Khatushaym Ji: बाबा श्याम के दरबार पहुंचा 3131 फीट लंबा अनोखा निशान, 2000 भक्तों ने लिया यात्रा में हिस्सा

सीकर. विश्व प्रसिद्ध बाबा श्याम के दरबार में भक्त 3131 फीट लंबा अनोखा निशान लेकर पहुंचे है. 14 अगस्त को सैकड़ों श्याम भक्त एक साथ भिवाड़ी से यह निशान लेकर रवाना हुए थे, जो 18 अगस्त की रात खाटूश्याम जी मंदिर में पहुंचे. इस यात्रा में महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया. निशान लेकर आए श्याम भक्तों ने बताया कि यात्रा का पुष्प वर्षा कर जगह जगह स्वागत किया गया. कई स्थानों पर ऐसा माहौल बना, मानो फाल्गुन मेले की झलक सामने आ गई हो.
इस यात्रा की सबसे खास बात 3131 फीट लंबा निशान रहा, इस निशान ने सैकड़ों किलोमीटर रास्ते में लोगों का ध्यान खींचा. यात्रा आयोजकों के अनुसार, करीब 380 निशानों के साथ जोड़कर यह 3131 फीट लंबा निशान बनाया गया था. इस यात्रा में भिवाड़ी के 84 क्षेत्र सहित कई जगहों के करीब 2000 श्याम प्रेमी शामिल हुए हैं. इसके अलावा सैकड़ों वाहन और करीब 10 डीजे भी यात्रा के साथ चलते रहे.
निशान बनाने में एक महीने से भी अधिक का समय लगा
आयोजकों के अनुसार, बाबा श्याम के इस अनोखे निशान को तैयार करने में करीब एक महीने से भी अधिक का समय लगा. नीले, केसरिया और पीले सहित कई रंगों के साथ धार्मिक चिन्ह और बाबा का नाम अंकित यह निशान भक्ति के प्रतीक के रूप में तैयार किया गया. इसमें बीच बीच में 380 बास भी लगाई गई ताकि भक्त इसे पकड़ कर ले जा सके. आयोजकों के अनुसार, बाबा श्याम की इस अनोखी निशान यात्रा में 10 साल के छोटे बच्चों से लेकर 70 साल तक के बुजुर्ग भी शामिल हुए.
किसी ने पैदल तो किसी ने कठिन साधना से जताई आस्था
बाबा श्याम की भक्ति में श्रद्धालु अलग-अलग तरीके अपनाते नजर आए. कोई सामान्य पदयात्रा कर रहा था तो कोई कठिन साधना के जरिए अपने आराध्य को रिझाने में जुटा था. कुछ भक्त पेट के बल आगे बढ़ते दिखाई दिए तो कुछ नुकीली कीलों पर चलकर अपनी श्रद्धा प्रकट कर रहे थे. पांच दिनों तक रास्तों को श्याम भक्ति से सराबोर करने के बाद यात्रा आखिरकार खाटूश्यामजी पहुंच गई. लंबा निशान लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के दरबार में निशान अर्पित कर सुख-शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की.
जानिए क्या है श्याम निशान
श्याम निशान एक तरह का झंडा होता है इस पर बाबा का प्रतीक चिन्ह या फोटो बनी होती है. भक्त जब मन्नत मांगने खाटूश्याम जी मंदिर जाते हैं, तो वे बाबा श्याम के दरबार में माथा टेक मन्नत मांगते हैं. इस दौरान मन्नत पूरी होने पर निशान चढ़ाने वापस आने की भी प्रार्थना करते हैं. इसके अलावा बहुत से भक्त मन्नत मांगने के लिए खाटूश्याम जी मंदिर में जाते समय भी अपने साथ निशान लेकर जाते हैं. खाटूश्याम जी मुख्य मंदिर में निशान चढ़ाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है. श्याम भक्तों के लिए यह निशान बेहद पवित्र माना जाता है. श्याम बाबा के ध्वज का रंग केसरिया, नारंगी और लाल सहित कई रंग का होता है, निशान पर भगवान कृष्ण और बाबा श्याम के चित्र और मंत्र अंकित होते हैं.
कौन है बाबा श्याम
बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है. महाभारत युद्ध के दौरान भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की ओर से युद्ध में उतरने जा रहे थे, तभी भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण वेश में उनसे शीश दान मांगा. बर्बरीक ने बिना झिझक भगवान कृष्ण को अपना शीश दान कर दिया. इससे प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में उन्हें श्याम नाम से पूजा जाएगा और वे हारे हुए लोगों के सहारा बनेंगे. तभी से बाबा श्याम भक्तों के बीच हारे के सहारे के नाम से पूजे जाते हैं.



