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सिर्फ स्टेशन नहीं इतिहास का गवाह है मथुरा जंक्शन, अंग्रेजों से आजादी के आंदोलन तक जुड़ी कहानी

मथुरा: ब्रिटिश शासन काल में मथुरा के इस रेलवे स्टेशन का निर्माण कराया गया था. यह रेलवे स्टेशन आगरा-दिल्ली रेल लाइन को जोड़ता था. इसी रेल मार्ग के जरिए अंग्रेज और भारत के लोग यात्रा किया करते थे. कान्हा की नगरी मथुरा आने वाले लोग मथुरा जंक्शन पर उतरकर अपनी यात्रा शुरू करते थे. कहा जाता है कि अंग्रेजों ने लंबी दूरी की यात्रा में लगने वाले समय को कम करने के लिए इस रेलवे स्टेशन का निर्माण कराया था. यह रेल मार्ग उस दौर में लोगों के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण और सुगम साधन बनकर उभरा.

ब्रिटिश शासन काल की आज भी दिखती हैं निशानियां

ब्रिटिश शासन काल की कई निशानियां आज भी मथुरा में देखने को मिलती हैं. ब्रिटिश शासन का दौर देश के लिए गुलामी और परेशानियों से भरा रहा. इस गुलामी से आजादी पाने के लिए देश के महानायकों ने अपना बलिदान दिया और भारत को आजाद कराया. ब्रिटिश काल से जुड़ी कई महत्वपूर्ण धरोहरें आज भी मथुरा में मौजूद हैं.

इन्हीं धरोहरों में एक ऐसा स्थान है, जहां हजारों लोग प्रतिदिन यात्रा करते हैं. इस स्थान को मथुरा जंक्शन के नाम से जाना जाता है. मथुरा जंक्शन अंग्रेजों की देन है और यह दिल्ली-आगरा रेल मार्ग को जोड़ता है.

1905 में हुआ था मथुरा जंक्शन का निर्माण

Local18 से बातचीत करते हुए इतिहास के जानकार डॉ. सुरेश चंद्र शर्मा ने बताया कि आजादी को भले ही 79 साल बीत चुके हों, लेकिन आज भी मथुरा में ब्रिटिश काल से जुड़ी कई धरोहरें मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि वर्ष 1905 में ब्रिटिश शासन काल के दौरान मथुरा जंक्शन का निर्माण कराया गया था. यह जंक्शन आगरा-दिल्ली रेल मार्ग को जोड़ता है और लंबी दूरी की यात्रा को कुछ ही घंटों में पूरा करने में मदद करता था.

अंग्रेज आवागमन और माल ढुलाई के लिए करते थे इस्तेमाल

डॉ. सुरेश चंद्र शर्मा के मुताबिक, इस रेल मार्ग का इस्तेमाल अंग्रेज अपने आवागमन के साथ-साथ मालगाड़ियों के जरिए सामान को लाने-ले जाने के लिए भी करते थे. उस दौर में यह रेलवे मार्ग व्यापार और आवागमन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण था.

मथुरा जंक्शन से जुड़ा है आंदोलन का इतिहास

इतिहासकार ने बताया कि मथुरा जंक्शन केवल आवागमन का साधन ही नहीं रहा, बल्कि यह स्वतंत्रता आंदोलन के दौर की घटनाओं का भी साक्षी रहा है. वर्ष 1927-28 के बीच मथुरा में आंदोलन की चिंगारी शुरू हुई थी. ब्रिटिश काल से जुड़ी मथुरा की अनेक धरोहरें आज भी उस दौर की याद दिलाती हैं.

वर्ष 1905 में बना मथुरा जंक्शन आज भी ब्रिटिश काल की महत्वपूर्ण धरोहरों में अपना अहम स्थान रखता है और प्रतिदिन हजारों यात्रियों की आवाजाही का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

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