अजमेर जेल की सुरक्षा पर सवाल, जेलर के निजी मोबाइल से कैदियों की वीडियो कॉल का वीडियो वायरल

अजमेर. राजस्थान के अजमेर सेंट्रल जेल से एक सनसनीखेज वीडियो सामने आया है, जो जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं. वीडियो में जेलर के ऑफिस में बैठे तीन कैदी एक बाहरी व्यक्ति से वीडियो कॉल पर बातचीत करते नजर आ रहे हैं. आरोप है कि यह वीडियो कॉल वर्तमान जेलर सद्दाम हुसैन के निजी मोबाइल फोन से की गई और जेलर ने तीन कैदियों की बात नफीस चिश्ती से करवाई. नफीस चिश्ती का नाम 1992 के ब्लैकमेल कांड के मामले से जुड़ा बताया जा रहा है. सामने आए वीडियो में कैदी तारिक, तौसीफ और फखर जेलर के ऑफिस में बैठे दिखाई दे रहे हैं और वीडियो कॉल के जरिए नफीस चिश्ती से बातचीत करते नजर आते हैं.
इस वीडियो के सामने आने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जेल परिसर में निजी मोबाइल फोन कैसे पहुंचा और कैदियों को जेलर के ऑफिस से बाहरी व्यक्ति से वीडियो कॉल की सुविधा कैसे मिली. इस मामले ने जेल के अंदर मोबाइल इस्तेमाल और कैदियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. हालांकि वीडियो की सत्यता और पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है. जेल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वीडियो देखने के बाद ही इस मामले में कुछ कहा जा सकेगा. अधिकारी ने यह भी कहा कि यदि वीडियो सही पाया जाता है तो मामला बेहद गंभीर है.
जेलर के निजी मोबाइल से वीडियो कॉल का आरोप
सामने आए वीडियो को लेकर आरोप है कि वर्तमान जेलर सद्दाम हुसैन के निजी मोबाइल फोन से नफीस चिश्ती को वीडियो कॉल की गई. इस दौरान जेलर के ऑफिस में तीन कैदी मौजूद थे. वीडियो में तारिक, तौसीफ और फखर को बाहरी व्यक्ति से बातचीत करते हुए देखा जा सकता है. आरोपों के मुताबिक जेलर ने इन तीनों कैदियों की नफीस चिश्ती से बातचीत करवाई. इस घटनाक्रम ने जेल के अंदर निजी मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जेलर के ऑफिस में बैठे दिखे तीन कैदी
वीडियो में तीनों कैदी जेलर के ऑफिस में बैठे नजर आ रहे हैं. इसी दौरान वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति से उनकी बातचीत होती दिखाई देती है. दावा किया जा रहा है कि वीडियो कॉल नफीस चिश्ती से की गई थी. यदि वीडियो की पुष्टि होती है तो यह जेल सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर मामला माना जाएगा, क्योंकि जेल में बंद कैदियों का किसी बाहरी व्यक्ति से इस तरह संपर्क और निजी मोबाइल के इस्तेमाल की अनुमति कई सवाल खड़े करती है.
1992 ब्लैकमेल कांड से जुड़े नफीस चिश्ती से बातचीत का आरोप
इस पूरे मामले में जिस व्यक्ति से कैदियों की बातचीत का दावा किया जा रहा है, उसका नाम नफीस चिश्ती बताया जा रहा है. नफीस चिश्ती का नाम 1992 के ब्लैकमेल कांड से जुड़े मामले में सामने आया था. वीडियो में कैदी तारिक, तौसीफ और फखर की उनसे बातचीत का दावा किया जा रहा है. हालांकि वीडियो कब बनाया गया और वीडियो कॉल किस परिस्थिति में हुई, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है.
जेल प्रशासन में मचा हड़कंप
वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है. जेल विभाग की ओर से फिलहाल पूरे मामले की पुष्टि नहीं की गई है. विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि पहले वीडियो को देखा जाएगा और उसकी सत्यता की जांच के बाद ही कोई आधिकारिक बयान दिया जा सकेगा. अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वीडियो सही पाया जाता है तो यह बेहद गंभीर मामला होगा. इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा सकती है. बता दें कि अजमेर जेल से जुड़े इस मामले के बीच कुछ दिन पहले महिला जेल से दो कैदियों को बिना अनुमति बाहर ले जाने का मामला भी सामने आया था. अब इस नए वायरल वीडियो के मामले ने तूल पकड़ लिया है. फिलहाल वीडियो की आधिकारिक जांच और सत्यता की पुष्टि का इंतजार है. जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वीडियो कब और किन परिस्थितियों में बनाया गया तथा इसमें सामने आए आरोप कितने सही है.
नोट- न्यूज18 इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है. वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों और उसमें किए जा रहे दावों की सत्यता की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी.



