Jodhpur RIFF 2026: धधकते अंगारों पर नृत्य, मुंह में जलती आग, 550 साल पुरानी परंपरा देख पर्यटकों के उड़े होश

Last Updated:October 25, 2026, 12:29 IST
Jodhpur RIFF 2026 Fire Dance 2026: जोधपुर के राजस्थान इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल 2026 में आग, आस्था और लोक परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला. धना भैया की छतरी पर जसनाथी सिद्धों ने जलते अंगारों के बीच अग्नि नृत्य प्रस्तुत किया. कलाकारों को आग के बीच नृत्य करते और अंगारे मुंह में रखते देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे. जसनाथी समुदाय के अनुसार, यह परंपरा करीब साढ़े पांच सौ वर्ष पुरानी है और इसका संबंध गुरु जसनाथ जी महाराज से है. समुदाय की मौखिक मान्यताओं में मुगल शासक औरंगजेब के दौर में दिल्ली में अग्नि नृत्य के प्रदर्शन का भी उल्लेख मिलता है. भगत इस कला को गुरु की कृपा, मंत्र साधना और धार्मिक विश्वास से जोड़ते हैं. हालांकि, जलते अंगारों के बीच प्रदर्शन अत्यंत जोखिमपूर्ण होता है. रिफ के मंच पर इस प्रस्तुति ने राजस्थान की लोक संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं की झलक दिखाई.
जोधपुर. राजस्थान इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल (रिफ) 2026 में लोक संस्कृति, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. जोधपुर में धना भैया की छतरी पर जसनाथी सिद्धों के पारंपरिक अग्नि नृत्य ने देशी-विदेशी मेहमानों को रोमांचित कर दिया. धधकते अंगारों के बीच भगतों की अनूठी प्रस्तुति और गुरु जसनाथ जी महाराज के प्रति अटूट आस्था ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. करीब 550 साल पुरानी परंपरा से जुड़े इस अग्नि नृत्य को जसनाथ जी महाराज की देन माना जाता है. फेस्टिवल डायरेक्टर दिव्य भाटिया के नेतृत्व में आयोजित रिफ में देश-विदेश के कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं, पूर्व महाराजा गज सिंह और पूर्व महारानी हेमलता राजे की विभिन्न कार्यक्रमों में सहभागिता ने महोत्सव की गरिमा बढ़ाई है.
अग्नि नृत्य के दौरान कलाकार धधकते अंगारों के बीच प्रवेश करते हैं और जलते अंगारों को मुंह में रखकर भी अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं. आग की लपटों के बीच उनकी हैरतंगेज करतब देखकर दर्शक हैरान रह गए. भगतों का कहना है कि यह सब गुरु जसनाथ जी महाराज की कृपा और साधना का परिणाम है. उनके अनुसार, अग्नि नृत्य के दौरान मंत्रों का उच्चारण और आध्यात्मिक साधना विशेष महत्व रखती है. कलाकारों की मान्यता है कि इस अवस्था में अग्नि की तपिश का अनुभव सामान्य से अलग होता है. हालांकि, यह उनकी धार्मिक आस्था और परंपरागत विश्वास का हिस्सा है, जबकि अग्नि के बीच प्रदर्शन करना अत्यंत जोखिमपूर्ण होता है.
औरंगजेब के दौर से जुड़ी परंपरा की है ऐतिहासिक मान्यता
जसनाथी सिद्धों ने अग्नि नृत्य की परंपरा का संबंध मुगल शासक औरंगजेब के दौर से भी जोड़ा. भक्तों के अनुसार उस समय रुस्तम जी महाराज सहित जसनाथी संतों ने दिल्ली में अग्नि नृत्य का प्रदर्शन किया था. लोक मान्यता के मुताबिक, जब सनातन धर्म और संत परंपरा के सामने चुनौतियां थी, तब इस प्रदर्शन के जरिए संतों ने अपनी साधना और विश्वास का परिचय दिया. बताया जाता है कि उस समय जसनाथी समुदाय के 11 लोगों को ताम्रपत्र दिए गए थे, जिनके माध्यम से उन्हें विभिन्न स्थानों पर आने-जाने और अग्नि नृत्य करने की अनुमति मिलने की बात कही जाती है. इस प्रसंग को जसनाथी समाज की मौखिक परंपरा और धार्मिक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
भगवा ध्वज और गुरु परंपरा के सम्मान का दिया संदेश
अग्नि नृत्य करने वाले भगतों ने अपनी प्रस्तुति के दौरान गुरु परंपरा, भगवा ध्वज और सनातन संस्कृति के सम्मान का संदेश भी दिया. उन्होंने संतों की वाणी का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवा केवल वस्त्र नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या और आस्था का प्रतीक है. जसनाथी सिद्धों के लिए अग्नि नृत्य केवल एक लोक कला नहीं, बल्कि गुरु के प्रति समर्पण और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को जीवित रखने का माध्यम है. यही वजह है कि इस प्रस्तुति में कलाकारों की शारीरिक क्षमता के साथ उनकी धार्मिक भावनाएं और सांस्कृतिक विरासत भी प्रमुखता से सामने आई.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Jodhpur,Rajasthan
First Published :
October 25, 2026, 12:29 IST



