Rajasthan

नुकरा घोड़े को मिलेगी नई पहचान! बन सकता है देश की 9वीं आधिकारिक नस्ल, 15 हजार है देश में संख्या

बीकानेर. शादी-ब्याह की शान और अपनी दूधिया सफेद रंगत के लिए प्रसिद्ध नुकरा (सफेद) घोड़े को अब राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है. बीकानेर स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र ने पहली बार इस नस्ल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण और पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यदि सभी तकनीकी औपचारिकताएं पूरी हो जाती है तो नुकरा देश की नौवीं आधिकारिक पंजीकृत घोड़ा नस्ल बन जाएगा.  वर्षों से इस नस्ल के संरक्षण और वैज्ञानिक मान्यता की मांग अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है.

सर्वेक्षण के आधार पर राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर), करनाल में पंजीकरण के लिए आवेदन किया जाएगा. राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के प्रभागाध्यक्ष डॉ. आर. ए. लेघा ने बताया कि वर्तमान में भारत में घोड़ों की आठ नस्लें आधिकारिक रूप से पंजीकृत हैं, जिनमें मारवाड़ी, काठियावाड़ी, भीमथड़ी, स्पीति, झांस्करी और मणिपुरी सहित अन्य नस्लें शामिल हैं. नुकरा घोड़े को अब तक अलग नस्ल के रूप में मान्यता नहीं मिली है, जबकि पशुपालक लंबे समय से इसकी मांग कर रहे हैं.

नुकरा घोड़ा नस्ल वैज्ञानिक मानदंडों को पूरा करता है

उन्होंने बताया कि नुकरा घोड़ा अपनी दूधिया सफेद रंगत, आकर्षक व्यक्तित्व और मजबूत कद-काठी के कारण अन्य नस्लों से अलग दिखाई देता है. यह मारवाड़ी घोड़े की तुलना में आकार में बड़ा होता है तथा इसकी चाल, सहनशक्ति और शांत स्वभाव इसे विशेष बनाते हैं. इस नस्ल के अधिकांश घोड़े पंजाब तथा राजस्थान के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में पाए जाते हैं. बीकानेर जिले में भी करीब 150 से 200 नुकरा घोड़े मौजूद हैं. डॉ. लेघा के अनुसार, पंजाब और राजस्थान में इस नस्ल का विस्तृत सर्वेक्षण किया गया है. इसमें प्रत्येक घोड़े की शारीरिक बनावट, रंग, ऊंचाई, वंशावली और अन्य वैज्ञानिक मानकों का रिकॉर्ड तैयार किया गया है. उनका मानना है कि नुकरा घोड़ा नस्ल के रूप में मान्यता पाने के सभी वैज्ञानिक मानदंडों को पूरा करता है. अब अंतिम निर्णय करनाल स्थित भारत सरकार की नोडल एजेंसी करेगी. उम्मीद है कि अगले वर्ष तक नुकरा घोड़े को आधिकारिक नस्ल के रूप में मान्यता मिल सकती है.

देश में करीब 15 हजार नुकरा घोड़े हैं

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र ने अध्ययन और संरक्षण के उद्देश्य से दो नुकरा घोड़ों को भी अपने केंद्र में रखा है. देशभर में नुकरा घोड़ों की संख्या लगभग 15 हजार आंकी गई है. इनमें करीब नौ हजार घोड़े पंजाब में, लगभग तीन हजार राजस्थान में तथा शेष अन्य राज्यों में पाए जाते हैं. अकेले बीकानेर जिले में करीब 200 नुकरा घोड़े हैं. नुकरा घोड़े की प्रमुख विशेषताएं दूधिया सफेद रंग, गुलाबी नाक और होंठ, मजबूत एवं संतुलित कद-काठी, तेज चाल और अधिक सहनशक्ति, शांत एवं सहज स्वभाव है. कानों में विशेष प्रकार का लचीलापन और ऊंचाई लगभग 160 से 170 सेंटीमीटर होती है. इसके अलावा शरीर पर एक-दो काले निशान, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘फुलकारी’ कहा जाता है. न्यूजलेटर

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