राजस्थान में मानसून ने फिर बदली चाल, कहीं मूसलाधार बारिश तो कहीं उमस करेगी बेहाल

जयपुर. राजस्थान में मानसून का स्वरूप एक बार फिर बदलता नजर आ रहा है. आईएमडी के अनुसार राज्य के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र कमजोर होकर अब उत्तर-पूर्वी राजस्थान के ऊपर परिसंचरण तंत्र के रूप में सक्रिय है. इसके साथ ही समुद्र तल पर सक्रिय मानसून ट्रफ बीकानेर, दिल्ली, लखनऊ और पटना से होकर मणिपुर की ओर गुजर रही है तथा यह 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई तक विस्तारित है. मौसमीय प्रणालियों में आए इस बदलाव का असर आगामी दिनों में राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में साफ दिखाई देगा. जहां उत्तर-पूर्वी और पूर्वी जिलों में बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी, वहीं दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में वर्षा में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है.
आईएमडी का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में बारिश का वितरण असमान रहेगा और कई जिलों में मेघगर्जन के साथ तेज बारिश देखने को मिल सकती है. पूर्वोत्तर राजस्थान और आसपास के क्षेत्र सहित मध्य राजस्थान पर 1.5 से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है. वहीं दक्षिण उत्तर प्रदेश के मध्य भाग पर 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. इसके अलावा जम्मू संभाग और आसपास के क्षेत्र पर 5.8 से 7.6 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है, जिससे उत्तर भारत के मौसम पर प्रभाव बना हुआ है.
आईएमडी के अनुसार राजस्थान के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र कमजोर होकर उत्तर-पूर्वी राजस्थान के ऊपर परिसंचरण तंत्र में बदल गया है
भरतपुर, कोटा और उदयपुर संभाग में बारिश की संभवना
जयपुर, दौसा, करौली, भरतपुर और अलवर जिलों में मेघगर्जन के साथ हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट
पाली के जैतारण में सर्वाधिक 161 मिमी हुई बारिश
आईएमडी ने चेतावनी दी है कि जिन जिलों में तेज बारिश होगी, वहां जलभराव, छोटे नालों में जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका है. लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी गई है. बीते 24 घंटों के दौरान पूर्वी राजस्थान में कई स्थानों और पश्चिमी राजस्थान में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई. पाली जिले के जैतारण में सर्वाधिक 161 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई. मानसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने से जोधपुर, उदयपुर और कोटा संभाग में वर्षा गतिविधियों में कमी आएगी, जबकि बीकानेर, शेखावाटी, जयपुर और भरतपुर संभाग के कुछ हिस्सों में 5 अगस्त तक हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है.
पाली जिले के जैतारण में सर्वाधिक 161 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई
6 से 8 अगस्त के दौरान बढ़ेंगी बारिश की गतिविधियां
• आईएमडी के अनुसार राजस्थान के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र कमजोर होकर उत्तर-पूर्वी राजस्थान के ऊपर परिसंचरण तंत्र में बदल गया है, जिससे मौसम में नया बदलाव देखने को मिलेगा.
• समुद्र तल पर सक्रिय मानसून ट्रफ बीकानेर, दिल्ली, लखनऊ और पटना से होकर मणिपुर की ओर गुजर रही है, जिसका असर प्रदेश के कई जिलों पर पड़ेगा.
• 4 अगस्त को जयपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर संभाग के अधिकांश जिलों में मेघगर्जन के साथ हल्की से मध्यम और कहीं-कहीं तेज बारिश होने की संभावना है.
• अलवर, दौसा, धौलपुर, करौली, टोंक, सीकर, जयपुर और भरतपुर सहित कई जिलों में रुक-रुक कर बारिश के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं.
• उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, बूंदी और बारां में अच्छी बारिश दर्ज होने के प्रबल आसार जताए गए हैं.
बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा और फलौदी जैसे पश्चिमी जिलों में बारिश की संभावना कम रहेगी
• जोधपुर, पाली, नागौर, जालौर, सिरोही, बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में हल्की से मध्यम बारिश और मेघगर्जन की संभावना बनी हुई है.
• बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा और फलौदी जैसे पश्चिमी जिलों में बारिश की संभावना कम रहेगी, हालांकि कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है.
• बीते 24 घंटों में पाली जिले के जैतारण में सर्वाधिक 161 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो प्रदेश में सबसे अधिक रिकॉर्ड की गई वर्षा रही.
• आईएमडी ने भारी बारिश वाले जिलों में जलभराव, छोटे नालों का जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों में आवागमन प्रभावित होने की चेतावनी जारी की है.
• 6 से 8 अगस्त के दौरान उत्तर-पूर्वी और पूर्वी राजस्थान में फिर से बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जबकि पश्चिमी राजस्थान में बारिश कम और उमस अधिक रहने की संभावना है.
7 अगस्त तक जयपुर, भरतपुर और अजमेर संभाग में बारिश के आसार
आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार 4 से 7 अगस्त तक जयपुर, भरतपुर, कोटा और अजमेर संभाग में कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना बनी रहेगी. वहीं बीकानेर संभाग में भी इन दिनों हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं. 6 से 8 अगस्त के दौरान उत्तर-पूर्वी और पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां फिर से बढ़ सकती हैं, जबकि पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश क्षेत्रों में बारिश में कमी रहने और उमस बढ़ने की संभावना है.
6 से 8 अगस्त के दौरान उत्तर-पूर्वी और पूर्वी राजस्थान में फिर से बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं
राजस्थान में मानसून का नया सिस्टम क्या है?
आईएमडी के अनुसार राजस्थान के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र अब कमजोर होकर उत्तर-पूर्वी राजस्थान के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण में बदल गया है. इसके साथ ही मानसून ट्रफ बीकानेर, दिल्ली, लखनऊ और पटना से होकर गुजर रही है. इन दोनों मौसमीय प्रणालियों के कारण प्रदेश में बारिश का वितरण असमान रहेगा. पूर्वी और उत्तर-पूर्वी जिलों में अच्छी बारिश की संभावना है, जबकि पश्चिमी हिस्सों में गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं.
किन जिलों में सबसे ज्यादा बारिश होने की संभावना है?
जयपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर संभाग के कई जिलों में मेघगर्जन के साथ तेज बारिश होने की संभावना है. इसके अलावा उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, बूंदी और बारां में भी अच्छी बारिश के आसार हैं. अलवर, दौसा, करौली, धौलपुर, टोंक और सीकर सहित कई जिलों में भी रुक-रुक कर बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं.
किन जिलों में बारिश कम रहेगी?
मौसम विभाग के अनुसार बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा और फलौदी जैसे पश्चिमी जिलों में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहेंगी. हालांकि स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी से इनकार नहीं किया जा सकता. वहीं 6 से 8 अगस्त के दौरान पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में बारिश में और कमी आने की संभावना है, जबकि उमस लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है.
पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश कहां हुई?
बीते 24 घंटों के दौरान पाली जिले के जैतारण में सबसे अधिक 161 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. इसके अलावा पूर्वी राजस्थान के कई स्थानों और पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश रिकॉर्ड की गई. जैतारण में हुई भारी बारिश मानसून की सक्रियता को दर्शाती है और स्थानीय स्तर पर जलभराव जैसी स्थितियां भी देखने को मिलीं.
लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
आईएमडी ने चेतावनी दी है कि जहां तेज बारिश होगी वहां जलभराव, छोटे नालों का जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों में आवागमन प्रभावित हो सकता है. ऐसे में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए, जलभराव वाले मार्गों से दूरी रखनी चाहिए और मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर बनाए रखनी चाहिए. मेघगर्जन के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से भी बचने की सलाह दी गई है.



