तालाब में मटका हिलाते हैं भाई-बहन, फिर पिलाते हैं एक-दूसरे को पानी… जालौर की ये परंपरा क्यों है खास?

Last Updated:September 10, 2026, 14:53 IST
Jalor Samundar Hilorne Tradition Culture: राजस्थान के जालौर की लोकसंस्कृति में भाई-बहन के प्रेम और जल आस्था का प्रतीक ‘समुंदर हिलोरने’ की अनूठी परंपरा सावन से भाद्रपद मास तक निभाई जाती है. इसमें तालाब या नाड़ी को समुद्र मानकर भाई-बहन पानी में मटका हिलाते हैं. भाई बहन को पानी पिलाकर चुनरी ओढ़ाता है और उसकी खुशहाली की कामना करता है. नई विवाहित बहुओं के साथ भी उनके भाई यह रस्म निभाकर मायके और ससुराल के रिश्तों को मजबूत करते हैं.
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Jalor: राजस्थान के जालौर समेत कई क्षेत्रों की लोकसंस्कृति में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को सहेजने वाली कई अनूठी परंपराएं मौजूद हैं. इनमें से एक बेहद खास रस्म ‘समुंदर हिलोरने’ की है, जो भाई-बहन के स्नेह, एक-दूसरे की खुशहाली की कामना और जल के प्रति गहरी आस्था से जुड़ी हुई है. इस परंपरा के तहत गांव की नाड़ी या तालाब को समुद्र का प्रतीक मानकर भाई-बहन मिलकर विशेष रस्म निभाते हैं. अलग-अलग क्षेत्रों में इसे निभाने का समय भी भिन्न होता है, जहां कहीं इसकी शुरुआत सावन माह की हरियाली तीज से मानी जाती है, तो कहीं कृष्ण जन्माष्टमी, बछबारस और भाद्रपद पक्ष तक इसे धूमधाम से निभाया जाता है.
परंपरा के अनुसार इस रस्म को निभाने के लिए भाई अपनी बहन के साथ तालाब या नाड़ी के तट पर पहुंचता है. इस दौरान क्षेत्र की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर समूह के रूप में ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ मंगल गीत गाते हुए जल स्रोत तक पहुंचती हैं. इन पारंपरिक लोकगीतों में भाई-बहन के प्रेम, सावन के मौसम और पारिवारिक खुशहाली की सुंदर भावनाएं झलकती हैं. तालाब तक पहुंचने का यह पूरा सफर लोक संस्कृति के रंगों में रंगा होता है, जो उत्सव जैसा माहौल पैदा कर देता है.
तालाब में मटका हिलाने की मुख्य प्रक्रियाजल स्रोत पर पहुंचने के बाद ‘समुंदर हिलोरने’ की मुख्य रस्म शुरू होती है. पानी के अंदर मटका डालकर भाई और बहन दोनों मिलकर उसे हिलाते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में ‘समुंदर हिलोरना’ या ‘समुंदर हिलाना’ कहा जाता है. मरुस्थलीय और जल की कमी वाले क्षेत्रों में समुद्र से दूर बसे गांवों के तालाब या नाड़ी को समुद्र का प्रतीक मानने के पीछे पानी के प्रति अगाध महत्व और लोकविश्वास जुड़ा है. जल स्रोत को समुद्र का रूप देकर इस रस्म के माध्यम से पानी के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है.
स्नेह का आदान-प्रदान और नए रिश्तों की मजबूतीमटका पानी से भरने के बाद भाई अपनी बहन को अपने हाथों से जल पिलाता है, जिसके बाद बहन अपने भाई की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करती है. इसके जवाब में भाई अपनी बहन को चुनरी ओढ़ाता है और उसके सुखी जीवन का आशीर्वाद देता है. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान भाई-बहन के बीच का अपनापन और गहरा भावनात्मक जुड़ाव साफ नजर आता है. ग्रामीण भंवरलाल ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि इस परंपरा का एक अहम पहलू यह भी है कि इसे नई शादी होकर ससुराल आई बहुओं के साथ भी निभाया जाता है. बहू का भाई उसके ससुराल आकर इस रस्म को पूरा करता है, जो मायके के स्नेह को ससुराल की नई जिंदगी से जोड़ने का भाव दर्शाता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jalor,Jalor,Rajasthan
First Published :
September 10, 2026, 14:53 IST



