार एक्टिंग की पाठशाला थे. अमिताभ बच्चन भी उन्हें अपना आदर्श मानते थे. राज कपूर भी उनकी एक्टिंग का लोहा मानते थे. 1961 में उन्होंने एक ऐसी फिल्म बनाई जिससे इंस्पायर्ड होकर बॉलीवुड में तीन और मूवी बनाई गईं. तीन फिल्मों में से दो फिल्में ब्लॉकबस्टर रहीं. तीसरी फिल्म औसत जरूर रही लेकिन इसके गाने दिल में बस गए. दिलीप कुमार की यह फिल्म थी ‘गंगा जमुना’ जिसका निर्देशन नितिन घोष ने किया था. वैसे सही मायने में इस फिल्म का निर्देशन-प्रोडक्शन दिलीप कुमार ने किया था. दिलीप कुमार ही प्रोड्यूसर थे. इसी फिल्म की कहानी से मिलती-जुलती तीन और फिल्में बनाई गईं.

‘गंगा जमुना’ फिल्म की स्टोरी दिलीप कुमार ने ही लिखी थी. फिल्म में दिलीप कुमार के सगे भाई नासिर हुसैन ने पर्दे पर छोटे भाई का रोल निभाया था. वैजयंती माला ने भी फिल्म में अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था. इसके अलावा कन्हैया लाल, अनवर खान और लीला चिटनिस भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे. दिलीप कुमार और उनके सगे भाई नासिर हुसैन ने दो फिल्मों में एक साथ काम किया. ये फिल्में ‘गंगा जमुना’ और ‘बैराग’ थीं. ‘बैराग’ 1976 में आई थी. इस फिल्म के रिलीज होने से पहले उनके भाई का निधन हो गया था. गंगा जमुना जहां ब्लॉकबस्टर रही, वहीं बैराग फ्लॉप हो गई थी.

दिलीप कुमार ने ‘सिटीजन फिल्म्स’ के बैनर तले यह फिल्म प्रोड्यूस की थी. फिल्म के डायलॉग वजाहत मिर्जा ने लिखे थे. संगीतकार नौशाद जबकि गीतकार शकील बदायुनी थे. कहते हैं फिल्म का बहुत बड़ा पोर्शन दिलीप कुमार ने ही डायरेक्ट किया था. इसी फिल्म का गाना ‘इंसाफ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चलके’ आज भी देशभक्ति के टॉप गाने में शुमार है. फिल्म के अन्य पॉप्युलर गाने ‘नैन लड़ जइहें तो मनुआ में ठसक होवै करी’, ‘दो हंसों का जोड़ा बिछुड़ गयो रे’ और ‘ढूंढो ढूंढो रे साजना ढूंढो’.

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‘गंगा जमुना’ दो भाइयों की कहानी थी. गंगा का किरदार दिलीप कुमार ने जबकि जमुना की भूमिका उनके सगे छोटे भाई नासिर ने निभाई थी. फिल्म की सबसे खास बात इसकी अवधी भाषा थी. यह रुटीन फिल्मों से अलग थी. साउथ की एक्ट्रेस वैजयंती माला ने अवधी भाषा के डायलॉग बोले थे. यह कमाल उन्होंने दिलीप कुमार की मदद से किया था. दिलीप कुमार ने डायलॉग अवधी में रिकॉर्ड करके वैजयंती माला के पास भेज दिए थे.

वैजयंती माला ने बार-बार डायलॉग सुने और फिर हूबहू बोल दिए. उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. फिल्म को रिलीज होने में छह माह लगे थे. फिल्म सेंसर बोर्ड में अ‍टक गई थी. सेंसर बोर्ड ने 200 कट लगाने का निर्देश दिया था. फिर दिलीप कुमार इंदिरा गांधी की मदद से तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से मिले. तब जाकर फिल्म रिलीज हो पाई थी.

फिल्म रिलीज होते ही सिनेमाघरों में छा गई. गंगा जमुना 1960 के दशक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक है. गंगा जमुना का भारतीय सिनेमा में एक खास स्थान है. अमिताभ बच्चन ने भी अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने सही मायने में एक्टिंग ‘गंगा जमुना’ को देखकर सीखी. कहानी का बेसिक प्लॉट था : एक भाई सच के साथ है तो दूसरा भाई गलत रास्ता अपनाता है. फिल्म का नेट कलेक्शन उस समय 3.5 करोड़ रुपये था. यह कलेक्शन आज के समय में 1000 करोड़ के आसपास है.

गंगा जमुना से इंस्पायर्ड होकर ही सलीम-जावेद ने ‘दीवार’ फिल्म की कहानी लिखी थी. गंगा-जमुना में बोली गई अवधी-खड़ी भाषा का इस्तेमाल ‘शोले’ में गब्बर सिंह ने किया. 24 जनवरी 1975 को रिलीज ‘दीवार’ फिल्म का निर्देशन यश चोपड़ा ने किया था. प्रोड्यूसर गुलशन राय थे. फिल्म की कहानी का बेसिक प्लॉट दो भाइयों का था. एक भाई विजय (अमिताभ बच्चन) जुर्म की दुनिया में नाम कमाता है तो दूसरा भाई रवि वर्मा (शशि कपूर) पुलिस इंस्पेक्टर बनता है. फिल्म के लास्ट सीन में सगे भाई को गोली मारता है. ‘दीवार’ फिल्म की गिनती हिंदी सिनेमा की आइकॉनिक फिल्मों में होती है. 100 हफ्तों तक चलने वाली इस फिल्म ने 4.25 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया. 1975 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में यह चौथे नंबर पर थी.

‘गंगा-जमुना’ से ही मिलती-जुलती एक और फिल्म 1986 में रिलीज हुई थी. संजय दत्त-कुमार गौरव स्टारर यह फिल्म ‘नाम’ थी जिसका निर्देशन महेश भट्ट ने किया था. रिहैब सेंटर से वापस लौटने के बाद संजय दत्त ने ‘नाम’ फिल्म में ड्रग तस्कर की भूमिका निभाई. 12 सितंबर 1986 को रिलीज हुई इस फिल्म में कुमार गौरव ने संजय दत्त के बड़े भाई की भूमिका निभाई थी. असल जिंदगी में वो संजय दत्त के बहनोई हैं. कुमार गौरव ही फिल्म के प्रोड्यूसर थे. जावेद अख्तर से अलग होने के बाद सलीम खान की यह पहली फिल्म थी. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. इसी फिल्म में कालजयी गजल ‘चिट्ठी आई है’ सुनाई दी थी. इस फिल्म में भी दो भाइयों की कहानी थी. एक मां का प्यार, सच्चा इंसान जबकि दूसरा ड्र्ग तस्कर. करीब 2 करोड़ रुपये का रखा गया था. फिल्म ने इंडिया में 4 करोड़ जबकि वर्ल्ड वाइड 7 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. 1986 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट यह मूवी चौथे नंबर पर थी.

‘गंगा जमुना’ और ‘दीवार’ जैसी आइकॉनिक फिल्म की कहानी 90 के दशक में एक बार और रिपीट की गई. संजय दत्त-गोविंदा की फिल्म ‘आंदोलन’ का बेसिक प्लॉट भी कुछ इसी तरह था. 3 मार्च 1995 को रिलीज ‘आंदोलन’ फिल्म का डायरेक्शन अजीज सेजवाल ने किया था. अनीस बज्मी ने स्टोरी लिखी थी. संजय दत्त, गोविंदा, ममता कुलकर्णी और सोमी अली लीड रोल में थे. म्यूजिक नदीम श्रवण का था. गीतकार समीर थे. फिल्म के म्यूजिक सुपरहिट था. फिल्म में दो भाइयों की कहानी थी. संजय दत्त जुर्म की दुनिया में रहता है जबकि गोविंदा सीधा सादा सच्चा और ईमानदार इंसान. पढ़-लिखकर इंजीनियर बनता है. 3.75 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 10 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक एवरेज फिल्म साबित हुई थी.

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