पशुओं का पेट अचानक फूल जाए तो न करें नजरअंदाज, आफरा बन सकता है जानलेवा, जानें बचाव के उपाय

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पशु का पेट फूलना मामूली नहीं, आफरा बन सकता है जानलेवा, जानें बचाव के उपाय
Last Updated:August 21, 2026, 08:39 IST
Symptoms and Prevention of Bloat in Livestock: पशुओं में आफरा यानी ब्लोट की समस्या आने पर लापरवाही बरतना जानलेवा हो सकती है. पशु चिकित्सक के अनुसार चारे में अचानक बदलाव, बड़ी मात्रा में हरा चारा, सड़ा-गला या फफूंद लगा चारा, दूषित पानी और कमजोर पाचन शक्ति इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं. आफरा होने पर पशु का पेट खासकर बाईं तरफ फूल जाता है और गैस के दबाव से उसे सांस लेने में परेशानी होने लगती है. मुंह खोलकर सांस लेना, बेचैनी, अधिक लार और मुंह से झाग निकलना भी इसके लक्षण हैं. बचाव के लिए हरे चारे के साथ सूखा चारा दें और आहार में बदलाव धीरे-धीरे करें. समस्या होने पर पशु को धीरे-धीरे चलाने और बाईं तरफ हल्की मालिश से राहत मिल सकती है. गंभीर स्थिति में तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है.
पशुपालकों के लिए पशुओं का आहार केवल दूध उत्पादन और सेहत से ही नहीं, बल्कि उनकी जान से भी जुड़ा होता है. चारे में अचानक बदलाव, दूषित पानी, सड़ा-गला या फफूंद लगा चारा और पाचन शक्ति कमजोर होने जैसी वजहों से पशुओं में आफरा (ब्लोट) की समस्या हो सकती है. समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है.
पशु चिकित्सक विनोद चौधरी के अनुसार, पशुपालकों को आहार में बदलाव धीरे-धीरे करना चाहिए और हरे चारे के साथ सूखा चारा जरूर मिलाना चाहिए. आफरा होने पर पशु के पेट में गैस जमा होने लगती है और खास तौर पर बाईं तरफ का पेट असामान्य रूप से फूल जाता है. फूले हुए हिस्से पर हल्की थपकी देने पर ढोल जैसी आवाज सुनाई दे सकती है. पेट में गैस का दबाव बढ़ने से फेफड़ों पर भी दबाव पड़ता है, जिससे पशु को सांस लेने में परेशानी होने लगती है.
पशु नथुने फैलाकर और मुंह खोलकर सांस लेने की कोशिश करता है तथा बेचैनी में बार-बार उठता-बैठता है. कई मामलों में मुंह से झाग और अधिक लार भी निकलने लगती है. पशु चिकित्सक विनोद चौधरी ने बताया कि पशुओं को लगातार सूखा चारा खिलाने के बाद अचानक बड़ी मात्रा में हरा चारा देना आफरा का कारण बन सकता है. इसी तरह सड़ा-गला, फफूंद लगा या बासी खाना खिलाना भी नुकसानदायक है. दूषित पानी, कब्ज, कुपोषण और पाचन शक्ति कमजोर होने से भी समस्या बढ़ सकती है.
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काम या अधिक परिश्रम के तुरंत बाद पशु को बहुत ठंडा पानी पिलाने से भी पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है. इसलिए आहार और पानी देने में विशेष सावधानी जरूरी है. पशु चिकित्सक ने बताया कि आफरा में पशु को पकड़कर धीरे-धीरे चलाने से राहत मिलती है. इसके अलावा बाईं तरफ के पेट पर हल्के हाथ से मालिश भी करना चाहिए. वहीं, बाईं तरफ पशु को इस तरह खड़ा रखना कि उसका धड़ ऊंचा रखें. इससे पशु को राहत मिलती है.
गंभीर स्थिति में गैस निकालने के लिए चिकित्सकीय प्रक्रिया की आवश्यकता पड़ सकती है. पशुपालक ध्यान रखें कि पेट में छेद करने जैसी प्रक्रिया सिर्फ अनुभवी पशु चिकित्सक से ही करवानी चाहिए, क्योंकि गलत तरीके से ऐसा करने पर पशु की जान को खतरा हो सकता है. पशु चिकित्सक के अनुसार आफरा से बचाव के लिए हरे चारे के साथ सूखा चारा मिलाकर खिलाएं और चारे-दाने में बदलाव अचानक न करें. सड़ा-गला या फफूंद लगा चारा बिल्कुल न दें.
पशु आहार में पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार खनिज लवण मिश्रण जरूर शामिल करें. पशुओं में किसी भी तरह की समस्या होने पर केरोसिन सुंघाने या जादू-टोने जैसे अंधविश्वासी उपायों से बचें. इसके बजाय तुरंत योग्य पशु चिकित्सक से संपर्क करें. बीमारी या समस्या की समय पर पहचान और उपचार बेहद जरूरी है. लापरवाही बरतने पर स्थिति गंभीर हो सकती है और पशु के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. पशुपालक नियमित निगरानी और उचित देखभाल रखें.
First Published :
August 21, 2026, 08:39 IST



