Rajasthan

Eco Friendly Furniture Bharatpur | भरतपुर का घास-फूस फर्नीचर

Last Updated:August 15, 2026, 09:05 IST

Eco Friendly Furniture Bharatpur: भरतपुर के बीरमपुरा में प्राकृतिक घास-फूस और खरपतवार से इको-फ्रेंडली फर्नीचर तैयार किया जा रहा है. कारीगर हाथ से मेज, कुर्सियाँ, मूढ़ा और शू-स्टैंड बना रहे हैं. यह टिकाऊ फर्नीचर बंगलों, फार्म हाउस, रिसॉर्ट्स और होटलों में खूब पसंद किया जा रहा है. मशीनों के बिना पारंपरिक विधि से निर्मित इस फर्नीचर से स्थानीय कारीगरों को रोजगार और आत्मनिर्भरता मिल रही है. बदलते दौर में इस नेचर-फ्रेंडली और पारंपरिक लुक वाले फर्नीचर की माँग तेजी से बढ़ रही है.

भरतपुर. बीरमपुरा और आसपास के क्षेत्रों में इको-फ्रेंडली फर्नीचर तैयार करने का काम बड़े पैमाने पर किया जाता है. यहां कारीगर प्राकृतिक और स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल कर हाथों से आकर्षक फर्नीचर तैयार करते हैं. पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ यह फर्नीचर अपनी मजबूती, टिकाऊपन और अनोखे डिजाइन के लिए भी लोगों के बीच खास पहचान बना रहा है. यही वजह है कि स्थानीय बाजार के साथ-साथ दूसरे शहरों में भी इसकी मांग देखने को मिलती है.

यहां तैयार होने वाले फर्नीचर की सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने में प्राकृतिक घास-फूस और खरपतवार जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. कारीगर इन सामग्रियों को एक खास तरीके से तैयार कर मजबूत ढांचे के साथ जोड़ते हैं. इसके बाद हाथों की बारीक कारीगरी से फर्नीचर को आकर्षक रूप दिया जाता है. पूरी प्रक्रिया में मशीनों के बजाय पारंपरिक तकनीक और कारीगरों की मेहनत का अधिक इस्तेमाल होता है. इससे हर फर्नीचर की अपनी अलग पहचान दिखाई देती है.

बीरमपुरा क्षेत्र में बनने वाले इको-फ्रेंडली फर्नीचर में मेज, टेबल, कुर्सियां, मूढ़ा-मूढ़ी, शू-स्टैंड और घर की सजावट में इस्तेमाल होने वाली कई अन्य वस्तुएं शामिल हैं. इनकी डिजाइन को जरूरत और पसंद के अनुसार अलग-अलग आकार और रूप में तैयार किया जाता है. प्राकृतिक रंग और घास-फूस की बनावट इसे देखने में भी आकर्षक बनाती है. यही कारण है कि लोग इसे घर, फार्म हाउस, रिसॉर्ट और अन्य स्थानों पर सजावट के लिए पसंद कर रहे हैं.

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इस फर्नीचर की मांग खास तौर पर बड़े-बड़े बंगलों और फार्म हाउस में देखने को मिलती है. लोग अपने घरों को प्राकृतिक और पारंपरिक लुक देने के लिए इस तरह के फर्नीचर का इस्तेमाल कर रहे हैं. आधुनिक फर्नीचर के बीच इसकी अलग डिजाइन और देसी कारीगरी इसे खास बनाती है. इसके अलावा रेस्टोरेंट, होटल और पर्यटन स्थलों पर भी प्राकृतिक लुक देने के लिए इस तरह के फर्नीचर की मांग बढ़ रही है.

कारीगरों के लिए यह काम रोजगार और आत्मनिर्भरता का भी जरिया बना हुआ है. स्थानीय स्तर पर उपलब्ध घास-फूस और अन्य प्राकृतिक सामग्री का उपयोग होने से इसे तैयार करने में स्थानीय संसाधनों की अहम भूमिका रहती है. कारीगर अपनी मेहनत और हुनर के जरिए साधारण सामग्री को उपयोगी और आकर्षक फर्नीचर में बदल देते हैं. इससे पारंपरिक कारीगरी को भी बढ़ावा मिल रहा है और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं.

भरतपुर के बीरमपुरा क्षेत्र का यह इको-फ्रेंडली फर्नीचर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय हुनर और पारंपरिक कारीगरी की मिसाल पेश कर रहा है. प्राकृतिक सामग्री से तैयार होने वाला यह फर्नीचर दिखने में खूबसूरत होने के साथ मजबूत और उपयोगी भी है. बदलते दौर में जब लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक हो रहे हैं, ऐसे में घास-फूस से तैयार फर्नीचर की मांग आने वाले समय में और बढ़ने की उम्मीद है.

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August 15, 2026, 09:05 IST

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