Nandeshwar Mahadev Udaipur | नांदेश्वर महादेव मंदिर उदयपुर, जानें इतिहास और मान्यताएं

Last Updated:August 19, 2026, 05:41 IST
Nandeshwar Mahadev Udaipur: उदयपुर से 15 किमी दूर अरावली की पहाड़ियों में बसा नांदेश्वर महादेव मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता है कि यहां नारद मुनि ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी. मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है. परिसर के पास स्थित प्राचीन कुंड का जल कभी कम नहीं होता. सावन और महाशिवरात्रि में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. मानसून के समय हरियाली, पहाड़ और बहती नदी के कारण यह स्थान एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन और पिकनिक स्पॉट बन जाता है.
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Udaipur: झीलों की नगरी उदयपुर में कई ऐसे ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर स्थित हैं, जो अपनी अनूठी धार्मिक मान्यताओं और मनमोहक प्राकृतिक खूबसूरती के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं. इन्हीं में से एक बेहद पवित्र और रमणीय स्थान है नांदेश्वर महादेव मंदिर. उदयपुर शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर अरावली की घनी पहाड़ियों के बीच बसा यह प्राचीन शिव धाम सावन और मानसून के पूरे मौसम में श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी अपनी ओर खींचता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवर्षि नारद मुनि ने यहां एकांतवास के दौरान वर्षों तक भगवान महादेव की कठोर पूजा-अर्चना और साधना की थी. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, नारद मुनि की महादेव के प्रति इसी अटूट भक्ति और विशेष तपस्या के कारण कालक्रम में इस स्थान को नांदेश्वर महादेव के नाम से पहचाना जाने लगा.
नांदेश्वर महादेव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता और आकर्षण यहां विराजमान स्वयंभू महादेव की प्रतिमा है. श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि यह शिवलिंग किसी मनुष्य द्वारा स्थापित नहीं किया गया है, बल्कि स्वयं धरती से प्रकट हुआ है. इसी कारण इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ के प्रति भक्तों की बेहद गहरी आस्था जुड़ी हुई है. मंदिर परिसर के पास ही एक बेहद प्राचीन कुंड भी स्थित है, जो इस स्थान की अलौकिक शक्ति का प्रमाण है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कुंड का जलस्तर वर्षों से एक समान बना हुआ है और भीषण गर्मी में भी इसमें कभी पानी की कमी नहीं होती. मंदिर के आसपास से एक प्राकृतिक नदी भी होकर बहती है, जो इस पूरे धार्मिक स्थल को और अधिक दर्शनीय बना देती है.
अरावली की पहाड़ियां और मानसून का विहंगम दृश्य
नांदेश्वर महादेव मंदिर चारों तरफ से अरावली की विशाल पर्वत श्रृंखलाओं और घने वृक्षों से घिरा हुआ है. मंदिर तक पहुँचने का मार्ग ही प्रकृति प्रेमियों का मन मोह लेता है. मानसून के मौसम में जब झमाझम बारिश होती है, तो यह पूरा क्षेत्र हरियाली की चादर ओढ़ लेता है. पहाड़ियों से गिरते पानी के झरने और आसपास का सुरम्य वातावरण इस जगह को किसी स्वर्ग जैसा बना देता है.
सावन और पर्वों पर उमड़ता है आस्था का जनसैलाब
सावन के पवित्र महीने में नांदेश्वर महादेव मंदिर में अद्भुत रौनक और भक्तिमय माहौल देखने को मिलता है. राजस्थान और आसपास के राज्यों से हजारों श्रद्धालु यहां भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक करने के लिए पहुंचते हैं. महाशिवरात्रि और सावन के सोमवार पर तो यहां विशाल मेला जैसा माहौल रहता है. धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक कुंड, कल-कल बहती नदी और हरी-भरी पहाड़ियों का संगम होने के कारण यह स्थान उदयपुरवासियों के लिए एक पसंदीदा पिकनिक स्पॉट भी बन चुका है. संक्षेप में कहें तो नांदेश्वर महादेव मंदिर आस्था, शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का एक अनूठा केंद्र है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Udaipur,Udaipur,Rajasthan
First Published :
August 19, 2026, 05:41 IST



