गुजरात से जोधपुर पहुंचा, इलाज के बाद बताया गांव का नाम; 6 साल बाद परिवार से मिला मारुति

Last Updated:August 14, 2026, 09:52 IST
Jodhpur Apna Ghar Ashram Reunion: जोधपुर के झालामंड स्थित ‘अपना घर आश्रम’ की मदद से 6 साल से लापता महाराष्ट्र निवासी मारुति आसाराम राठौड़ अपने परिवार से मिल पाए. छोटे भाई के गायब होने के सदमे से डिप्रेशन में आकर मारुति भी लापता हो गए थे. गुजरात और जोधपुर आश्रम में चले इलाज और काउंसलिंग के बाद उन्होंने अपने गांव का नाम बताया, जिसके बाद आश्रम की टीम ने सरपंच के जरिए परिजनों को ढूंढ निकाला. 6 साल बाद भाइयों के इस पुनर्मिलन से हर किसी की आंखें नम हो गईं.
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Jodhpur: जोधपुर से एक बेहद भावुक और राहत देने वाली खबर सामने आई है, जहां पिछले छह सालों से परिवार से बिछड़े एक व्यक्ति की जिंदगी में आखिरकार खुशियां लौट आई हैं. ‘अपना घर आश्रम’ के प्रयासों से महाराष्ट्र के जालना निवासी मारुति आसाराम राठौड़ अपने परिवार से दोबारा मिल पाए. जब मारुति के छोटे भाई कृष्णा उन्हें लेने जोधपुर पहुंचे, तो छह साल की लंबी जुदाई के बाद दोनों भाई एक-दूसरे को देखकर भावुक हो गए और गले लगकर रो पड़े.
मारुति के भाई कृष्णा ने बताया कि मारुति मुंबई में मकानों के रंग-रोगन (पेंटिंग) का कॉन्ट्रैक्ट लेकर काम करते थे. उनके छोटे भाई राजू की मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह अचानक घर से कहीं चला गया था. भाई के लापता होने का मारुति को गहरा सदमा लगा और वे खुद भी डिप्रेशन के शिकार हो गए. करीब छह साल पहले वे मुंबई से अचानक गायब हो गए और उनका परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट गया. पीछे परिवार में उनकी पत्नी, एक शादीशुदा बेटी और तीन बेटे रह गए. मारुति के जाने के बाद परिवार का सारा बोझ उनकी पत्नी ने उठाया.
गुजरात से जोधपुर लाया गया, आश्रम में हुआ इलाजअपना घर आश्रम के देवीलाल चौधरी ने बताया कि वर्ष 2023 में मारुति गुजरात के मेहसाणा (उमता) में सड़क किनारे बीमार हालत में मिले थे, जिसके बाद उन्हें आश्रम लाया गया. इसके बाद 2025 में उन्हें झालामंड, जोधपुर स्थित ‘अपना घर आश्रम’ में शिफ्ट किया गया. यहां पावटा अस्पताल के डॉ. पंकज कुमार गाड़िया की देखरेख में उनका निरंतर मानसिक और शारीरिक इलाज चला.
चोर समझकर हुई थी मारपीट, सिर में लगी थी चोटमारुति ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि बेघर होने के दौरान एक बार वे एक मंदिर में गए थे, जहां गलती से उनसे एक मूर्ति गिर गई. लोगों ने उन्हें चोर समझकर बुरी तरह पीटा, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई थी. इसके बाद उनका जीवन और ज्यादा कठिन हो गया था.
काउंसलिंग में खुला गांव का नाम, सरपंच की मदद से मिला परिवारशुरुआत में मारुति बोलने में असमर्थ थे, लेकिन आश्रम में लगातार चले इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार आया. 6 अगस्त को काउंसलिंग के दौरान मारुति ने अपने गांव ‘बाबई’ और जिला ‘जालना’ (महाराष्ट्र) का नाम बताया. इसके बाद आश्रम की टीम ने तुरंत गांव के सरपंच से संपर्क किया, जिसके जरिए यह सूचना मारुति के परिजनों तक पहुंची. छह साल बाद अपने भाई के सुरक्षित मिलने की खबर से मारुति के पूरे गांव और परिवार में खुशी का माहौल है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan
First Published :
August 14, 2026, 09:52 IST



