Vijay Ganesh Temple: सीकर के विजय गणेश मंदिर का बदलेगा रूप, 1.25 करोड़ से बनेगा भव्य 33 फीट ऊंचा मंदिर

Last Updated:September 28, 2026, 16:42 IST
Vijay Ganesh Temple: सीकर के प्राचीन विजय गणेश मंदिर का करीब 1.25 करोड़ रुपए की लागत से जीर्णोद्धार और विस्तार किया जा रहा है. मंदिर तीन मंजिला होगा और इसकी ऊंचाई करीब 33 फीट रहेगी. मकराना के सफेद पत्थरों पर नक्काशी के साथ दूसरी मंजिल पर भगवान शिव की प्रतिमा और तीसरी मंजिल पर भव्य शिखर बनाया जाएगा. मंदिर की अनोखी मान्यताओं और ऐतिहासिक कहानी से जुड़ा यह स्थल अब नए भव्य स्वरूप में श्रद्धालुओं के सामने आएगा.
सीकर. शहर के फतेहपुरी गेट स्थित प्राचीन विजय गणेश मंदिर का अब भव्य स्वरूप नजर आएगा. मंदिर का करीब 1.25 करोड़ रुपए की लागत से जीर्णोद्धार और विस्तार किया जा रहा है. इसके बाद मंदिर तीन मंजिला होगा और इसकी ऊंचाई करीब 33 फीट रहेगी. मंदिर के निर्माण में मकराना के सफेद पत्थरों का इस्तेमाल किया जाएगा. इन पत्थरों पर नक्काशी का काम भी मकराना के कारीगर करेंगे. मंदिर की दूसरी मंजिल पर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जबकि तीसरी मंजिल पर मंदिर के शिखर का निर्माण होगा.
मंदिर प्रबंधन के अनुसार श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इसका विस्तार किया जा रहा है. निर्माण कार्य को इस तरह किया जा रहा है कि मंदिर को भव्य स्वरूप देने के साथ दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी अधिक सुविधा मिल सके. दीपावली से पहले ग्राउंड फ्लोर का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
मकराना के पत्थरों पर दिखेगी कारीगरी
मंदिर के पुजारी पवन शर्मा ने बताया कि नए स्वरूप में पूरे मंदिर में मार्बल पत्थर का काम होगा. इसके लिए मकराना के सफेद पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है. पत्थरों पर धार्मिक आकृतियों और डिजाइन की नक्काशी मकराना के कारीगर ही करेंगे. इससे मंदिर के स्वरूप में पारंपरिक स्थापत्य कला की झलक देखने को मिलेगी. नए मंदिर में भगवान गणेश की वर्तमान प्रतिमा को यथास्थान रखा जाएगा. दूसरी मंजिल पर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित होगी, तीसरी मंजिल पर शिखर बनाया जाएगा. मंदिर की कुल ऊंचाई करीब 33 फीट होगी.
बारिश में आधी से ज्यादा डूब जाती थी प्रतिमा
विजय गणेश मंदिर की सबसे खास मान्यता यहां स्थापित गणेश प्रतिमा से जुड़ी है. मंदिर के महंत के अनुसार यह प्रतिमा चिकनी मिट्टी और गोबर से बनी हुई बताई जाती है. पुराने समय में बारिश के दौरान मंदिर परिसर में पानी भर जाता था. कई बार प्रतिमा आधी से ज्यादा पानी में डूब जाती थी. इसके बावजूद प्रतिमा के नहीं गलने की बात कही जाती है. इसी घटना को श्रद्धालु गणेशजी के चमत्कार से जोड़कर देखते हैं. मान्यता के कारण यहां भगवान गणेश को विजय गणेश के नाम से पूजा जाता है और सीकर के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
युद्ध में जीत की कामना से जुड़ी है कहानी
विजय गणेश मंदिर की स्थापना से जुड़ी एक पुरानी मान्यता सीकर के इतिहास और युद्ध की कहानी से भी जुड़ी है. मंदिर के महंत के अनुसार करीब 1840 में सीकर के रावराजा देवीसिंह और कासली के राजा पूरणसिंह के बीच संघर्ष चल रहा था. मान्यता है कि पूरणसिंह रोज सीकर की चारदीवारी स्थित नानी गेट पर भाला फेंककर देवीसिंह को युद्ध की चुनौती देते थे. विवाद बढ़ने पर देवीसिंह ने कासली पर कई बार गोले दागने का प्रयास किया, लेकिन कोई गोला वहां नहीं दागा जा सका. राजा ने जब विद्वानों से इसका कारण पूछा तो उन्होंने कासली में भगवान गणेश की ऐसी प्रतिमा होने की बात कही, जिसे गांव की रक्षा करने वाली माना जाता था.
इसके बाद देवीसिंह ने युद्ध के दौरान गणेशजी से विजय की कामना की. मान्यता है कि युद्ध में जीत के बाद वे गणेश प्रतिमा को सीकर लेकर आए. फतेहपुरी गेट पहुंचने पर प्रतिमा वाला रथ अचानक रुक गया और घोड़े आगे नहीं बढ़े. इसे गणेशजी की इच्छा मानते हुए उसी स्थान पर मंदिर स्थापित कर दिया गया. तभी से यहां भगवान गणेश को विजय गणेश के रूप में पूजा जाता है. अब करीब 1.25 करोड़ रुपए के जीर्णोद्धार के बाद यही मंदिर नए और भव्य स्वरूप में श्रद्धालुओं के सामने आएगा. मकराना के सफेद पत्थरों की नक्काशी, शिव प्रतिमा और 33 फीट ऊंचा शिखर इसके नए स्वरूप की खास पहचान होंगे.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
और पढ़ेंLocation :
Sikar,Rajasthan
First Published :
September 28, 2026, 16:42 IST



