Rajasthan

Eco Friendly Rakhi Bharatpur | भरतपुर में गोबर से बनीं अनोखी राखियां

Last Updated:August 16, 2026, 15:38 IST

Eco Friendly Rakhi Bharatpur: रक्षाबंधन पर भरतपुर की महिलाओं ने गाय के गोबर से ईको-फ्रेंडली राखियां बनाकर आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का बेहतरीन संदेश दिया है. हस्तनिर्मित ये राखियां पूरी तरह प्राकृतिक हैं और प्लास्टिक मुक्त रक्षाबंधन को बढ़ावा देती हैं. महिलाएं घर बैठे इन राखियों को बनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं. यह अनोखी पहल स्थानीय संसाधनों और हुनर को रोजगार से जोड़कर समाज में एक नया बदलाव ला रही है.

रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में राखियों की रौनक बढ़ने लगी है. इसी बीच भरतपुर में इस बार कुछ अनोखी और पर्यावरण के अनुकूल राखियां लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं. ये राखियां गाय के गोबर से तैयार की जा रही हैं. खास बात यह है कि इन्हें मशीनों से नहीं, बल्कि महिलाएं अपने हाथों से तैयार कर रही हैं. इन राखियों में पारंपरिक कला, रचनात्मकता और स्थानीय हुनर की खूबसूरत झलक देखने को मिल रही है.

गोबर से राखी तैयार करने की प्रक्रिया भी काफी खास है. सबसे पहले गाय के गोबर को अच्छी तरह तैयार कर उसे राखी के आकार में ढाला जाता है. इसके बाद इन्हें सुखाकर अलग-अलग रंगों और आकर्षक डिजाइनों से सजाया जाता है. राखियों पर फूल, पत्तियों और अन्य पारंपरिक आकृतियों की डिजाइन बनाई जाती है. महिलाएं अपनी कल्पना और हुनर के अनुसार हर राखी को अलग रूप देने का प्रयास करती हैं. इससे हर राखी अपने आप में खास नजर आती है.

इन राखियों को तैयार करने वाली महिलाओं का कहना है कि यह काम उनके लिए सिर्फ त्योहार की तैयारी नहीं, बल्कि रोजगार का एक जरिया भी बन गया है. घर के कामकाज के साथ महिलाएं अपने खाली समय में राखियां तैयार कर रही हैं. इससे उन्हें घर बैठे आमदनी का अवसर मिल रहा है. महिलाओं का कहना है कि अगर इस तरह के उत्पादों को बाजार में अच्छा स्थान मिले, तो वे बड़े स्तर पर काम कर सकती हैं. इससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भर भी बन सकती हैं.

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गोबर से बनी इन राखियों की खासियत यह भी है कि इन्हें पर्यावरण के अनुकूल माना जा रहा है. बाजार में मिलने वाली कई राखियां प्लास्टिक और अन्य कृत्रिम सामग्री से तैयार होती हैं. जबकि इन राखियों में प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है. यही वजह है कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूक लोग भी इन्हें पसंद कर रहे हैं. राखी के त्योहार के जरिए महिलाओं ने परंपरा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की कोशिश की है.

रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती के साथ आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली ये राखियां लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. भरतपुर की महिलाओं की यह पहल बताती है कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक हुनर को रोजगार से जोड़कर नई संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं.

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August 16, 2026, 15:38 IST

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