Rajasthan

अब कचरा नहीं बनेगा मुसीबत, 150 टन क्षमता वाली मशीन करेगी छंटाई, खाद का भी होगा निर्माण

Last Updated:June 23, 2026, 10:34 IST

Sikar Waste Management: सीकर नगर परिषद ने शहर में कचरा प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाली सेमी-ऑटोमैटिक ट्रॉमल मशीन स्थापित की है. नई व्यवस्था के तहत गीले और सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से पृथक्करण और निस्तारण किया जाएगा. मशीन कचरे की स्क्रीनिंग और छंटाई कर उपयोगी सामग्री को अलग करेगी, जिससे रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा. जैविक कचरे से कम्पोस्ट खाद तैयार की जाएगी, जबकि प्लास्टिक और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग भेजा जाएगा. इससे लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी.

सीकर शहर में अब कचरे की समस्या से निपटने के लिए आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा. इसको लेकर सीकर नगर परिषद ने कचरा निस्तारण प्रोसेसिंग यूनिट को अपग्रेड कर दिया है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद शहर से एकत्र होने वाले गीले और सूखे कचरे का अलग-अलग निस्तारण किया जाएगा. इससे कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा. साथ ही प्लास्टिक, मिट्टी और जैविक कचरे का अलग-अलग उपयोग किया जाएगा.

नगर परिषद ने मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) और ठोस कचरा प्रबंधन केंद्र पर 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाली सेमी-ऑटोमैटिक ट्रॉमल मशीन स्थापित की है. यह मशीन कचरे की स्क्रीनिंग और छंटाई का कार्य करेगी. सीकर शहर में प्रतिदिन करीब 180 टन कचरा निकलता है, जिसके निस्तारण को अब अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकेगा.

नगर परिषद के जेईएन सुरेन्द्र गोदारा ने बताया कि नई मशीन में कचरा डालने के बाद उसे आकार के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा. छोटे कण ट्रॉमल ड्रम से छनकर नीचे निकल जाएंगे, जबकि बड़े आकार का कचरा अलग कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से बाहर आएगा. इससे कचरे को अलग-अलग वर्गों में बांटना आसान होगा और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया भी तेज हो सकेगी.

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जेईएन सुरेन्द्र गोदारा के अनुसार, इस तकनीक के उपयोग से लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा में कमी आएगी. कचरे में मौजूद उपयोगी सामग्री को अलग कर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा. इससे संसाधनों की बचत होगी और पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा. वहीं, जल्दी जल्दी कचरे का निस्तारण भी हो सकेगा. इससे कचरे को अलग अलग करने में अधिक मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी.

नगर परिषद आयुक्त शशिकांत शर्मा ने बताया कि मशीन के माध्यम से गीले और सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से अलग अलग किया जाएगा. प्लास्टिक और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा, जबकि जैविक कचरे से कम्पोस्ट खाद तैयार की जाएगी. इससे संचालन लागत में कमी आने के साथ मैनुअल श्रम की आवश्यकता भी घटेगी. इस जैविक कचरे से बनने वाली खाद को खाती में काम में लिया जाएगा.

उन्होंने बताया कि कचरा प्रसंस्करण की प्रक्रिया में पहले कचरे को फीड हॉपर में डाला जाएगा, जहां से कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से उसे ट्रॉमल ड्रम तक पहुंचाया जाएगा. स्क्रीनिंग के दौरान प्लास्टिक, धातु और अन्य उपयोगी सामग्री को अलग किया जाएगा. वहीं छनकर निकलने वाली मिट्टी का उपयोग भराव और अन्य विकास कार्यों में किया जाएगा.

नगर परिषद ने नागरिकों से भी घरों पर ही कचरे को चार श्रेणियों में अलग-अलग रखने की अपील की है. इनमें गीला कचरा, सूखा कचरा, स्वच्छता संबंधी कचरा तथा विशेष देखभाल वाला कचरा शामिल है. अधिकारियों का मानना है कि यदि लोग घर से ही कचरे का पृथक्करण करेंगे तो नई प्रोसेसिंग यूनिट की कार्यक्षमता और बढ़ेगी तथा शहर को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी.

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