Agriculture News: पारंपरिक खेती छोड़ पपीते की बागवानी अपनाई, अब भरतपुर के किसान कमा रहे लाखों का मुनाफा

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वैर की नई पहचान बनी पपीते की खेती! कम लागत में ज्यादा कमाई का बन रहा सफल मॉडल
Last Updated:June 30, 2026, 15:39 IST
Bharatpur Agriculture News: भरतपुर जिले के वैर क्षेत्र में पपीते की बागवानी किसानों के लिए आय का नया और लाभदायक माध्यम बनकर उभर रही है. क्षेत्र की अनुकूल जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से किसान बेहतर गुणवत्ता के पपीते का उत्पादन कर रहे हैं. ड्रिप सिंचाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती की विधियों ने उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत को भी नियंत्रित किया है. इसके परिणामस्वरूप किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक मुनाफा मिल रहा है. स्थानीय बाजारों के साथ-साथ अन्य शहरों में भी यहां के पपीते की मांग लगातार बढ़ रही है. कृषि विशेषज्ञ भी किसानों को बागवानी आधारित खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं.
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भरतपुर: भरतपुर जिले के वेर क्षेत्र में किसानों के लिए पपीते की बागवानी आय का नया मजबूत स्रोत बनकर उभर रही है. क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु पहले से ही बागवानी के लिए प्रसिद्ध रही है. जिसका लाभ अब किसान नई फसलों को अपनाकर उठा रहे हैं. बदलते समय के साथ किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक और लाभकारी विकल्पों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं.
उद्यान विभाग के अधिकारी जनक राज मीणा ने लोकल 18 से बातचीत में जानकारी देते हुए बताया कि हाल के वर्षों में वेर, भुसावर और बयाना क्षेत्रों में पपीते की खेती का चलन तेजी से बढ़ा है. किसान अब वैज्ञानिक तरीके से पपीते की बागवानी कर रहे हैं. जिससे उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है. आधुनिक तकनीकों और उन्नत किस्मों के उपयोग से किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ मिल रहा है.
सुरक्षित और लाभकारी विकल्प मान रहेवेर क्षेत्र में पहले से ही विभिन्न प्रकार की बागवानी की जाती रही है.लेकिन पपीते की खेती ने खास तौर पर किसानों का ध्यान आकर्षित किया है. इसका मुख्य कारण इसकी जल्दी तैयार होने वाली फसल और बाजार में अच्छी मांग है.कम समय में बेहतर मुनाफा मिलने के कारण किसान इसे एक सुरक्षित और लाभकारी विकल्प मान रहे हैं. किसानों का कहना है.कि पपीते की खेती में लागत के मुकाबले मुनाफा अधिक है.
जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही हैसाथ ही सरकार और उद्यान विभाग की ओर से मिलने वाले प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन से भी उन्हें काफी मदद मिल रही है. इससे खेती के प्रति उनका विश्वास और बढ़ा है. उद्यान अधिकारीयो के अनुसार यदि इसी तरह आधुनिक तकनीकों का उपयोग जारी रहा तो आने वाले समय में वेर क्षेत्र पपीते की खेती का प्रमुख केंद्र बन सकता है.
किसानों की आय में वृद्धि होगीइससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी बल्कि क्षेत्र की पहचान भी बागवानी के क्षेत्र में और मजबूत होगी पपीते की बागवानी ने वेर भुसावर और बयाना क्षेत्र के किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं. यह खेती न सिर्फ आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो रही है. बल्कि कृषि क्षेत्र में नवाचार का भी एक अच्छा उदाहरण बन रही है.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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Bharatpur,Rajasthan



