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संसद LIVE: ‘मोदी जी ने देश की बेटियों को कहा है- जा सिमरन जा… जी ले अपनी जिंदगी’, कंगना का सदन में फिल्‍मी अंदाज

Parliament Special Session LIVE: संसद का विशेष सत्र आज 16 अप्रैल 2026 को गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन पर जारी बहस के बीच विपक्ष के नैरेटिव को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया. शाह ने स्पष्ट किया कि दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटें कम होने का डर पूरी तरह भ्रामक है. उन्‍होंने कहा कि वो सरकार का पक्ष इस मुद्दे पर कल रखेंगे लेकिन आज विपक्ष के द्वारा फैलाए जा रहे झूठ पर सफाई देंगे। अमित शाह ने डेटा पेश करते हुए बताया कि परिसीमन के बाद दक्षिण की कुल सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी (कर्नाटक: 42, तमिलनाडु: 59, केरल: 30). शाह ने भरोसा दिलाया कि 2029 के चुनावों से पहले यह व्यवस्था लागू होगी और किसी भी राज्य का हक नहीं छीना जाएगा. हंगामे के साथ शुरू हुआ.

केंद्र सरकार ने सदन के पटल पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन से जुड़े अहम विधेयक पेश किए. इन विधेयकों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त तकरार देखने को मिली. विपक्ष के भारी विरोध के कारण सदन में वोटिंग की स्थिति पैदा हो गई. वोटिंग के दौरान सरकार के पक्ष में 251 और विरोध में 185 वोट पड़े. हैरान करने वाली बात यह रही कि एनडीए के 42 सांसदों ने वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा ही नहीं लिया. सरकार ने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 परसेंट आरक्षण देने के लिए एक बड़ा प्रस्ताव रखा है. इसके तहत लोकसभा में सदस्यों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना है. इसके लिए सरकार परिसीमन आयोग के गठन और केंद्र शासित प्रदेश कानून में बदलाव की तैयारी कर रही है. विपक्ष इसी बढ़ती संख्या और परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है.

पीएम मोदी ने संबोधन में विपक्ष को क्या संदेश दिया?

दोपहर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा को संबोधित करते हुए इसे देश के लिए गौरवशाली पल बताया. उन्होंने कहा कि महिलाओं को नीति निर्माण में हिस्सेदारी देना समय की सबसे बड़ी मांग है. पीएम ने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध करेंगे, देश की महिलाएं उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी. उनके अनुसार विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब सबका साथ और सबका विकास नीति निर्माण में भी दिखाई देगा.

संविधान संशोधन की राह में सरकार के सामने क्या हैं चुनौतियां?

कंगना का कांग्रेस पर तीखा प्रहार: ‘मंडी के रेट’ वाले बयान को याद कर सदन में घेरा

लोकसभा में महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान कंगना रनौत ने कांग्रेस की मानसिकता पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने 2024 के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्हें मंडी से प्रत्याशी बनाया गया, तब कांग्रेस के एक बड़े नेता ने उनकी फिल्मों की तस्वीरें साझा कर भद्दी टिप्पणी की थी. कंगना ने भावुक होते हुए कहा, “सोशल मीडिया पर पूछा गया कि मंडी में क्या रेट चल रहा है.” उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जागरूकता फैलाने वाली फिल्मों को नजरअंदाज कर विपक्ष का फोकस हमेशा महिलाओं के चरित्र हनन पर रहा है. कंगना के अनुसार, यह बिल ऐसी ही विकृत सोच वाली ताकतों को जवाब देने के लिए जरूरी है.

संसद LIVE: ‘मोदी जी ने देश की बेटियों को कहा है- जा सिमरन जा… जी ले अपनी जिंदगी’, कंगना का सदन में फिल्‍मी अंदाज

संसद के सदन में हिमाचल के मंडी से सांसद कंगना रनौत ने अपने चिर-परिचित फिल्मी अंदाज में प्रियंका गांधी और विपक्ष पर तीखा हमला बोला.  प्रियंका गांधी के ‘लोकतंत्र खतरे में है’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए कंगना ने कहा कि विपक्ष डराने की राजनीति कर रहा है.  उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ में मशहूर फिल्मी दिलवाले दुल्‍हानियां ले जाएंगे के डायलॉग का सहारा लेते हुए कहा, “मोदी जी ने देश की बेटियों को कह दिया है— जा सिमरन जा, जी ले अपनी जिंदगी. ” कंगना ने तर्क दिया कि महिला आरक्षण बिल के जरिए बेटियों को जो आजादी और अधिकार मिले हैं, वे लोकतंत्र को कमजोर नहीं बल्कि मजबूत कर रहे हैं.

सरकार का इराद साफ हे तो इसे 2023 में लागू क्‍यों नहीं किया? शशि थरूर ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र से पूछा सवाल

थरूर ने दक्षिण भारतीय राज्यों गोवा और पूर्वोत्तर के राज्यों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने चेतावनी दी कि परिसीमन का वर्तमान स्वरूप देश की एकता के लिए चुनौती बन सकता है. थरूर के अनुसार, जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिण के राज्यों को सजा नहीं मिलनी चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार का इरादा साफ था तो इसे 2023 में ही क्यों नहीं लागू किया गया? उन्होंने मांग की कि सरकार को इन राज्यों के साथ संवाद कर उनकी शंकाओं को दूर करना चाहिए.

महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना राजनीतिक नोटबंदी जैसा… शशि थरूर ने केंद्र को घेरा

शशि थरूर ने महिला आरक्षण बिल पर बहस के दौरान केंद्र पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन की शर्त से जोड़ना इसे अनिश्चितकाल के लिए लटकाने जैसा है. उन्होंने इसे राजनीतिक नोटबंदी के खतरे के रूप में पेश किया. थरूर का तर्क है कि परिसीमन एक बेहद जटिल प्रक्रिया है, जिस पर गहन चर्चा की जरूरत है. सरकार इसे बिना पर्याप्त बहस के जल्दबाजी में थोपना चाहती है जबकि कांग्रेस का मानना है कि आरक्षण को बिना किसी बाहरी शर्त के तुरंत लागू किया जाना चाहिए.

‘हर राज्य की सीटें होंगी 50% ज्यादा’: केशव प्रसाद मौर्य ने बताया महिला आरक्षण और परिसीमन का बड़ा फायदा

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “आज इस देश के इतिहास का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण दिन है जब इस देश की आधी आबादी को 2029 के लोकसभा चुनाव से ही 33% आरक्षण मिलने वाला है.  परिसीमन से हर राज्य की लोकसभा सीटों की संख्या में 50% वृद्धि होगी, हम इस फैसले का सम्मान करते हैं.  जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं उन्हें आधी आबादी द्वारा सज़ा मिलेगी.  अखिलेश यादव महिलाओं के शत्रु हैं, वे महिलाओं का भला कभी नहीं कर सकते, वे महिला विरोधी हैं इसलिए इस तरह की बात कर रहे हैं.  जब महिला आरक्षण की बात चल रही है तो वे अपने वोट बैंक की राजनीति करने लगते हैं और उसमें मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग करते हैं.  महिला आरक्षण विधेयक को बाधित नहीं करना चाहिए.”

संसद LIVE: सबसे पिछड़े तबके को शामिल करने में क्या हिचकिचाहट? प्रियंका गांधी ने सरकार से पूछे सवाल

प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस और विपक्ष केवल विरोध के लिए आवाज नहीं उठा रहे बल्कि वे इस बड़े वर्ग के लिए उनके जायज हक की मांग कर रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब महिलाओं को आरक्षण दिया जा रहा है तो उसमें सबसे पिछड़े और संघर्षशील तबके को शामिल करने में सरकार को क्या हिचकिचाहट है? उन्होंने मांग की कि आरक्षण के भीतर ओबीसी कोटा सुनिश्चित किया जाए ताकि विकास की धारा में उनकी भागीदारी भी समान हो.

संसद LIVE: ‘तकनीकी मुद्दा’ बताकर पल्ला झाड़ रही सरकार, संसद में प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण पर क्‍या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ओबीसी आरक्षण की मांग को ‘तकनीकी मुद्दा’ करार देने पर प्रियंका ने तीखी आपत्ति जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस शब्द का इस्तेमाल करके असल सामाजिक जिम्मेदारी से पीछे हट रही है. प्रियंका के अनुसार, जब विपक्ष ओबीसी समुदाय की जरूरतों और उनके अधिकारों को रेखांकित कर रहा है, तब प्रधानमंत्री द्वारा इसे एक प्रशासनिक उलझन या तकनीकी समस्या बता देना उनके मुद्दों को दरकिनार करने की एक सोची-समझी कोशिश है.

संसद LIVE: ‘ओबीसी समुदाय की मांगों को ‘बाद में देखने’ की बात…’, प्रियंका गांधी ने सरकार को अपने अंदाज में घेरा

प्रियंका गांधी ने नारी शक्ति वंदना विधेयक पर कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ओबीसी समुदाय की मांगों को ‘बाद में देखने’ की बात कहना इस बड़े वर्ग के लंबे संघर्ष और मेहनत का अपमान है. उन्होंने तर्क दिया कि जिस समाज ने देश के निर्माण में इतना योगदान दिया, उनके हक की बात को इस तरह हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. यह केवल एक चुनावी वादा नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के सामाजिक न्याय और उनके अस्तित्व से जुड़ा हुआ गंभीर विषय है.

संसद LIVE: ‘2029 से पहले संभव नहीं, अखिलेश जी को डरने की जरूरत नहीं’, परिसीमन पर अमित शाह का भरोसा

संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक है. उन्होंने कहा कि इसकी रिपोर्ट तभी लागू होगी जब संसद इसे स्वीकार करेगी और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलेगी. शाह ने समयसीमा स्पष्ट करते हुए कहा कि यह 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले होने का सवाल ही नहीं उठता. इसी दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर चुटकी लेते हुए कहा कि उन्हें इस बदलाव से डरने की जरूरत नहीं है, हालांकि वह जीतेंगे नहीं, वह अलग बात है.

 

संसद LIVE: दक्षिण के किस राज्‍य में कितनी सीट परिसीमन के बाद बढ़ेगी? अमित शाह ने दी पूरी जानकारी

अमित शाह ने संसद में आंकड़े पेश कर दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंता दूर की. उन्होंने बताया कि परिसीमन के बाद दक्षिण की कुल सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी, जिससे राज्यों का प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा.

राज्य का नामवर्तमान सीटेंपरिसीमन के बाद (संभावित)कर्नाटक2842केरल2030तमिलनाडु3959कुल (दक्षिण भारत)129195
संसद LIVE: ‘सीटें बढ़ेंगी, हक नहीं छीना जाएगा’, अमित शाह ने दक्षिण भारत के डर को किया दूर

गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में महिला आरक्षण बिल के बहाने दक्षिण भारतीय राज्यों में फैलाए जा रहे ‘सीटों के नुकसान’ वाले नैरेटिव की हवा निकाल दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन को लेकर दक्षिण के राज्यों में कोई भ्रांति नहीं रहनी चाहिए.  शाह ने तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों के वर्तमान और भविष्य के सीट प्रतिशत का डेटा पेश करते हुए साफ कहा कि इन राज्यों की सीटें बढ़ेंगी ही, उनका हक कतई नहीं छीना जाएगा.  “सरकार का जवाब कल दूंगा,” कहते हुए गृह मंत्री ने आज केवल उन झूठों की पोल खोली, जिनके जरिए उत्तर और दक्षिण भारत के बीच विभाजन की राजनीति की जा रही थी.

संसद LIVE: आज के चाणक्य ने बिना तैयारी पेश किया महिला आरक्षण बिल, प्रियंका गांधी का अमित शाह पर कटाक्ष

संसद में ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक’ पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला.  शाह को आज के युग का चाणक्य करार देते हुए प्रियंका ने तंज कसा कि वह विपक्ष से चर्चा किए बिना ही चुपचाप अपनी पूरी योजना बना लेते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यह बिल बिना किसी ठोस तैयारी के लेकर आई है. प्रियंका ने सवाल उठाया कि जब मंशा साफ है तो वर्तमान की 543 सीटों में से ही तत्काल महिलाओं को 33% आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही तो ऐसे फैसलों से लोकतंत्र की मूल भावना खारिज हो जाएगी.

‘जवाहर नहीं, मोतीलाल नेहरू ने दिलाया वोटिंग का हक’, महिला आरक्षण पर प्रियंका गांधी की केंद्र पर चुटकी

महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने इतिहास के पन्नों से भाजपा पर तंज कसा. उन्होंने हर बात में पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू को घसीटने वाला तंज कसते हुए चुटकी लेते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय महिलाओं को आजादी के पहले दिन से वोटिंग का हक दिलाने की नींव एक नेहरू ने ही रखी थी. जवाहरलाल नेहरू नहीं बल्कि मोतीलाल नेहरू ने 1928 की अपनी रिपोर्ट में रख दी थी. प्रियंका ने कहा कि कांग्रेस की इसी ‘वन वोट वन वैल्यू’ की सोच के कारण भारत ने अमेरिका से भी पहले महिलाओं को समान अधिकार दिए. उन्होंने भाजपा को याद दिलाया कि महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण कांग्रेस के डीएनए में है, जिसकी शुरुआत दशकों पहले नेहरू परिवार के पूर्वजों ने की थी.

मोती लाल नेहरू ने आजादी के बाद पहले दिन से महिलाओं को वोट का अधिकार दिलाया… संसद में बोलीं प्रियंका गांधी

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का हवाला देते हुए केंद्र पर निशाना साधा. उन्होंने याद दिलाया कि 1928 में मोतीलाल नेहरू द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में ही महिलाओं के समान अधिकारों की नींव रख दी गई थी, जिसे बाद में कराची अधिवेशन में पारित किया गया. प्रियंका ने कहा कि इसी ‘वन वोट वन वैल्यू’ के सिद्धांत के कारण भारतीय महिलाओं को आजादी के पहले दिन से ही वोट का अधिकार मिला जबकि अमेरिका जैसे देशों को इसमें 150 साल लग गए.  उन्होंने आधुनिक दौर में पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को देते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को निर्णायक भूमिका में लाने का प्रयास किया है.

Sansad Live: ‘जब सब एकमत तो बार-बार क्यों बदल रहा बिल का स्वरूप? महिला आरक्षण पर डिंपल यादव का सवाल

सपा सांसद डिंपल यादव ने महिला आरक्षण बिल पर सरकार की मंशा घेरी है. उन्होंने कहा कि जब देश की सभी पार्टियां इस ऐतिहासिक कदम पर एकमत हैं तो फिर बार-बार बिल का स्वरूप क्यों बदला जा रहा है? डिंपल यादव ने आरक्षण में पिछड़ों और दलितों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाते हुए कहा कि इसे बिना किसी पेच और देरी के पारदर्शी तरीके से लागू किया जाना चाहिएण्‍

Sansad Live: महिला आरक्षण पर राहुल गांधी की चुप्पी, पीएम मोदी के भाषण पर पूछे सवालों को टालकर निकले

संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला आरक्षण पर दिए गए संबोधन के बाद सियासी गलियारा गरमा गया है. पीएम मोदी के भाषण को लेकर जब पत्रकारों ने राहुल गांधी से सवाल पूछने की कोशिश की तो उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साध ली. राहुल गांधी ने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया और मीडिया को नजरअंदाज करते हुए सीधे अपनी गाड़ी में बैठकर सदन से रवाना हो गए. विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे ओबीसी कोटे के मुद्दों के बीच राहुल का यह रुख चर्चा का विषय बना हुआ है.

Sansad Live: ‘जातीय जनगणना के बिना पिछड़ जाएंगी गांव की महिलाएं’, महिला आरक्षण पर RJD का स्टैंड

आरजेडी (RJD) सांसद अभय कुमार सिन्हा ने महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद में अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. उन्होंने कहा कि बिना ‘जातीय जनगणना’ और ‘कोटे के भीतर कोटे’ के, यह बिल केवल शहरों की प्रभावशाली महिलाओं को ही फायदा पहुंचाएगा. सिन्हा ने आशंका जताई कि इस वर्तमान स्वरूप में बिल के पास होने से ग्रामीण और पिछड़े वर्ग की महिलाएं नीति निर्माण की प्रक्रिया में पीछे छूट जाएंगी. उन्होंने मांग की है कि जब तक जातीय जनगणना के सटीक आंकड़े नहीं आ जाते, तब तक इसे लागू न किया जाए और भविष्य में महिलाओं के लिए आरक्षण की सीमा 33 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जाए.

Sansad Live: ‘तुरंत लागू हो 33% कोटा, परिसीमन पर लगे रोक’, महिला आरक्षण पर उद्धव ठाकरे का बड़ा स्टैंड

महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी है. उन्होंने मांग की है कि चूंकि यह बिल 2023 में संसद से पारित हो चुका है इसलिए बिना किसी देरी के 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाना चाहिए. उद्धव ठाकरे ने परिसीमन के मुद्दे पर फिलहाल रोक लगाने की वकालत की है. उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक दल के भविष्य का नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता और देश के भविष्य से जुड़ा संवेदनशील विषय है जिस पर अभी और अधिक चर्चा व शोध की आवश्यकता है.

Sansad Live: ‘तमिलनाडु में चुनाव के कारण कुछ दल फायदा लेने के लिए इसका विरोध कर रहे हैं’, संसद में बोली बांसुरी स्‍वराज

बांसुरी स्‍वराज ने नारी शक्ति वंदना विधेयक पर अपनी बात रखते हुए आगे कहा कि तमिलनाडु में चुनाव है. इसीलिए वो चुनाव में फायदा लेने के लिए इसका विरोध कर रहे हैं. जो भी इसका विरोध करेगा वो महिलाओं के आक्रोश का पात्र बनेगा. आप हमारा साथ दीजिए. मैं अखिलेश यादव से भी कहना चाहती हूं कि यह वक्‍त है महिलाओं के प्रति अपनी कमिटमेंट को पूरा करने का.

महिला आरक्षण पर बांसुरी स्वराज का प्रहार: ‘चुनाव बहाना नहीं, परिसीमन ही संवैधानिक रास्ता’

बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का जोरदार बचाव करते हुए विपक्ष के ‘विलंब’ वाले आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि देश में चुनाव तो निरंतर चलते रहेंगे लेकिन चुनाव महिलाओं के हक को मारने का बहाना नहीं बन सकते. बांसुरी स्वराज ने जोर देकर कहा कि परिसीमन कोई राजनीतिक प्रपंच या बीजेपी की रणनीति नहीं है बल्कि यह बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा बनाया गया एक संवैधानिक प्रावधान है. उनके अनुसार, नारी शक्ति वंदन बिल एक ‘मंजिल’ (Destination) है और परिसीमन वहां तक पहुंचने का सही और कानूनी ‘रास्ता’ (Path) है.

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