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Gardening Tips: सीताफल का पौधा लगाते समय इन 5 बातों का रखें ध्यान, वरना फूल आएंगे लेकिन फल नहीं लगेंगे

Last Updated:September 15, 2026, 06:30 IST

How to Plant Custard Apple at Home: घर की छत या बगीचे में गमले में सीताफल का पौधा आसानी से उगाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना पड़ता है. पौधे को पर्याप्त सीधी धूप देने के साथ गमले में पानी निकासी की व्यवस्था जरूरी है. जरूरत से ज्यादा सिंचाई जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है. समय-समय पर जैविक खाद देने और सूखी व कमजोर शाखाओं की छंटाई से पौधे की ग्रोथ बेहतर होती है. फूल आने के समय फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व उपयोगी हो सकते हैं. सीताफल में नर-मादा हिस्से अलग समय पर सक्रिय होने से हाथ से परागण करने पर फल कम बनने की समस्या दूर करने में मदद मिल सकती है.

सिरोही जिले के पहाड़ी इलाकों में सीताफल के पेड़ बहुतायत पाए जाते है. इस फल के पेड़ को घर में लगाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी है. सिरोही के तपोवन के बीके ललनभाई ने बताया कि घर में सीताफल का पेड़ लगाने के लिए सबसे पहले ऐसी मिट्टी का इस्तेमाल करना चाहिए जो भुरभरी हो और ज्यादा पानी को बाहर निकाल दें. घर में गमले में पौधे को उगाने के लिए बगीचे की मिट्टी में अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करना फायदेमंद होता है.

इसके अलावा कोकोपीट या थोड़ी रेत मिलाने से भी मिट्टी में हवा और पानी का बैलेंस सही बेहतर रहता है. पौधा लगाने एक बाद शुरुआत में करीब 12 से 14 इंच का गमला और पौधे के बढ़ने के बाद 18 से 20 इंच तक का गमला उपयोग में लाया जा सकता हैं. गमले के नीचे ज्यादा पानी को निकालने के लिए निकासी छेद करना जरूरी है. इससे गमले में बारिश कापानी नहीं भरता है. पानी जमा होने से सीताफल के पौधे की जड़ें कमजोर हो जाती है.

सीताफल की अच्छी ग्रोथ और फल के लिए पौधे को जरूरी रोशनी देना भी आवश्यक है. इसलिए पौधे को ऐसी जगह पर लगाना चाहिए, जहां दिन में सीधी धूप मिले. पौधे को पानी देते समय भी सावधानी बरतने की जरूरत होती है. रोजाना जरूरत से ज्यादा पानी देना भी नुकसान दायक होता है. जब मिट्टी की ऊपरी परत सूखी महसूस होने लगती है, तब पौधे को पानी देना चाहिए. खासकर बारिश के मौसम में सिंचाई कम करनी चाहिए. पौधे में फूल और फल आने के दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी होता है.

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सीताफल के पौधे को समय-समय पर जैविक खाद देने से उसकी ग्रोथ अच्छे से होती है. बड़े पौधों में खाद मिट्टी, पौधे की उम्र और आसपास की जलवायु के मुताबिक डालना चाहिए. सीताफल के फूल आने के समय पौधे की आवश्यकता के मुताबिक फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. वहीं खाद का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने के बजाय मिट्टी और पौधे की हालत से उपयोग करने की जरूरत होती है. साथ ही पौधे की सूखी, कमजोर और उलझी शाखाओं को समय-समय पर हटाना जरूरी होता है.

सीताफल की छंटाई का सही समय और तरीका पौधे की किस्म और जलवायु पर निर्भर करता है. उचित छंटाई से नई शाखाओं के साथ फूल और फल भी जल्दी आते हैं. सीताफल की खेती में एक खास बात उसके फूलों का परागण है. एक ही फूल में नर और मादा दोनों हिस्से होते हैं, लेकिन दोनों एक ही समय पर सक्रिय नहीं होते. कई बार फूल आने के बावजूद फल कम बनने की समस्या भी आती है. इस समस्या के लिए हाथ से परागण यानी ब्रश की मदद से पराग को दूसरे उपयुक्त फूल तक पहुंचाना काफी उपयोगी हो सकता है.

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September 15, 2026, 06:30 IST

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