PM Modi Xi Jinping BRICS Meeting : कल BRICS का ट्रेलर दिखा, आज जिनपिंग और पीएम मोदी क्या करने वाले है? ट्रंप झेल नहीं पाएंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज डिप्लोमेसी का वो ट्रेलर दिखा दिया है कि उधर ट्रंप पैर पटक रहे हैं, इधर राहुल गांधी का सबसे बड़ा नैरेटिव निपट गया. ब्रिक्स के पहले ही दिन ऐसे ऐसे धमाके हो गए कि ट्रंप भी तड़प रहे होंगे, और राहुल गांधी भी बेचैन होंगे. क्योंकि आज पीएम मोदी के साथ ब्रिक्स के मंच पर पुतिन भी थे, ईरान के राष्ट्रपति भी थे. आज तो पीएम मोदी ने ब्रिक्स का ट्रेलर दिखाया है, अभी तो पूरी पिक्चर बाकी है, कल चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी ब्रिक्स समिट में दिखेंगे. उनके साथ भी पीएम मोदी की मुलाकात होगी. इसमें पीएम मोदी क्या करेंगे जो ट्रंप बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे.
पुतिन और पेजेश्कियान के साथ पीएम मोदी की हो गई मीटिंग
अमेरिका का बस चले तो वो रूस और ईरान से किसी को दोस्ती ना करने दे. कोई देश अगर इनके पास आता है तो ट्रंप का वो दुश्मन बन जाता है लेकिन पीएम मोदी ने ट्रंप का कोई लोड नहीं लिया और ब्रिक्स की धमाकेदार शुरुआत करके दिखा दिया कि नया भारत अपने हिसाब से चलता है. पीएम मोदी ने पुतिन को गले लगाया. ईरान के राष्ट्रपति का हाथ पकड़ कर चले. ये वो तस्वीरें हैं जो अमेरिका में खूब देखी जा रही होंगी. भारत में इंडी वाले भी इन तस्वीरों को देख रहे होंगे क्योंकि ये लोग तो कह रहे थे कि ब्रिक्स से क्या ही हो जाएगा.
ये लोग ब्रिक्स को ही बेकार बताने में जुटे थे लेकिन इंडी के इकोसिस्टम और कांग्रेस के अंदर ही बगावत हो गई. कांग्रेस के कई नेताओं ने कह दिया कि ब्रिक्स समिट कोई मामूली बात नहीं है. आज इसके बारे में आपको बताएंगे और आपको ये भी बताएंगे कि इधर ब्रिक्स की समिट शुरू हुई तो उधर ट्रंप कैसे पैर पटक रहे हैं, पुतिन और ईरान के साथ पीएम मोदी को देखकर अमेरिका ने क्या घटिया हरकत कर दी है
अब ब्रिक्स में जिनपिंग का इंतजार
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से आज पीएम मोदी की पावरफुल मीटिंग हो चुकी है. ईरान के राष्ट्रपति से भी थोड़ी देर पहले धमाकेदार मीटिंग हुई है. अब कल चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का इंतजार है.
साल 2023 में जब भारत ने G-20 की अध्यक्षता की थी. तब शी जिनपिंग उस समिट में नहीं आए थे लेकिन पिछले डेढ़ दो साल में भारत और चीन के रिश्तों में नरमी आई है. शी जिनपिंग का भारत दौरा इसी का संकेत है. पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच किन मुद्दों पर बात हो सकती है.
कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों Strategic Economic Dialogue को लॉन्च कर सकते हैं
इसके अलावा दोनों नेताओं के बीच एनर्जी सिक्योरिटी, पश्चिम एशिया के हालात पर भी बात हो सकती है
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से जुड़ी चिंताओं पर भी दोनों देशों का चिंता है उस पर बात हो सकती है
दोनों देश ट्रंप की तरफ से छेड़े गए टैरिफ वॉर को झेल रहे हैं, इस पर भी बात हो सकती है.
इसके अलावा दोनों नेता बॉर्डर विवाद को लेकर हाल ही में जो बैठक हुईं हैं उसके आउटकम को रिव्यू करेंगे
हालांकि चीन ये चाहता है कि बॉर्डर विवाद सुलझता रहेगा लेकिन आर्थिक रिश्तों को बढ़ाया जाए, व्यापार बढ़ाया जाए
ट्रंप कितना भी भड़क लें, भारत का फंडा क्लियर
भारत का जोर इस पर है कि बॉर्डर विवाद सुलझे बिना, व्यापार में रफ्तार संभव नहीं. ऐसे में हो सकता है कि दोनों देश इसके बीच का कोई व्यापारिक रास्ता तलाशे. इसके लिए लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है. आप ये भी देखिए कि इधर ब्रिक्स जैसे प्लेटफॉर्म को एंटी अमेरिका, एंटी डॉलर मानकर ट्रंप चिढ़ते रहते हैं. उधर आज ब्रिक्स समिट के बिजनेस फोरम में भारत ने ब्रिक्स के सदस्य देशों से साफ साफ ये कहा दिया.
लोकल करेंसी में ट्रेड करना चाहिए
डिजिटिल पेमेंट सिस्टम को लिंक करना चाहिए
डिजिटल ट्रेड को ग्लोबल बनाना चाहिए
बिना चीन के नाम लिए ये कहा कि सदस्य देशों को अपनी मार्केट को और ज्यादा ओपन करना चाहिए
यानी ट्रंप कितना भी भड़क लें. भारत का फंडा क्लियर है कि लोकल करेंसी में व्यापार होना चाहिए, इससे सबको फायदा होगा. हर देश का विदेश मुद्रा भंडार बचेगा. डॉलर पर निर्भरता कम होगी. ग्लोबल शॉक्स से ट्रेड कम प्रभावित होगा.
इधर भारत की तरफ से लोकल करेंसी में व्यापार करने की बात कही गई, उधर ईरान को ऐसा लगा कि जैसे भारत ने उसके मन की बात बोल दी. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने लोकल करेंसी में व्यापार को सबसे अहम बताया. उन्होंने कहा कि इस कदम के साथ-साथ करेंसी से जुड़े रिस्क और आपसी लेन-देन के निपटारे के लिए जरूरी सिस्टम भी बनाना होगा.
BRICS में बड़े-बड़े सिस्टम तैयार होंगे
स्टार्टअप और इनक्यूबेटर : इंडिया आज ब्रिक्स का सेंटर बना हुआ है. ब्रिक्स संगठन में गजब गजब के काम भारत की पहल से हो रहे हैं. ये भारत का प्रस्ताव है. इसका मकसद BRICS देशों के अर्ली स्टेज और बढ़ते स्टार्टअप्स को फंडिंग दिलाना है. इसके अलावा भारत एक ऐसा कॉमन नेटवर्क बना रहा है जिसमें BRICS देशों के स्टार्टअप और इनक्यूबेटर सीधे एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे. इससे भारतीय स्टार्टअप्स को दूसरे BRICS देश के इनक्यूबेटर और मार्केट तक पहुंच मिल सकती है. इसके अलावा छोटे कारोबारियों के लिए BRICS क्रेडिट मैकेनिज्म भी सेटअप किया जाएगा. इससे छोटे एक्सपोर्टर्स को सिर्फ प्रॉपर्टी या कोलेटरल नहीं, उसके कैश फ्लो के आधार पर भी क्रेडिट मिलने का रास्ता आसान किया जा सकता है.
BRICS MSME को-ऑपरेशन पोर्टल : ये ऐसा कॉमन डिजिटल प्लैटफॉर्म बनेगा जिसमें MSMEs, बैंक, ट्रेड एसोसिएशन, टेक्नोलॉजी सेंटर और सरकारी एजेंसी जुड़ेंगी. इससे भारतीय MSMEs के लिए दूसरे BRICS मार्केट्स तक पहुंच आसान करने का लक्ष्य है.
ग्लोबल वैल्यू चेन एक्शन प्लान : BRICS सप्लाई चेन नेटवर्क, भारत की अध्यक्षता में 2026-30 का ग्लोबल वैल्यू चेन एक्शन प्लान आगे बढ़ रहा है. इसमें फार्मा और फूड सिक्योरिटी जैसे सेक्टर्स के लिए सप्लाई चेन और इनवेस्टमेंट प्लैटफॉर्म की संभावना शामिल है. आप पीएम मोदी की कूटनीतिक ताकत को देखिए, एक तरफ वो ब्रिक्स का आयोजन कर रहे हैं. जिसे कुछ लोग एंटी वेस्ट मंच कहते हैं.
दूसरी तरफ यूरोपीय देशों का सबसे बड़ा ब्लॉक यूरोपीयन यूनियन भारत के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को फाइनल करने में जुटा है आज ही ये खबर आई है कि यूरोपीयन कमिशन ने इससे जुड़ा प्रस्ताव यूरोपीय काउंसिल में बढ़ा दिया है. पीएम मोदी ने फिर बता दिया कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र है. जबकि इंडी वाले ये माहौल बनाते हैं कि पीएम मोदी ने ट्रंप के दबाव में हैं. पीएम मोदी ने तो इजराइल के चक्कर में ईरान को गंवा दिया है. यहां तो पीएम मोदी पुतिन-पेजेशकियन को होस्ट कर रहे हैं.



