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जालोर की कुल्थी दाल ढोकली बनाने की रेसिपी I jalore newsI rajasthan news I

Last Updated:June 24, 2026, 18:32 IST

Recipe Of Kulthi Dal Dhokli: जालोर की कुल्थी दाल ढोकली एक पारंपरिक और देसी स्वाद से भरपूर रेसिपी है, जो खासकर बारिश के मौसम में बेहद लोकप्रिय होती है. इसे कुल्थी (करत) दाल और मसालेदार ढोकलियों के मेल से तैयार किया जाता है, जिसमें घर के साधारण मसाले जैसे हल्दी, धनिया, जीरा, लहसुन और हरी मिर्च का इस्तेमाल होता है. यह डिश न सिर्फ स्वादिष्ट होती है बल्कि हल्की और पौष्टिक भी होती है, जिससे यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी की पसंद बन जाती है.

जालोर.  आपने राजस्थानी मूंग दाल की ढोकली, तुअर दाल की ढोकली और ग्वारफली की ढोकली तो खूब खाई होगी, लेकिन आज हम आपके लिए लेकर आए हैं जालोर की खास देसी रेसिपी, कुल्थी दाल की ढोकली, जिसे स्थानीय भाषा में कुल्थ या करत दाल भी कहा जाता है. जालोर की रसोई में बनने वाली ये डिश स्वाद और सादगी का बेहतरीन मेल है. वैसे तो इसे कभी भी खाया जा सकता है, लेकिन खासकर बारिश के मौसम में जब हल्का, गर्म और पेट भरने वाला खाना चाहिए होता है, तब कुल्थी ढोकली का स्वाद दोगुना हो जाता है. ये डिश ना सिर्फ स्वादिष्ट होती है, बल्कि घर की आम सामग्री से आसानी से बन जाती है.गृहिणी संतोष देवी ने लोकल 18 को जानकारी दी कि हमारे यहां जालोर में ये कुल्थी की ढोकली पुराने समय से बनती आ रही है. बारिश में तो खास बनाते हैं. इसमें ज्यादा कुछ नहीं लगता, घर के ही मसालों से बन जाती है. खाने में हल्की होती है और पेट भी भर देती है, बच्चे और बड़े सभी इसे पसंद करते हैं. इसकी रेसिपी भी बेहद आसान है.

आसान है इसकी रेसिपी

इसे बनाने के लिए सबसे पहले लहसुन और हरी मिर्च को कूटकर तैयार किया जाता है. इसके बाद ढोकली के लिए आटा लगाया जाता है, जिसमें धनिया पाउडर, हल्दी, नमक, जीरा, कटा हुआ धनिया, मिर्ची और कूटा हुआ लहसुन-मिर्च मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए नरम आटा गूंथा जाता है. फिर इस आटे से छोटी-छोटी ढोकलियां बनाई जाती हैं. दूसरी ओर कुकर में पानी गर्म किया जाता है. पानी में उबाल आने से पहले ही ये ढोकलियां डाल दी जाती हैं. इसके बाद धुली हुई कुल्थी दाल को नमक और थोड़ा सा सोडा डालकर कुकर में मिलाया जाता है.

जब मिश्रण उबलने लगता है, तब इसमें घर के मसाले हल्दी, मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक डाला जाता है. इसके बाद इसे करीब 40 से 45 मिनट तक अच्छे से पकाया जाता है, ताकि दाल और ढोकली दोनों अच्छी तरह गल जाएं और एक गाढ़ा, स्वादिष्ट मिश्रण तैयार हो जाए. पकने के बाद इसे घी के साथ गरम-गरम परोसा जाता है, जो इसके स्वाद को और बढ़ा देता है. आज के समय में जब लोग भारी और बाहर का खाना छोड़कर देसी और घर का बना खाना पसंद कर रहे हैं, तब कुल्थी दाल की ढोकली जैसी पारंपरिक डिश फिर से लोगों की पसंद बनती जा रही है.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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