MPSC Paper Leak Investigation: एमपीएससी पेपर लीक में मिली 270 पन्नों की चैट, 5 लाख में बिके थे 91 सवाल

Last Updated:September 07, 2026, 09:39 IST
MPSC Paper Leak Investigation: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा पेपर लीक मामले में क्राइम ब्रांच को 270 पन्नों की WhatsApp चैट मिली है. आरोपी ने फोन नदी में फेंक दिया था लेकिन सह-आरोपी के वॉट्सऐप से 91 सवालों की सेटिंग और 5 लाख की डील का खुलासा हो गया. जानें इस फ्रॉड का पूरा सच कैसे खुला.MPSC Paper Leak Investigation: महाराष्ट्र पेपर लीक मामले में कई डिजिटल सबूत हाथ लगे हैं
नई दिल्ली (MPSC Paper Leak Investigation). महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस घोटाले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच को केस की दिशा बदलने वाला डिजिटल सबूत मिला है. हालांकि मुख्य आरोपी ऋतुजा पाटिल ने अपने गुनाह के निशान मिटाने के लिए अपना मोबाइल फोन उल्हास नदी में फेंक दिया था. लेकिन सह-आरोपी लोकेश उर्फ गौरव पाटिल के फोन ने सारा राज खोल दिया है.
270 पन्नों की वाट्सऐप चैट से खुला 91 सवालों का राज
चैट में पैसों के लेन-देन से लेकर वॉन्टेड आरोपियों की कड़ियों का पूरा ब्योरा दर्ज है. क्राइम ब्रांच अब इस डिजिटल सबूत के आधार पर पेपर लीक का नेटवर्क बेनकाब करने में जुट गई है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, 20 मार्च की चैट में ऋतुजा ने गौरव को एक क्वेश्चन बैंक भेजा था. उसने दावा किया था कि इसमें से कई सवाल पेपर में आएंगे. हैरानी की बात है कि चैट में 10 सवाल जानबूझकर गलत हल करने की सलाह दी गई थी, जिससे किसी को शक न हो और आंसर-शीट पूरी तरह मैच न करे.
नदी में फेंका फोन, डिजिटल सबूत ने बिगाड़ा खेल
22 मार्च को परीक्षा खत्म होते ही ऋतुजा ने चैट पर दावा किया कि बताए गए प्रश्नों में से 78 सवाल एग्जाम में आए थे. 13 अन्य सवालों के साथ कुल 91 सवालों की सेटिंग का खुलासा हुआ है. आरोपी ऋतुजा पाटिल ने सोचा था कि फोन उल्हास नदी में बहा देने से वह कानून के शिकंजे से बच जाएगी. अक्सर साइबर अपराधी सबूत मिटाने के लिए ऐसा करते हैं. लेकिन डिजिटल फॉरेंसिक के दौर में यह चाल काम नहीं आई. सह-आरोपी गौरव के फोन का बैकअप और चैट हिस्ट्री रिकवर होते ही फ्रॉड की टाइमलाइन तैयार हो गई.
वॉन्टेड मयूर ठाकरे की एंट्री और 5 लाख रुपये की डील
चैट खंगालने पर इस केस के वॉन्टेड आरोपी मयूर ठाकरे का नाम भी सामने आया है. जांच में पता चला है कि ऋतुजा के पिता ने मयूर ठाकरे को हिदायत दी थी कि इस पेपर लीक की भनक घर के सदस्यों तक को भी नहीं लगनी चाहिए. इसके अलावा चैट में पेपर का सौदा करने के लिए 5 लाख रुपये की मांग का साफ जिक्र है. चैट में अगले ही दिन तक यह रकम जुटाने की बातचीत दर्ज है. क्राइम ब्रांच अब मयूर ठाकरे की तलाश में छापेमारी कर रही है.
प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘डिजिटल फॉरेंसिक’ से आरोपी कैसे पकड़े जा रहे हैं?
आज-कल पेपर लीक कराने वाले गिरोह हाई-टेक तरीके अपनाते हैं, लेकिन जांच एजेंसियां भी फॉरेंसिक टूल्स की मदद से उन्हें बेनकाब कर रही हैं:
डिलीटेड चैट रिकवरी: वॉट्सऐप या टेलीग्राम से मेसेज डिलीट करने या फोन नष्ट करने पर भी क्लाउड बैकअप, रिसीवर के हैंडसेट या टेलीकॉम डेटा से मैसेज रिकवर हो जाते हैं.
IP और लोकेशन ट्रैकिंग: पेपर की फोटो कब, किस समय और किस टावर लोकेशन से भेजी गई. इसका सटीक समय (Timestamps) अदालत में सबसे बड़ा सबूत बनता है.
About the Authorदीपाली पोरवालSenior Sub Editor
Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is kno…
September 07, 2026, 09:39 IST



