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बाजरे से कमाना है ज्यादा मुनाफा? बुवाई से पहले किसान जरूर करें ये काम, बंपर मिलेगी पैदावार

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बाजरे से कमाना है ज्यादा मुनाफा? बुवाई से पहले करें ये काम, बंपर मिलेगी उपज

Last Updated:June 25, 2026, 08:43 IST

Pearl Millet Cultivation Tips: राजस्थान में मानसून की शुरुआत के साथ ही बाजरे की बुवाई का समय आ गया है. कृषि अधिकारी कैलाश चंद्र शर्मा ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की सलाह दी है. उन्होंने बताया कि बाजरे की बुवाई मध्य जून से जुलाई के तीसरे सप्ताह तक करना सबसे उपयुक्त रहता है. उन्नत किस्मों के बीजों का चयन, बीज उपचार और उचित दूरी पर बुवाई करने से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. किसानों को आरएचबी श्रृंखला की उन्नत किस्मों का उपयोग करने की सलाह दी गई है. सही कृषि प्रबंधन अपनाकर किसान बेहतर पैदावार और अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं.

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धौलपुर. राजस्थान में मानसून की दस्तक के साथ ही खरीफ फसलों की तैयारियां तेज हो गई हैं. प्रदेश में करीब 45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बाजरे की खेती की जाती है. बाजरा कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली प्रमुख फसल है, इसलिए किसानों के लिए इसकी सही समय पर बुवाई और वैज्ञानिक तरीके से खेती करना बेहद जरूरी है. कृषि अधिकारी कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि बाजरे की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय मध्य जून से जुलाई के तीसरे सप्ताह तक है. पहली अच्छी बारिश के बाद बुवाई करने से बीजों का अंकुरण बेहतर होता है और फसल की बढ़वार भी अच्छी रहती है.

बाजरे के लिए बलुई दोमट मिट्टी और अच्छी जल निकासी वाली भूमि सबसे उपयुक्त मानी जाती है. बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिए. अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्मों के बीजों का चयन करना जरूरी है. किसानों को आरएचबी-173, आरएचबी-177, आरएचबी-223, आरएचबी-228, आरएचबी-233 (बायोफोर्टिफाइड) और आरएचबी-234 (बायोफोर्टिफाइड) जैसी उन्नत किस्मों का उपयोग करना चाहिए. प्रति हेक्टेयर लगभग 4 किलोग्राम प्रमाणित बीज पर्याप्त रहता है.

बुवाई से पहले बीजों की अच्छी तरह से करें उपचार

बुवाई से पहले बीज उपचार करना भी जरूरी है. गूंदिया और चैंपा रोग से बचाव के लिए बीजों को 20 प्रतिशत नमक के घोल में पांच मिनट तक डुबोकर हल्के और खराब बीज अलग कर दें. इसके बाद बीजों को साफ पानी से धोकर छाया में सुखाएं. वहीं सफेद लट और दीमक के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड या क्लोथियानिडिन से बीज उपचार कर बुवाई करनी चाहिए. कृषि अधिकारी कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि कतार से कतार की दूरी 40 से 50 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. बुवाई के 15 से 20 दिन बाद छंटाई कर पौधों के बीच की दूरी लगभग 15 सेंटीमीटर कर देनी चाहिए.

ब्लास्ट रोग दिखने पर किसान करें ये उपाय

उन्होंने बताया कि फसल को पर्याप्त पोषण देने के लिए बुवाई से पहले 10 से 12 टन गोबर की सड़ी हुई खाद या 2.5 टन वर्मीकम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर खेत में डालना लाभदायक रहता है. रासायनिक उर्वरकों का उपयोग क्षेत्र की वर्षा के अनुसार करना चाहिए. नत्रजन की आधी मात्रा और फॉस्फोरस की पूरी मात्रा बुवाई के समय दें, जबकि शेष नत्रजन 25 से 30 दिन बाद बारिश होने पर डालें. वहीं ब्लास्ट रोग के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अनुशंसित फफूंदनाशक का छिड़काव करें. सही समय पर बुवाई, बीज उपचार और संतुलित पोषण अपनाकर किसान बाजरे की अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं और अपनी आय बढ़ा सकते हैं.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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