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Jaipur News | Rajasthan News | जयपुर का अनोखा मंदिर, जहां रानी के लिए बनी थी सीक्रेट गैलरी… आज भी लोग देखकर रह जाते हैं दंग!

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जयपुर का अनोखा मंदिर, रानी के लिए बनी थी सीक्रेट गैलरी; लोग देखकर रह जाते दंग!

Last Updated:June 30, 2026, 12:13 IST

Jaipur Ratan Bihari Temple: जयपुर के जोहरी बाजार स्थित श्री रतन बिहारी देवड़ी जी मंदिर हवेली शैली का 300 साल पुराना धरोहर, रानी रतन कंवर द्वारा निर्मित, आस्था और व्यापार दोनों का प्रमुख केंद्र. श्री रतन बिहारी मंदिर करीब 300 वर्ष पुराना है और इसकी वास्तुकला आज भी अपनी भव्यता के लिए पहचानी जाती है. जयपुर के अन्य प्राचीन मंदिरों की तरह यह मंदिर भी हवेली शैली में निर्मित है और बाहर से पूरी तरह एक हवेली जैसा दिखाई देता है.

जयपुर. जयपुर अपने ऐतिहासिक किलों और महलों के साथ-साथ वर्षों पुराने प्राचीन मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है. इन मंदिरों की खास मान्यताएं, परंपराएं, स्थापत्य कला और निर्माण से जुड़ा इतिहास लोगों को हमेशा आकर्षित करता है. खासतौर पर जयपुर का परकोटा क्षेत्र, जहां हर प्रमुख बाजार में सैकड़ों प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, आज भी अपने गौरवशाली इतिहास की अनूठी कहानी बयां करते हैं.

ऐसा ही एक मंदिर जोहरी बाजार में स्थित श्री रतन बिहारी मंदिर, जिसे देवड़ी जी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. इसका निर्माण 19वीं शताब्दी की शुरुआत में रानी रतन कंवर देवड़ी ने करवाया था. रानी रतन कंवर सिरोही के शासक शिव सिंह की पुत्री और सवाई जय सिंह तृतीय की पत्नी थीं. मंदिर का नाम भी उनके नाम पर रखा गया, इसलिए आज भी लोग इसे देवड़ी मंदिर के नाम से जानते हैं. मंदिर में ठाकुरजी और राधा रानी की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित हैं. साथ ही ठाकुरजी के विभिन्न स्वरूपों में शालिग्राम भी विराजमान हैं. मंदिर परिसर में भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर भी है, जिसे श्री रत्नेश्वर जी मंदिर के नाम से जाना जाता है. आज भी यहां पुजारियों की छठी पीढ़ी नियमित रूप से पूजा-अर्चना कर रही है.

हवेली शैली में बना 300 साल पुराना मंदिरश्री रतन बिहारी मंदिर करीब 300 वर्ष पुराना है और इसकी वास्तुकला आज भी अपनी भव्यता के लिए पहचानी जाती है. जयपुर के अन्य प्राचीन मंदिरों की तरह यह मंदिर भी हवेली शैली में निर्मित है और बाहर से पूरी तरह एक हवेली जैसा दिखाई देता है. मंदिर का आंगन एक श्रृंखलाबद्ध मार्ग से होकर धीरे-धीरे ऊंचाई की ओर बढ़ता है और अंत में ठाकुरजी के गर्भगृह तक पहुंचता है. इस हवेली शैली के मंदिर की सबसे खास विशेषता इसकी वह गैलरी है, जो दूसरे प्रवेश द्वार के ऊपर बनाई गई है और सीधे मुख्य गर्भगृह की ओर खुलती है. बताया जाता है कि इसी गैलरी से रानी रतन कंवर भगवान के दर्शन किया करती थीं. मंदिर की दीवारें, झरोखे और खिड़कियां रंगीन कांच तथा लघु चित्रों से सुसज्जित हैं. हालांकि समय के साथ इन प्राचीन चित्रों की चमक पहले जैसी नहीं रही, लेकिन उनकी कलात्मकता आज भी लोगों का ध्यान आकर्षित करती है. मंदिर के अलग-अलग प्रांगण, ऊपरी मंजिल और बारीक नक्काशी इसकी स्थापत्य कला को और भी विशेष बनाते हैं.

आज भी व्यापार और आस्था का प्रमुख केंद्रजयपुर के परकोटा क्षेत्र में स्थित कई प्राचीन मंदिर, हवेलियां और ऐतिहासिक भवन समय के साथ व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा बन चुके हैं. श्री रतन बिहारी मंदिर भी इसका एक उदाहरण है. मंदिर परिसर के आसपास और हवेली शैली में बने कई हिस्सों में आज रत्न और आभूषणों का व्यापार होता है, जिसके कारण यह क्षेत्र जोहरी बाजार का प्रमुख व्यापारिक केंद्र भी माना जाता है. आज भी स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटक श्री रतन बिहारी मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन करने और इसकी अनूठी हवेली शैली की वास्तुकला को देखने के लिए पहुंचते हैं. यही वजह है कि यह मंदिर आस्था, इतिहास और स्थापत्य कला का एक अनमोल संगम माना जाता है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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