Success Story: घर संभालते हुए अपूर्वा ने खड़ा किया लड्डू गोपाल का कारोबार, 3 लोगों को दे रहीं रोजगार, देशभर में डिमांड

अलवर: राजस्थान के अलवर जिले की महिलाएं घर की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ अपनी हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भर बन रही हैं. शहर की रहने वाली अपूर्वा भी इसका एक बेहतरीन उदाहरण हैं. अपूर्वा घर पर रहकर लड्डू गोपाल की आकर्षक एसेसरीज तैयार कर रही हैं. उनके हाथों से तैयार किए गए सिंघासन, पलंग और सजावट से जुड़े अन्य सामान अब अलवर ही नहीं, बल्कि दिल्ली, जयपुर, बेंगलुरु, अहमदाबाद, गुजरात और मुरादाबाद सहित कई बड़े शहरों तक पहुंच रहे हैं. खास बात यह है कि जन्माष्टमी का पर्व नजदीक आने के साथ ही इन एसेसरीज की मांग भी लगातार बढ़ रही है.
अपूर्वा ने बताया कि उनके घर में बचपन से ही लड्डू गोपाल की पूजा होती रही है. त्योहारों के दौरान परिवार की ओर से लड्डू गोपाल के लिए अलग-अलग तरह के सिंघासन और सजावट तैयार की जाती थी. शादी के बाद जब वह ससुराल पहुंचीं तो वहां भी लड्डू गोपाल की पूजा और त्योहारों पर उनकी विशेष सजावट की परंपरा देखने को मिली. इसी से उनके मन में भी लड्डू गोपाल के लिए आकर्षक एसेसरीज तैयार करने का विचार आया.
ग्राहकों की पसंद और मांग के अनुसार बनाती हैं एसेसरीज
अपूर्वा ने बताया कि धीरे-धीरे इस काम की शुरुआत की. उन्होंने लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़ों और फर्नीचर में बचने वाले वेस्ट मटेरियल का इस्तेमाल कर अलग-अलग डिजाइन और ढांचे तैयार किए. इन ढांचों पर फोम लगाकर कपड़ा चढ़ाया जाता है और फिर उन्हें आकर्षक रूप दिया जाता है. इसी तरह लड्डू गोपाल के लिए अलग-अलग डिजाइन के सिंघासन, पलंग और अन्य एसेसरीज तैयार की जाती हैं. शुरुआत में उन्होंने अपने स्तर पर कुछ डिजाइन तैयार किए और उन्हें बाजार तथा सोशल मीडिया पर साझा किया. लोगों ने उनके काम को काफी पसंद किया और लगातार नए डिजाइन तैयार करने के सुझाव दिए. इसके बाद उन्होंने ग्राहकों की पसंद और मांग के अनुसार अलग-अलग तरह की एसेसरीज बनानी शुरू कर दीं.
अपूर्वा को परिवार का मिल रहा है पूरा सहयोग
अपूर्वा की मेहनत को देखते हुए उनके परिवार के लोग भी पूरा सहयोग कर रहे हैं. उनके ससुर फर्नीचर का बेस तैयार कर देते हैं. परिवार के सहयोग से अपूर्वा ने इस काम को आगे बढ़ाया और अब वह खुद के साथ करीब तीन अन्य लोगों को भी रोजगार दे रही हैं. अपूर्वा ने बताया कि गृहणी होने के बावजूद वह अपने परिवार को पूरा समय देती हैं. सुबह घर का काम निपटाने के बाद करीब 11 बजे से शाम 5 बजे तक लड्डू गोपाल की एसेसरीज तैयार करने का काम करती हैं. इसके बाद वह दोबारा घर-परिवार की जिम्मेदारियों में जुट जाती हैं. उनका कहना है कि परिवार के सहयोग के कारण वह घर और काम दोनों को आसानी से संभाल पा रही हैं.
अपूर्वा ने अलवर में ही लगाई थी अपनी पहली प्रदर्शनी
अपूर्वा की ननद ने बताया कि पहले हर त्योहार पर लड्डू गोपाल के लिए सिंघासन और अन्य सामान बाजार से खरीदकर लाना पड़ता था. अलवर में इस तरह की एसेसरीज आसानी से उपलब्ध नहीं होती थी. लेकिन अपूर्वा के घर आने के बाद उन्होंने मंदिर और लड्डू गोपाल की सजावट को नए तरीके से तैयार करना शुरू किया. इससे अब लोगों को स्थानीय स्तर पर ही आकर्षक एसेसरीज उपलब्ध होने लगी है. अपूर्वा ने अपनी पहली प्रदर्शनी अलवर में लगाई थी. इसके बाद उनके बनाए उत्पादों की जानकारी सोशल मीडिया और बाजार के माध्यम से दूसरे शहरों तक पहुंची.
अब जयपुर, बेंगलुरु, अहमदाबाद, मुरादाबाद और दिल्ली सहित कई शहरों से लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं। जन्माष्टमी को देखते हुए मांग और बढ़ गई है. अपूर्वा की कहानी यह बताती है कि यदि हुनर, मेहनत और परिवार का सहयोग मिले तो घर की चारदीवारी के भीतर शुरू किया गया छोटा सा काम भी बड़े कारोबार का रूप ले सकता है. आज वह खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अन्य लोगों को भी रोजगार दे रही हैं और अलवर की कला व हुनर को दूसरे राज्यों तक पहुंचा रही हैं.



