कैंसर कोशिकाओं को चुन-चुनकर मारेगी ये स्मार्ट दवा, भारतीय वैज्ञानिकों ने किया है तैयार, कीमोथेरेपी की जरूरत नहीं

Last Updated:August 20, 2026, 18:08 IST
Smart Drug for Cancer Treatment: भारतीय वैज्ञानिकों ने ऐसी दवा तैयार की है जो सिर्फ कैंसर कोशिकाओं को चुन-चुन कर मारेगी. इस दवा को लेने के बाद मुश्किल कीमोथेरेपी की जरूरत नहीं है. खास बात यह है कि इस स्मार्ट दवा का कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं होगा जो बहुत बड़ी बात है क्योंकि कीमोथेरेपी में आसपास के अधिकांश हेल्दी सेल्स भी नष्ट हो जाते हैं. इस स्मार्ट दवा को बनाने में आईएएसएसटी और आईआईटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर बनाया है.कैंसर की नई स्मार्ट दवा.
Smart Drug for Cancer Treatment : हमारे शरीर में कई लाख अरब कोशिकाएं हैं. ये कोशिकाएं आकार में सुंदर और एकसमान होती हैं. लेकिन जब कोई कोशिका कैंसर कोशिका में बदलती है तो इसका डीएनए खराब हो जाता है और आकार में बेहद अटपटे और टेढ़ी-मेढ़ी होती है. ये कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं से बहुत तेजी से अपनी कॉपी कर दूसरी कॉपी बन जाती है. तेजी से ट्यूमर का रूप ले लेती है और शरीर की हेल्दी कोशिकाओं का खाना छीनकर उसे खत्म करने लगती है. ये कोशिकाएं बहुत चालाक होती हैं. ये बहुत तेजी से अपना रूप बदल लेती हैं और दवाइयों के असर से बचने के लिए खुद को छुपा लेती हैं. मगर अब ऐसा नहीं होगा. भारतीय वैज्ञानिकों ने इसके लिए स्मार्ट दवा तैयार की है जो जो चुन-चुनकर सिर्फ इसी कोशिका को खत्म करेगी. अब तक जो दवा है वह कैंसर कोशिकाओं के पास पहुंचकर उसे खत्म करने की कोशिश तो करती है लेकिन इस कोशिश में आस-पास की हेल्दी कोशिकाओं को भी मार देती है लेकिन स्मार्ट दवा अब हेल्दी कोशिकाओं को नहीं मारेगी बल्कि यह सिर्फ कैंसर कोशिकाओं में ही घुसेगी और सिर्फ उसे ही खत्म करेगी.
कीमोथेरेपी का विकल्प
साइंस एवं टेक्नोलॉजी डिपार्ट के अधीन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के डॉ. आसीस बाला और आईआईठी गुवाहाटी के डॉ. केपी भाबक के नेतृत्व में किए गए शोध में आरके-251 नामक एक नई स्मार्ट कैंसर दवा विकसित की गई है. आरके-251 को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह सिर्फ कैंसर कोशिकाओं में ही पहुंचकर सक्रिय होती है. अब तक इसके लिए कीमोथेरेपी दी जाती थी जिससे वहां आस-पास की हेल्दी कोशिकाएं भी नष्ट हो जाती थी. लेकिन इससे नहीं होगी. इसलिए यह स्मार्ट दवा कीमोथेरेपी का बेहतर विकल्प है. इसे टारगेटेड थेरेपी कही जाती है. कैंसर के इलाज में अक्सर इसका सामना करना पड़ता है जिसके कारण अच्छी ही महत्वपूर्ण कोशिकाएं नष्ट होने लगती है. इसका प्रतिकूल प्रभाव और साइड इफेक्ट होते हैं. इसी कारण टारगेटेड पद्धतियों की आवश्यकता पैदा हुई है जो शरीर में सामान्य टिशू में निष्क्रिय रहें और विशेष रूप से ट्यूमर के अंदर पहुंचकर सक्रिय हो जाए.वैज्ञानिकों ने इस विचार को वास्तविकता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है.
ट्रायल में शानदार सफलता
कैंसर कोशिकाएं अक्सर रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़ ROS के उच्च स्तर का उत्पादन करती हैं. यह केमिकल बेहद हानिकारक मॉल्यूक्यूल होते हैं. जब आरके-251 कैंसर कोशिका में प्रवेश करता है, तो उच्च Ros ke स्तर ही दवा को ट्रिगर करते हैं, जिससे NBDHEX नामक एक शक्तिशाली कैंसर-रोधी कंपाउड रिलीज होता है. यह कंपाउड उन लक्षित प्रोटीनों को निकलने से रोक देता है जिसकी वजह से इन कैंसर कोशिकाओं को भोजन मिलता है और इस कारण वे जीवित रहती हैं. क्लीनिकल स्टडी में RK-251 ने आक्रामक ट्रिपल-नेगेटिव स्तन कैंसर कोशिकाओं के विरुद्ध मजबूत प्रभाव दिखाया है जिसमें हेल्दी कोशिकाओं पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं दिखा. यह अध्ययन जेब्राफिश पर किया गया था. इसमें किसी तरह की टॉक्सिसिटी का संकेत नहीं दिखा और रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़ की उपस्थिति में वांछित फ्लोरेसेंस प्रदर्शित हुआ. इससे यह संकेत मिलता है कि आगे के शोध और सत्यापन के लिए दवा सुरक्षित हो सकती है. इस तकनीक का रोगियों में परीक्षण किए जाने से पहले और अधिक अध्ययनों की आवश्यकता है. वैज्ञानिकों का यह अध्ययन जर्नल ऑफ मेडिसीन एंड केमिस्ट्री में प्रकाशित हुआ है.
About the AuthorLakshmi Narayan
मीडिया में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता के हर विधा में माहिर हैं. भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांपने की अद्भुत कला उनके अंदर समाहि…
और पढ़ेंLocation :
New Delhi,New Delhi,Delhi
First Published :
August 20, 2026, 18:08 IST



