Keoladeo National Park Water Crisis Bharatpur

Last Updated:August 05, 2026, 10:22 IST
Keoladeo National Park Water Crisis: भरतपुर का केवलादेव नेशनल पार्क इन दिनों भारी जल संकट का सामना कर रहा है. पांचना बांध से पानी न मिलने के कारण पार्क के जलाशय सूख गए हैं, जिससे मछलियां और कछुए तड़पने को मजबूर हैं. पानी की कमी से इस बार प्रवासी पक्षियों के आगमन पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है. प्रशासन द्वारा लाया जा रहा चंबल का पानी पार्क के इकोसिस्टम के लिए उपयुक्त नहीं है. डीएफओ चेतन कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते पानी का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो इस विश्व धरोहर की जैव विविधता खतरे में पड़ जाएगी.
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भरतपुर: भरतपुर का विश्व प्रसिद्ध केवलादेव नेशनल पार्क इन दिनों गंभीर जल संकट से जूझ रहा है. कभी हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट और पानी से लबालब भरे तालाबों के लिए पहचाना जाने वाला यह घना अभयारण्य अब सूखे जैसे हालातों का सामना कर रहा है. पानी की कमी का असर न सिर्फ पार्क की हरियाली पर दिख रहा है, बल्कि यहां के जलीय जीवों और पक्षियों के जीवन पर भी सीधा खतरा मंडरा रहा है. पार्क में जल स्तर लगातार घटने से कई मुख्य जलाशय और तालाब पूरी तरह सूखने की कगार पर पहुंच चुके हैं.
पानी घटने से पार्क के प्राकृतिक जलाशयों का दायरा बेहद सिकुड़ गया है. स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि पानी के अभाव में मछलियां और कछुए तड़पते हुए नजर आ रहे हैं. जलीय स्रोतों के सूखने से इन जीवों के लिए भोजन और सुरक्षित आवास दोनों का ही गंभीर संकट खड़ा हो गया है. खाद्य श्रृंखला प्रभावित होने के कारण पार्क के पूरे पारिस्थितिकी संतुलन (Ecological Balance) पर इसका बुरा असर साफ दिखाई देने लगा है.
पांचना बांध से पानी न मिलना बना संकट की मुख्य वजहआमतौर पर हर साल केवलादेव नेशनल पार्क को करौली जिले में स्थित पांचना बांध से पानी की आपूर्ति की जाती है. इसी पानी से पार्क के सभी छोटे-बड़े जलाशय भरे रहते थे और साइबेरियन क्रेन सहित दर्जनों प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार होता था. हालांकि, इस बार पांचना बांध से समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिल पाने के कारण पार्क में जल संकट गहरा गया है. पानी की किल्लत की वजह से कई प्रवासी पक्षियों ने इस बार घना में आना कम कर दिया है या अन्य सुरक्षित ठिकानों का रुख कर लिया है.
चंबल का पानी नहीं है उपयुक्त, स्थायी समाधान की मांगलोकल 18 से बातचीत में घना के डीएफओ चेतन कुमार ने बताया कि हर साल पांचना बांध से नियमित पानी प्राप्त होता था, लेकिन इस बार आपूर्ति नहीं हो सकी है. फिलहाल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर चंबल का पानी लाया जा रहा है, लेकिन चंबल का यह पानी पार्क के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं माना जाता है. उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा उच्च अधिकारियों और संबंधित मंत्रालय को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया गया है. यदि जल्द ही पानी का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो इस यूनेस्को विश्व धरोहर की जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan
First Published :
August 05, 2026, 10:22 IST



