Kim Jong Un Threat South Korea: ईरान-अमेरिका छोड़ो उधर साउथ कोरिया से भिड़ने वाले हैं किम जोंन उन, न्यूक्लियर वाला है बवाल

दुनिया का ध्यान इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे बवाल पर टिका है, लेकिन एशिया के दूसरे कोने में एक बड़ा परमाणु संकट सिर उठा रहा है. उत्तर और दक्षिण कोरिया वाले इस पूरे इलाके में माहौल अब बेहद तनावपूर्ण हो चुका है. दक्षिण कोरिया ने जैसे ही ऐलान किया कि वो परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां बनाने की तैयारी में है, उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन का पारा चढ़ गया. उत्तर कोरिया ने इसे सीधे-सीधे युद्ध भड़काने की साजिश बताया है. उनका कहना है कि ये दक्षिण कोरिया की खुद को परमाणु हथियारों से लैस करने की एक सोची-समझी चाल है.
किम जोंग उन का चढ़ा पारा
उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय ने सरेआम चेतावनी दे डाली है कि वो इसका जवाब ऐसी विनाशकारी मिलिट्री ताकत से देंगे जिसके सामने टिकना किसी के लिए मुमकिन नहीं होगा. ये बयान साफ इशारा कर रहा है कि आने वाले दिनों में एशिया महाद्वीप में एक नया और बेहद खौफनाक न्यूक्लियर बवाल मचने वाला है.
दक्षिण कोरिया ने हाल ही में अपने नौसैन्य बेड़े को मजबूत करने के लिए परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों के निर्माण की एक बड़े प्रोजेक्ट का खुलासा किया था. इस ऐलान का टारगेट समुद्र में अपनी सुरक्षा को अभेद्य बनाना और उत्तर कोरिया के बढ़ते मिसाइल खतरे से निपटना है.
जैसे ही ये खबर प्योंगयांग पहुंची, उत्तर कोरियाई प्रशासन तिलमिला उठा. प्योंगयांग की ओर से इस मुद्दे पर पहला बयान सामने आया है. उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय के प्रथम उपमंत्री जांग कुम-चोल ने एक कड़ा बयान जारी कर सोल के इस कदम की धज्जियां उड़ा दीं. उन्होंने कहा कि रक्षा के नाम पर परमाणु पनडुब्बियां बनाने की ये योजना वास्तव में पूर्ण परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में उठाया गया गुप्त कदम है.
‘अमेरिका के साथ मिलकर माहौल बिगाड़ रहा है सोल’
जांग कुम-चोल ने सीधे तौर पर वाशिंगटन और सोल के बीच बढ़ रही सैन्य जुगलबंदी पर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका का ये मिलीभगत कोरियन प्रायद्वीप की शांति और स्थिरता के लिए सीधा खतरा है.
उत्तर कोरिया का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के बहाने दक्षिण कोरिया अपने परमाणु ईंधन को रिसाइकल करने और यूरेनियम साफ करने पर लगी पाबंदियां हटाना चाहता है. सीधे शब्दों में कहें तो प्योंगयांग का दावा है कि दक्षिण कोरिया चुपके से परमाणु बम बनाने की काबिलियत और उसका सामान जुटाने में लगा है. उसका कहना है कि इससे उनके समुद्री इलाके और देश की सुरक्षा को सीधा खतरा पैदा हो गया है.
‘मिलेगा ऐसा करारा जवाब जो बर्दाश्त नहीं होगा’
उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी ‘केसीएनए’ (KCNA) के इस बयान से साफ पता चलता है कि प्योंगयांग आगे की क्या प्लानिंग कर रहा है. उत्तर कोरिया का दावा है कि वो अपने डिफेंस सिस्टम और हथियारों को इतना मजबूत बना रहा है कि आज के और आने वाले समय के किसी भी खतरे को एक झटके में खत्म किया जा सके.
बयान में सीधे-सीधे धमकी देते हुए कहा गया कि जंग को रोकने और अपनी आजादी व सुरक्षा के लिए उत्तर कोरिया के पास ‘बेजोड़ फौजी ताकत’ बढ़ाने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है. वहीं, जानकारों का मानना है कि उत्तर कोरिया इस बयान की आड़ में अपने नए परमाणु मिसाइल टेस्ट और हाई-टेक पनडुब्बी प्रोजेक्ट्स को सही ठहराने का बहाना बना रहा है.
दक्षिण कोरिया की सफाई
दूसरी तरफ, दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के सारे आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है. दक्षिण कोरियाई अफसरों ने साफ कहा कि उनकी ये प्रोजेक्ट इलाके के सुरक्षा माहौल को देखते हुए बनाई गई है और यह सिर्फ अपने बचाव के लिए उठाया गया कदम है.
दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पार्क डू-सून ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ये पनडुब्बियां सिर्फ न्यूक्लियर पावर से चलेंगी, लेकिन इनमें सामान्य हथियार और मिसाइलें ही लगेंगी. उन्होंने साफ किया कि दक्षिण कोरिया का परमाणु बम बनाने का कोई इरादा नहीं है और यह पूरा प्रोजेक्ट परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के सारे अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक है. उन्होंने ये भी भरोसा दिया कि इस पूरे काम में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता रखी जाएगी.
उत्तर कोरिया, रूस और चीन की तिकड़ी का बदलता समीकरण
दक्षिण कोरियाई एकीकरण मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया का ये आक्रामक रवैया सिर्फ दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं है. प्योंगयांग की इस तीखी प्रतिक्रिया में रूस और चीन का बैकअप भी साफ झलक रहा है.
हाल के महीनों में उत्तर कोरिया, रूस और चीन के बीच सैन्य और रणनीतिक नजदीकियां काफी बढ़ी हैं. प्योंगयांग का ये बयान रूस और चीन के उस साझा दृष्टिकोण से मेल खाता है, जिसमें वे एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी गठबंधन (अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान) के बढ़ते प्रभाव का विरोध करते आए हैं. उत्तर कोरिया अब जापान की नई रक्षा नीतियों और अमेरिका-जापान-दक्षिण कोरिया की त्रिकोणीय सुरक्षा व्यवस्था को अपने लिए सबसे बड़ा सुरक्षा संकट मान रहा है.
किम जोंग उन का अपना न्यूक्लियर सबमरीन प्रोजेक्ट
उत्तर कोरिया का ये कड़ा रुख सिर्फ दक्षिण कोरिया तक ही सीमित नहीं है. प्योंगयांग के इस तीखे बयान के पीछे रूस और चीन का पूरा सहारा साफ नजर आ रहा है.
पिछले कुछ महीनों में उत्तर कोरिया, रूस और चीन के बीच फौजी और रणनीतिक रिश्ते बहुत मजबूत हुए हैं. उत्तर कोरिया का यह बयान रूस और चीन की सोच से बिल्कुल मेल खाता है, जो एशिया-प्रशांत इलाके में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बढ़ते दबदबे का लगातार विरोध कर रहे हैं. उत्तर कोरिया अब जापान की नई सुरक्षा नीतियों और अमेरिका-जापान-दक्षिण कोरिया के इस तीन-तरफा गुट को अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मान रहा है.



