नाम याद नहीं आया तो घबराएं नहीं, लेकिन ये 5 चीजें भूलना हो सकता है खतरे की घंटी

फरीदाबाद: भूलने की आदत को अक्सर लोग उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. कभी चाबी कहां रखी याद नहीं रहती, किसी का नाम अचानक याद नहीं आता या कोई जरूरी काम ध्यान से निकल जाता है. ऐसा कभी-कभार होना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर भूलने की समस्या बार-बार होने लगे और इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगे, तो इसे गंभीरता से लेना जरूरी है. आखिर हर भूलने की समस्या अल्जाइमर नहीं होती और उम्र के साथ याददाश्त में कितना बदलाव सामान्य माना जाता है? नींद की कमी, मोबाइल और AI का ज्यादा इस्तेमाल भी हमारी याददाश्त और सोचने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए किन आदतों को अपनाना चाहिए और परिवार को डिमेंशिया के कौन से शुरुआती संकेत पहचानने चाहिए? इन्हीं सवालों को लेकर हमने न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. संजय पांडे से खास बातचीत की.
हर भूलने की समस्या अल्जाइमर का संकेत नहीं होती
लोकल18 से बातचीत में फरीदाबाद, अमृता हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि भूलने की समस्या किसी को भी हो सकती है. अगर भूलने की समस्या आपकी दिनचर्या को प्रभावित करने लगे, तो हमें इसे गंभीर मानना चाहिए. जैसे कई बार हम चाबी कहीं रखकर चले आते हैं या कोई सामान रखकर भूल जाते हैं, तो इसे हमेशा भूलने की गंभीर समस्या नहीं कहा जाता. कई बार यह केवल अटेंशन में कमी की वजह से भी हो सकता है. लेकिन अगर घर वाले शिकायत करने लगें कि यह व्यक्ति बार बार चीजें भूल रहा है, किसी का नाम भूल जाता है, कोई सामने आए तो उसे पहचान नहीं पाता या बाहर जाने पर रास्ता भूल जाता है, तो हमें अलर्ट होना चाहिए.
उम्र बढ़ने पर याददाश्त में कितना बदलाव आता
डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति सामान्य काम कर रहा है, लोगों को पहचान रहा है और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी ठीक से चला रहा है, तो केवल कभी कभार भूलने को बीमारी नहीं माना जाना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति साधारण कैलकुलेशन भी भूलने लगे, रुपये पैसे का हिसाब नहीं कर पाए या अपनी रोजमर्रा की चीजों को संभालने में परेशानी होने लगे, तो याददाश्त की जांच जरूरी हो जाती है. डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं होता है. रिस्पांस थोड़ा धीमा जरूर हो सकता है. मैंने देखा है कि 94 और 95 साल की उम्र में भी कई लोग मानसिक रूप से बिल्कुल ठीक रहते हैं.
नींद की कमी याददाश्त और दिमाग पर असर डालती
डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि नींद का याददाश्त पर बहुत बड़ा असर होता है. अगर आपकी नींद पूरी नहीं हुई है, तो अगले दिन आपका कंसंट्रेशन कम हो जाता है. नींद कम आने या नींद पूरी नहीं होने से याददाश्त भी प्रभावित होती है. डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि मैने कई डिमेंशिया के मरीजों में देखा है कि शुरुआती लक्षणों में नींद की समस्या भी सामने आती है. कई बार लोग नींद की समस्या के लिए दवाइयां लेना शुरू कर देते हैं, लेकिन इससे समस्या और गंभीर हो सकती है. इसलिए अगर किसी व्यक्ति को लगातार नींद की समस्या है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए.
मोबाइल और AI पर बढ़ती निर्भरता दिमाग को कमजोर
डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि मोबाइल, कैलकुलेटर और AI पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता दिमाग के इस्तेमाल को कम कर रही है. बचपन में हम दुकानदार के पास जाते थे तो लंबी लिस्ट होती थी और दुकानदार उसका कैलकुलेशन हाथ से ही कर लेते थे. आजकल लोग 5 प्लस 5 का हिसाब भी कैलकुलेटर से करने लगे हैं. डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि कहीं ना कहीं हम कैलकुलेशन और मेमोरी की क्षमता के लिए मशीन पर निर्भर होते जा रहे हैं. इसकी वजह से दिमाग का इस्तेमाल कम हो रहा है. आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है.
दिमाग स्वस्थ रखने के लिए दिनचर्या सही रखें
डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए सबसे जरूरी है अपनी दिनचर्या को ठीक रखना. आजकल कोई रात में सो रहा है तो कोई रात में जाग रहा है. किसी का कोई रूटीन नहीं है और कोई लगातार ट्रेवल कर रहा है. डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि हमारे शरीर की बायोलॉजी हमारी दिनचर्या पर काफी निर्भर करती है. जिस तरह खाना खाने के बाद इंसुलिन रिलीज होता है, उसी तरह सही समय पर सोने से ब्रेन के जरूरी हार्मोन रिलीज होते हैं. मेमोरी से जुड़े हार्मोन और डोपामिन भी शरीर की सही दिनचर्या से जुड़े होते हैं. अगर दिनचर्या सही रहेगी तो ब्रेन का फंक्शन भी बेहतर रहेगा.
परिवार को इन शुरुआती संकेतों पर ध्यान देना
डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि परिवार के लोगों को भी व्यक्ति की आदतों और व्यवहार में आने वाले बदलाव पर ध्यान देना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति बार बार एक ही बात भूल रहा है, लोगों को पहचानने में परेशानी हो रही है, रास्ता भूल रहा है या रुपये पैसे का साधारण हिसाब नहीं कर पा रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी शिकायत या लक्षण दिखाई देने पर सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि व्यक्ति क्यों भूल रहा है. हर भूलने की वजह डिमेंशिया नहीं होती. इसके पीछे दूसरी वजह भी हो सकती है.
कब न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी हो जाता
डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि अगर घर वालों को लगता है कि आपकी मेमोरी में समस्या आ रही है या आसपास के किसी डॉक्टर ने इस बारे में सलाह दी है, तो न्यूरोलॉजिस्ट से जरूर मिलना चाहिए. समय पर जांच होने से भूलने की समस्या के कारण का पता लगाया जा सकता है. कई बार विटामिन B12 की कमी भी याददाश्त से जुड़ी समस्या का कारण बन सकती है. मिल्क से जुड़े कई प्रोडक्ट में B12 मिलता है. अगर जांच में B12 की कमी सामने आती है, तो उसका इलाज और कमी को पूरा करना जरूरी है. इसलिए लगातार बढ़ रही भूलने की समस्या को उम्र का सामान्य असर मानकर छोड़ना सही नहीं है.
समय पर पहचान से समस्या को समझना आसान होता
डॉ. संजय पांडे बताते हैं कि भूलने की समस्या को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि इसके लक्षणों को समय रहते पहचाना जाए. कभी चाबी भूल जाना या किसी का नाम कुछ देर बाद याद आना सामान्य हो सकता है. लेकिन अगर भूलने की वजह से रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, लोगों को पहचानने में परेशानी हो, रास्ता भूलने लगे या पैसों का हिसाब करने में दिक्कत हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. सही दिनचर्या, पर्याप्त नींद और दिमाग का नियमित इस्तेमाल लंबे समय तक मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद कर सकता है. इसलिए याददाश्त में लगातार बदलाव दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच करानी चाहिए.



