लंदन बना मिनी राजस्थान! घूमर से दाल-बाटी तक, ‘जीमण 2026’ में दिखी संस्कृति की झलक

जयपुर. यूनाइटेड किंगडम के लंदन में आयोजित ‘जीमण 2026’ कार्यक्रम ने इस बार प्रवासी राजस्थानी समाज को एक सांस्कृतिक मंच पर जोड़ते हुए राजस्थान की समृद्ध परंपराओं को जीवंत कर दिया. कार्यक्रम में राजस्थान की लोक संस्कृति, पारंपरिक खान-पान, लोक संगीत और लोकनृत्यों का अनूठा संगम देखने को मिला. स्कॉटलैंड, मैनचेस्टर, बर्मिंघम, लीसेस्टर, लीड्स, कार्डिफ, मिल्टन कीन्स, साउथहॉल, हैरो और नॉटिंघम सहित यूके के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में प्रवासी राजस्थानी परिवार इसमें शामिल हुए.
आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष कार्यक्रम में अब तक की सबसे अधिक उपस्थिति दर्ज की गई, जिससे यह भारत के बाहर आयोजित सबसे बड़े राजस्थानी सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल हो गया. कार्यक्रम में उद्योग, व्यापार और विभिन्न पेशों से जुड़े राजस्थान मूल के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. कार्यक्रम के दौरान वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने मंच से राजस्थानी भजन प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि राजस्थान की अपनायत, अतिथि सत्कार और सांस्कृतिक विरासत दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती है.
राजस्थानी लोकगीतों पर बच्चों औा युवाओं ने मचाया धमाल
इस अवसर पर उनकी पत्नी किरण अग्रवाल द्वारा राजस्थान एसोसिएशन यूके की दस वर्षीय सांस्कृतिक यात्रा पर आधारित एक विशेष कॉफी टेबल बुक का भी लोकार्पण किया गया. इससे पहले दीपपाल सिंह और ऐश्वर्या गोयल ने संगठन की एक दशक की उपलब्धियों और विकास यात्रा पर प्रकाश डाला. वहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए. मंच पर ‘शुभ दिन आयो’, ‘घणी खम्मा’, ‘घूमर’, ‘तेरह ताली’, ‘रंगीलो म्हारो ढोलना’ और ‘कालीयो कूद पड़ियो’ जैसे लोकप्रिय राजस्थानी लोकगीतों पर बच्चों और युवाओं ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं.
जीमण 2026′ पर 10 विशिष्ट हस्तियों का किया गया सम्मानित
मेहमानों के लिए दाल-बाटी-चूरमा, खीर, जलेबी, पूरी-सब्जी और बर्फी गोला जैसे पारंपरिक व्यंजन परोसे गए, जिन्होंने विदेश में भी राजस्थान की मिट्टी का स्वाद और अपनापन महसूस कराया. कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 10 विशिष्ट हस्तियों का सम्मान भी किया गया. इनमें जीत चौधरी, शांतनु राजावत, लोकेश चेचाणी, अवधेश ओझा, तिलोक जी माली, तेज रसेड़ों, सूर्यवीर जी, विश्वजीत सिंह, रचिका गांधी और रंजीत सिंह राठौड़ शामिल रहे. अंत में आलोक शर्मा, अनुभव चौधरी और आदित्य शकावत ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया. ‘जीमण 2026’ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि हजारों किलोमीटर दूर रहकर भी प्रवासी राजस्थानी अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं.



