39 साल तक दिल ने किया उल्टा काम, फिर चढ़ा डॉक्टरों के हत्थे और बन गया अनोखा रिकॉर्ड

Last Updated:August 05, 2026, 10:21 IST
सफदरजंग अस्पताल में 39 साल के मरीज का पहला रोबोटिक वॉल्व रिप्लेसमेंट हुआ है. इस मरीज का दिल जन्म से ही दिल उल्टा काम कर रहा था. हालांकि डॉक्टरों ने महज 3 सेंटीमीटर का चीरा लगाकर इस सर्जरी को सफल तरीके से पूरा किया. सफदरजंब अस्पताल के डॉक्टरों ने 39 साल से गलत काम कर रहे हार्ट की सर्जरी की है.
Congenital Heart Disease: दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दिल की बीमारी का दिलचस्प मामला सामने आया है. यहां एक मरीज का दिल 39 साल तक वह काम करता रहा, जो उसे नहीं करना चाहिए था, आखिरकार दिल में खराबी आ गई और मरीज को डॉक्टरों के पास जाना पड़ा. फिर डॉक्टरों ने उसके साथ जो किया उससे इतिहास बन गया. डॉक्टरों ने दुनिया का पहला रोबोटिक वॉल्व रिप्लेसमेंट किया.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक सफदरजंग अस्पताल में पहुंचे 39 साल के शख्स का दिल जन्म से ही उल्टा काम कर रहा था. जो काम उसे करना चाहिए था, वह नहीं कर रहा था, जिसका असर दिल के वॉल्व पर पड़ता रहा और वह खराब हो गया.
आमतौर पर सामान्य व्यक्ति के दिल का दायां हिस्सा सिर्फ फेफड़ों को खून भेजता है और बायां हिस्सा पूरे शरीर तक खून पहुंचाता है लेकिन इस मरीज में ये भूमिकाएं एकदम उलटी थीं. इसके दिल का दायां हिस्सा, जो कम दबाव में सिर्फ फेफड़ों के लिए बना होता है, लगभग 39 साल तक फेफड़ों के साथ-साथ पूरे शरीर तक खून पंप करता रहा. इससे 40 की उम्र के आसपास आते-आते उसका दिल कमजोर हो गया और एक वाल्व खराब हो गया.
इसके बाद मरीज को वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने मरीज की इस बीमारी को डायग्नोस किया. काफी सोच विचार के बाद डॉक्टरों ने इस मुश्किल केस में दुनिया का पहला रोबोटिक वाल्व रिप्लेसमेंट ऑपरेशन करने का फैसला किया. चूंकि दिल के वॉल्व के सामान्य ऑपरेशन में छाती की हड्डी काटनी पड़ती है, लेकिन यहां डॉक्टरों ने रोबोट की मदद से सिर्फ 3 सेंटीमीटर का छोटा छेद किया और चीरा लगाकर काम पूरा कर दिया.
इस ऑपरेशन की टीम का नेतृत्व डॉ. अनुभव गुप्ता ने किया जो अस्पताल में कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के प्रमुख हैं. उन्होंने बताया कि मरीज का दिल मिरर इमेज की तरह उलटा था, इसलिए डॉक्टरों को सर्जरी के दौरान पूरा प्रोसेस उल्टा करना पड़ा. इसके लिए उन्होंने चार दिन तक प्लानिंग की और ऑपरेशन में 3-4 घंटे लगे.
उन्होंने बताया कि सर्जरी में मरीज को बड़ी चीरा या हड्डी काटने की जरूरत नहीं पड़ी और कुछ दिनों में ही उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई. फिलहाल उसकी हालत एकदम ठीक है. यह दुनिया का पहला रोबोटिक वॉल्व ऑपरेशन है.
डॉक्टरों का कहना है कि अब तकनीक काफी आगे बढ़ गई है. ये ऑपरेशन साबित करता है कि जन्मजात दिल की बहुत जटिल खराबी को भी रोबोटिक तकनीक से आसानी और कम दर्द के साथ ठीक किया जा सकता है.
About the Authorप्रिया गौतमSenior Correspondent
Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi..com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …
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August 05, 2026, 10:21 IST



