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Khatushyamji | ये है दक्षिण का खाटू धाम; वर्षों से भक्तों की मुरादें पूरी कर रहे हैं बाबा श्याम, जानें क्यों है खास

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दक्षिण का खाटू धाम; वर्षों से भक्तों की मुरादें पूरी कर रहे हैं बाबा श्याम!

Last Updated:April 22, 2026, 15:29 IST

Khatu Dham of South India: राजस्थान के खाटूश्यामजी के बारे में हम सभी जानते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक मंदिर भारत के दक्षिण में भी स्थित है. यहां भी मन की मुरादें पूरी होती हैं. हैदराबाद काचीगुड़ा का श्री श्याम मंदिर श्री कांची कामकोटि पीठम् के तहत 30 साल पूरे कर चुका है. दक्षिण भारत के खाटू धाम के रूप में प्रवासी राजस्थानियों की आस्था का बड़ा केंद्र है. आइये जानते हैं इसके बारे में.

हैदराबाद. राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम जी का धाम विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है. लेकिन जब बात दक्षिण भारत में बसे राजस्थानी समाज की आती है, तो उनके लिए हैदराबाद के काचीगुड़ा स्थित श्री श्याम मंदिर किसी वरदान से कम नहीं है. श्री कांची कामकोटि पीठम् के अंतर्गत संचालित यह मंदिर अपनी स्थापना के 30 गौरवमयी वर्ष पूरे कर चुका है. आज यह स्थान दक्षिण के खाटू धाम के रूप में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है.

काचीगुड़ा के व्यस्त इलाके में स्थित यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह दक्षिण भारत में रह रहे प्रवासी राजस्थानियों की संस्कृति और विश्वास का जीवंत प्रतीक भी है. मंदिर के कपाट खुलते ही जय श्री श्याम के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है. तीन दशकों की इस यात्रा में मंदिर ने न केवल भक्तों की संख्या में वृद्धि देखी है, बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास भी और अधिक गहरा हुआ है.

दक्षिण में खाटू जैसी अनुभूतिश्रद्धालुओं का मानना है कि इस मंदिर में दर्शन करने पर उन्हें राजस्थान के मूल खाटू धाम जैसी ही शांति और अलौकिक अनुभूति होती है. मंदिर में बाबा श्याम का श्रृंगार और उनकी जीवंत प्रतिमा भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है. फाल्गुन और अन्य प्रमुख त्योहारों पर यहां खाटू की तर्ज पर ही विशेष आयोजन किए जाते हैं, जिनमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं. यहां का श्याम कीर्तन और छप्पन भोग का आयोजन दक्षिण भारत में एक बड़े उत्सव का रूप ले चुका है.

संस्कृति और आस्था का संगमयह मंदिर केवल पूजा-अर्चना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकजुटता का भी बड़ा माध्यम बन गया है. यहां राजस्थानी समाज के लोग अपने संस्कारों को संजोने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए एकत्रित होते हैं. बीते 30 वर्षों में इस मंदिर ने कई ऐसे भक्तों को सहारा दिया है, जो राजस्थान से दूर रहकर भी अपने आराध्य के साए में सुकून महसूस करते हैं.

भक्तों को मिलता है सुकूनमंदिर के पुजारी और सेवादारों का कहना है कि बाबा श्याम की महिमा अपरंपार है. यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता. मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि वे यहां अपनी परेशानियां लेकर आते हैं और बाबा के दरबार में माथा टेकते ही उन्हें मानसिक शांति मिलती है. हारे का सहारा कहे जाने वाले बाबा श्याम की कृपा से ही यह मंदिर आज दक्षिण भारत की भक्ति परंपरा का एक अहम हिस्सा बन चुका है.

About the AuthorAnand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

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Location :

Hyderabad,Hyderabad,Telangana

First Published :

April 22, 2026, 15:29 IST

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