‘जा ओपनिंग कर, फ्लॉप हुआ तो मैं हूं ना…’ वीरेंद्र सहवाग को किसने बनाया दुनिया का खूंखार ओपनर

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‘जा ओपनिंग कर, फ्लॉप हुआ तो मैं हूं ना…’ सहवाग को किसने बनाया विस्फोटक ओपनर
Last Updated:August 19, 2026, 18:18 IST
How Virender Sehwag becomes Opener: वीरेंद्र सहवाग का मिडिल ऑर्डर बैट्समैन से ओपनर बनना भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ. कई लोग इसे सौरव गांगुली या जॉन राइट का सोच मानते हैं, लेकिन यह सुझाव तेज गेंदबाज जहीर खान ने दिया था. सचिन तेंदुलकर के चोटिल होने पर 2001 में वनडे और 2002 में टेस्ट में ओपनिंग करने वाले सहवाग ने विस्फोटक बल्लेबाजी से नया इतिहास रचा.वीरेंद्र सहवाग को ओपनर बनाने में जहीर खान का बहुत बड़ा रोल रहा था.
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे मोड़ आए, जिन्होंने इस खेल की दिशा और दशा दोनों को हमेशा के लिए बदल दिया. ऐसा ही एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फैसला था वीरेंद्र सहवाग को मिडिल ऑर्डर से उठाकर ओपनर के तौर पर मैदान पर उतारना. आज दुनिया जिन्हें क्रिकेट इतिहास के सबसे विध्वंसक और मनोरंजक ओपनर्स में गिनती है, उन्होंने अपने इंटरनेशनल करियर की शुरुआत निचले और मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाज के तौर पर की थी. लेकिन एक सुझाव ने न केवल सहवाग की तकदीर बदली, बल्कि विश्व क्रिकेट को बल्लेबाजी का एक नया और बेबाक अंदाज दे दिया.
आमतौर पर फैंस का मानना रहता है कि वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) को ओपनर बनाने का फैसला तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) या फिर कोच जॉन राइट (John Wright) का रहा होगा. लेकिन सच बेहद दिलचस्प है. इस मास्टरस्ट्रोक के पीछे जिस खिलाड़ी का दिमाग था, वह कोई बल्लेबाज नहीं बल्कि भारतीय तेज गेंदबाजी के अगुआ जहीर खान (Zaheer Khan) थे.
वीरेंद्र सहवाग को ओपनर बनाने में जहीर खान का बहुत बड़ा रोल रहा था.
जहीर खान का वो सुझाव जिसने बदल दिया भारतीय क्रिकेटइस ऐतिहासिक बदलाव की कहानी खुद सहवाग ने पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर (Shoaib Akhtar) के साथ एक बातचीत के दौरान साझा की थी. शोएब ने जब 1999 के एक मैच को याद करते हुए पूछा कि सहवाग जैसा विस्फोटक बल्लेबाज सातवें नंबर पर क्या कर रहा था, तो वीरू ने सहजता से जवाब दिया कि वे उस समय मध्यक्रम में ही खेला करते थे. इसके बाद जब शोएब ने पूछा कि उन्हें ओपनिंग कराने का विचार आखिर किसका था, तो सहवाग ने खुलासा किया कि यह सुझाव जहीर खान ने कप्तान सौरव गांगुली को दिया था. गांगुली ने इस सुझाव पर भरोसा जताया और सहवाग को पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी सौंप दी. जिसके बाद सहवाग ने गांगुली से कहा कि आप लिखकर दो कि अगर मैं ओपनिंग में फेल हुआ तो मुझे टीम से बाहर नहीं किया जाएगा. गांगुली ने बाद में सहवाग को आश्वासन दिया कि उन्हें टीम से बाहर नहीं किया जाएगा.
चोट से मिली जिम्मेदारी और टेस्ट क्रिकेट में नया अध्यायजुलाई 2001 में श्रीलंका और न्यूजीलैंड के खिलाफ हुई ट्राई वनडे सीरीज के दौरान सचिन तेंदुलकर चोटिल हो गए थे. इसी दौरान सहवाग को पहली बार वनडे क्रिकेट में सौरव गांगुली के साथ पारी की शुरुआत करने का मौका मिला. इसके बाद साल 2002 के इंग्लैंड दौरे पर सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में भी पहली बार ओपनिंग की कमान संभाली. लाल गेंद के सामने तकनीक को सर्वोपरि मानने वाले दौर में सहवाग ने अपनी निडर और आक्रामक बल्लेबाजी से टेस्ट क्रिकेट के स्थापित नियमों को खारिज कर दिया. पहली गेंद से ही गेंदबाज पर दबाव बनाने की उनकी कला ने भारत को विदेश में कई यादगार जीत दिलाईं.
टेस्ट करियर और मुल्तान के सुल्तान का जलवाअपने शानदार करियर के दौरान सहवाग ने 104 टेस्ट मैचों की 180 पारियों में भारत का प्रतिनिधित्व किया. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने करीब 49.34 की बेहतरीन औसत से 8,586 रन बनाए. पारंपरिक टेस्ट क्रिकेट को वनडे के अंदाज में खेलने वाले सहवाग ने इस प्रारूप में 23 शतक और 32 अर्धशतक जड़े. टेस्ट क्रिकेट में दो बार तिहरा शतक (300 रन) जड़ने वाले वे भारत के पहले बल्लेबाज बने. मुल्तान में पाकिस्तान के खिलाफ उनका 309 रन का स्कोर और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चेन्नई में खेली गई 319 रनों की पारी आज भी क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में तरोताजा है.
वनडे और टी20 में रनों का सैलाबवनडे क्रिकेट में भी उनका दबदबा कायम रहा. 251 वनडे मुकाबलों में सहवाग ने 35.05 की औसत और 104 से अधिक की स्ट्राइक रेट से 8,273 रन बनाए. वनडे करियर में उन्होंने 15 शतक और 38 अर्धशतक ठोके. इंदौर में वेस्टइंडीज के खिलाफ लगाया गया उनका 219 रनों का दोहरा शतक वनडे इतिहास के सबसे आक्रामक दोहरे शतकों में से एक माना जाता है. टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट के शुरुआती दौर में भी सहवाग ने अपनी छाप छोड़ी. उन्होंने भारत के लिए 19 टी20 मैच खेले, जिनमें दो अर्धशतकों की मदद से 394 रन बनाए. पावरप्ले के ओवरों में उनके द्वारा दी जाने वाली तेज शुरुआत ने भारत को कई बार मजबूत स्थिति में पहुंचाया.
विश्व कप जीत में ऐतिहासिक योगदानसहवाग सिर्फ व्यक्तिगत आंकड़ों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे भारतीय क्रिकेट के उस स्वर्णिम दौर का अहम हिस्सा थे जिसने भारत को विश्व विजेता बनाया. वे 2007 में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित पहला टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के मुख्य सदस्य थे. इसके बाद 2011 में जब भारत ने 28 साल बाद अपनी सरजमीं पर वनडे विश्व कप का खिताब उठाया, तब भी सहवाग ने हर मैच की पहली गेंद पर चौका मारकर भारत को तूफानी शुरुआत दिलाने की अपनी अनूठी परंपरा कायम रखी थी.
About the AuthorKamlesh Raiचीफ सब एडिटर
कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…
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New Delhi,New Delhi,Delhi
First Published :
August 19, 2026, 18:18 IST



