Health Knowledge: बॉडी के कौन-कौन से अंग एक बार डैमेज हो जाए तो दोबारा ठीक नहीं होते, चाहे कितनी भी दवा खा लें

Last Updated:September 18, 2026, 19:35 IST
Irreversible Part of Body: क्या आप जानते हैं कि मानव शरीर में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण अंग होते हैं जो एक बार डैमेज हो जाए तो दोबारा से नहीं बन सकते. काम चलाने के लिए कोई दूसरा रास्ता अपना सकते हैं लेकिन हूबहू अंग नहीं बन सकते. और इस कारण रोगी की मौत भी हो सकती है. ऐसे एक नहीं बल्कि कई अंग हैं. आइए इसके बारे में आपको बताते हैं.शरीर के ये अंग दोबारा क्यों नहीं बनते.
Irreversible Part of Body: शरीर में बाहर से स्किन में किसी भी तरह की खरोंच लग जाए तो यह दोबारा से ठीक हो सकती है लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि शरीर में ऐसे कई अंग हैं जो एक बार डैमेज हो जाए तो यह कभी पूरी तरह से ठीक नहीं होंगे, चाहे इसके लिए आप कितनी भी दवाई क्यों न खा लें. हालांकि हमारे शरीर में ऐसे भी अंग हैं जो कितना भी ज्यादा खराब क्यों न हो जाए यह खुद को दोबारा से रिजैनरेट कर लेता है. शरीर में खुद को ठीक करने और टिशूज को मरम्मत करने की क्षमता होती है. लिवर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. लिवर अपने हिस्से का यदि 5 प्रतिशत भी बचा है तो खुद ही बन सकता है, कुछ अपवादों को छोड़कर लेकिन दिमाग की कोशिकाएं यदि एक बार मर जाए तो वहां उसकी जगह दूसरी कोशिकाएं नहीं बन सकती है. इस तरह इंसान कोमा में चला जाता है या ब्रेन डेड हो जाता है. हम यहां ऐसे ही कुछ अंगों के बारे में बताएंगे जो दोबारा से रीजैनरेट नहीं हो सकते, इसलिए ये आज भी विज्ञान के सामने चुनौती बने हुए हैं.
हार्ट की मांसपेशियां
हार्ट हमारे शरीर में एक ही है जो पूरे शरीर में खून को पंप करता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि हार्ट की मांसपेशीय कोशिकाएं जिसे कार्डियोमायोसाइट्स कहा जाता है, एक बार मर जाए तो यह दोबारा से रीजेनरेट नहीं हो सकता है. आप कहेंगे कि फिर इंसान जिंदा कैसे रहता है. तो इसका जवाब है कि वह अंग जिंदगी भर के लिए कमजोर हो जाता है और उसकी जगह स्कार सेल्स यानी घाव के निशान वाली कोशिकाएं ले लेती है जो हमेशा दोयम दर्जे की ही होती है. इसका कारण यह है कि जन्म के तुरंत बाद कार्डियोमायोसाइट्स अपनी वृद्धि बंद कर देती हैं और परमानेंट स्टेज में चली जाती हैं. सेल साइकिल स्थायी रूप से रुक जाता है जिससे नई कोशिकाएं नहीं बन पाती है. टीओआई की खबर में इंटरनल मेडिसीन के सीनियर डायरेक्टर डॉ. जयंत ठाकुरिया कहते हैं कि एक बार जब हार्ट अटैक हो जाए तो यह कार्डियोमायोसाइट्स को जबर्दस्त नुकसान पहुंचाते हैं. इससे इसकी कई कोशिकाएं मर जाती है. इसकी जगह फाइब्रस स्कार टिशू भर जाते हैं लेकिन वे कभी भी हेल्दी टिशूज नहीं बनते. इस कारण हार्ट को पंप करने की क्षमता में स्थायी नुकसान उठाना पड़ता है. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि दिल पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता. सही इलाज, कार्डियक रिहैबिलिटेशन और दवाइयां बचे हुए हार्ट की मांसपेशियों की सुरक्षा करने में सक्षम है लेकिन पहले जैसा कभी नहीं हो सकता है. इसलिए हार्ट की मांसपेशियों के बड़े हिस्से को दोबारा बनाना आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.
ब्रेन सेल्स रीढ़ की हड्डी का नर्व
ब्रेन सेल्स जिसे न्यूरॉन्स कहा जाता है और रीढ़ की हड्डी के नर्व्स भी अगर एक बार डैमेज हो जाए तो ये दोबारा नहीं बनते. हमारे शरीर के न्यूरॉन्स अत्यधिक विशिष्ट कोशिकाएं हैं. ये विकास के शुरुआती चरण के बाद कोशिका विभाजन की क्षमता पूरी तरह खो देती हैं. इसलिए जब एक बार डैमेज हो जाए तो नई कोशिकाएं नहीं बन पाती हैं. इसी तरह रीढ़ की हड्डी में नर्व्स कोशिकाएं होती हैं जो ब्रेन से संदेशों का आदान-प्रदान करती हैं. यह भी दोबारा नहीं बनती. चोट वाली जगह पर फाइब्रस स्कार टिश्यू बन जाता है, जो नए कनेक्शन बनने के रास्ता को ही रोक देता है. इसलिए ब्रेन और रीढ़ की हड्डी यानी स्पाइनल कॉर्ड को ठीक करना बेहद कठिन चुनौती है. इसे रेगुलर देखभाल और कई तरह के आधुनिक थेरेपी के माध्यम से थोड़ा बहुत मैनेज किया जा सकता है लेकिन पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है. टीओआई में ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट के एक्सपर्ट डॉ. सत्येंद्र कातेवा कहते हैं कि न्यूरॉन्स में रीजनरेट होने की क्षमता बहुत सीमित होती है. यही वजह है कि एक बार जब उसमें चोट लग जाए तो उसमें स्थायी समस्याएं होने की आशंका रहती है. इसलिए मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी की चोट के बाद ठीक होने का मतलब यह नहीं होता कि टिश्यू दोबारा से बन जाए. इसे रिहैबिलिटेशन और आधुनिक थेरेपी के माध्यम से तंत्रिका तंत्र को ढलने और नए रास्ते बनाने में मदद मिल सकता है, भले ही मूल क्षतिग्रस्त रास्ते दोबारा न उग सकें.
कार्टिलेज का भी बनना मुश्किल
कार्टिलेज हमारे शरीर में मौजूद एक मजबूत लेकिन रबर जैसा लचीला कनेक्टिव टिश्यू है. कार्टिलेज हड्डियों से ज्यादा नरम लेकिन मांसपेशियों से ज्यादा सख्त होता है. यह जोड़ों यानी घुटने, कोहनी, कानों, नाक और रीढ़ की हड्डी में पाया जाता है. इसका काम दो हड्डियों के बीच कुशन यानी गद्दी की तरह सपोर्ट करने का है ताकि हड्डियां आपस में रगड़ नहीं खाए. यह चलने-फिरने, कूदने या झटके लगने पर हड्डियों को आपस में टकराने और घिसने से बचाता है. यह नाक और कान जैसे अंगों को एक निश्चित ढांचा और लचीलापन प्रदान करता है. अगर कार्टिलेज भी एक बार खत्म हो जाए तो यह भी दोबारा से नहीं बनते. इसका निर्माण प्रक्रिया बेहद अनोखा है. कार्टिलेज तक पोषक तत्वों को पहुंचाने के लिए डायरेक्ट ब्लड वैसल्स का नेटवर्क जुड़ा नहीं होत है. ऐसे में कार्टिलेज का पोषण डिफ्यूजन प्रोसेस से होता है यानी दूर से ब्लड वैसल्स प्रेशर के माध्यम से यहां पोषक तत्व भेजता है और वहां से इसी तरह आर्टरीज में अपशिष्ट पदार्थ बाहर होता है. डॉ. काटेवा कहते हैं कि टिश्यू में पर्याप्त ब्लड सप्लाई न होने के कारण कुछ प्रकार के कार्टिलेज में ठीक होने की क्षमता बहुत कम होती है. इसलिए कार्टिलेज का नुकसान बहुत धीरे-धीरे ठीक होता है और कभी-कभी यह शरीर के संबंधित अंगों में लगातार बनी रहने वाली समस्याओं का कारण बन सकता है. यही एक कारण है कि ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी स्थितियों से जुड़ा कार्टिलेज का नुकसान स्थायी नुकसान बन जाता है.
और कौन-कौन से अंग दोबारा नहीं बनते
हार्ट की पेशीय कोशिका, कार्टिलेज, ब्रेन सेल्स, रीढ़ की हड्डी के नर्व्स के अलावा बहुत सारी हड्डियां, किडनी के नेफ्रॉन्स, फेफड़ों के एल्वियोली और आंखों की ऑप्टिक नर्व जैसे अंगों में टिशूज को दोबारा से री-जैनरेट नहीं किया जा सकता है. इन अंगों में एक बार स्थायी नुकसान होने के बाद केवल बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है. उस अंग को पुरानी स्थिति में वापस नहीं लाया जा सकता.
About the AuthorLakshmi Narayan
मीडिया में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता के हर विधा में माहिर हैं. भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांपने की अद्भुत कला उनके अंदर समाहि…
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September 18, 2026, 19:35 IST



