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नोएडा-NCR के युवा मानसिक दबाव से परेशान, अंधेरे में रस्सी को सांप समझने जैसा है तनाव, डिप्रेशन से निपटने के लिए करें ये काम, एक्सपर्ट ने बताया

नोएडा: नोएडा और एनसीआर जैसे महानगरों में तेजी से बदलती जीवनशैली, कॉर्पोरेट कंपनियों में काम का दबाव, समय पर लक्ष्य पूरा करने की चुनौती और पारिवारिक जिम्मेदारियां लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं. कई बार छोटी सी परेशानी भी दिमाग में इतनी बड़ी बन जाती है कि व्यक्ति उससे बाहर निकलने का रास्ता नहीं खोज पाता. महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, नोएडा के डिप्टी डीन गौरव ठाकुर ने इसे अंधेरे में पड़ी रस्सी को सांप समझने जैसा बताया. उनके अनुसार, कई बार किसी स्थिति को लेकर मन में बना डर और आशंका वास्तविक परेशानी से बड़ा रूप ले लेते हैं. हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि मानसिक तनाव या डिप्रेशन केवल कल्पना है. मानसिक परेशानियों को समझना और जरूरत पड़ने पर एक्सपर्ट्स की मदद लेना जरूरी है.

विचारों को समझना और पहचाना जरूरी

महानगरों में तेजी से आगे बढ़ने और कम समय में अधिक हासिल करने की चाह भी तनाव बढ़ा सकती है. गौरव ठाकुर के मुताबिक, जब व्यक्ति हर समय जल्दी लक्ष्य हासिल करने और अपनी अपेक्षाओं पर खरा उतरने का दबाव महसूस करता है, तो उसका मानसिक तनाव बढ़ने लगता है. ऐसी स्थिति में अपने विचारों को समझना और यह पहचानना जरूरी है कि परेशानी की असली वजह क्या है. नोएडा में काम करने वाले युवा शिवम यादव बताते हैं कि तनाव महसूस होने पर वह ध्यान लगाने की कोशिश करते हैं. उनके मुताबिक, हर बात को जरूरत से ज्यादा सोचने के बजाय खुद को शांत रखने और समस्या का समाधान खोजने पर ध्यान देना चाहिए.

योग इंस्ट्रक्टर ने दी ये सलाह

योग प्रशिक्षक पीयूष, सुधीर, निकिता का कहना है कि तनाव से निपटने के लिए सबसे पहले यह समझना चाहिए कि आखिर परेशानी किस वजह से हो रही है. समस्या की वजह पहचानने के बाद उसके समाधान पर विचार करना आसान हो सकता है. वह खुद से सवाल करने और अपने लिए समय निकालने को महत्वपूर्ण मानते हैं. उनके अनुसार, अगर किसी परेशानी का समाधान खुद नहीं मिल रहा है, तो माता-पिता, दोस्तों, गुरुजनों या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बातचीत करनी चाहिए. परिवार और समाज से जुड़े रहने पर व्यक्ति अपनी परेशानियां साझा कर सकता है और उसे दूसरे लोगों के अनुभवों से भी मदद मिल सकती है.

योग सबसे वेस्ट उपाय

वही सुहेल का मानना है कि ध्यान, योग और मन को शांत रखने का अभ्यास तनाव प्रबंधन में मददगार हो सकता है. उनका कहना है कि परेशानी आने पर जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय समस्या को समझने और उसके समाधान की दिशा में काम करना चाहिए. वहीं, भावातीत ध्यान की इंडिया हेड शिक्षिका अदिति श्रीवास्तव के मुताबिक, हर व्यक्ति के जीवन में तनाव के कारण अलग-अलग हो सकते हैं. कई बार लोग जानते हैं कि कौन सी आदत उनके लिए ठीक नहीं है, लेकिन उसे बदलना आसान नहीं होता. ऐसे में तनाव से निपटने के व्यावहारिक तरीके अपनाना और नियमित अभ्यास करना महत्वपूर्ण है. स्पिरिचुअल रीजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया और महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने मिलकर एक सेमिनार किया और आज से ‘तनाव से ठहराव की ओर’ पहल शुरू की है. जिसमें तमाम वर्ग के लोगों को उनके कार्यस्थल पर पहुंचकर सेशन देगें.

तनाव को कभी न करें नजरअंदाज

वही मेदांता हॉस्पिटल की मुस्कान त्रिखा, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज़ ने बताया कि मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, तनाव को नजरअंदाज करना या हर परेशानी को केवल सकारात्मक सोच से ठीक हो जाने वाली समस्या मानना उचित नहीं है. लगातार उदासी, घबराहट, नींद या भूख में बदलाव, काम में मन नहीं लगना और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होना ऐसे संकेत हो सकते हैं, जिन पर ध्यान देना चाहिए. किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना, नियमित दिनचर्या बनाए रखना, पर्याप्त नींद लेना और शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालना मददगार हो सकता है.

रोजमर्रा की जिंदगी में कभी-कभी उदास या तनाव में रहना सामान्य है, लेकिन जब यह परेशानी लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर पहले पसंद आने वाली चीजों में मन न लगे, हर समय थकान या उदासी महसूस हो, नींद लेने और ध्यान लगाने में परेशानी हो या रोज के काम करना मुश्किल लगने लगे, तो यह मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना जरूरी है. मदद लेने के लिए परेशानी बढ़ने का इंतजार न करें.

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