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Religious Place: राजस्थान का वो तीर्थस्थल जहां छिपी है प्रेम और श्राप की कहानी, सावन में दिखता है अद्भुत नजारा

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तीर्थों की नानी है राजस्थान का ये धाम, जुड़ी है प्रेम और श्राप की अनोखी कहानी

Last Updated:August 11, 2026, 09:37 IST

Devayani Tirtha Sambhar: राजस्थान के सांभर में स्थित देवयानी तीर्थ को धार्मिक दृष्टि से बेहद प्राचीन और महत्वपूर्ण माना जाता है. ‘तीर्थों की नानी’ के नाम से प्रसिद्ध इस स्थान पर सावन में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है. यहां स्थित देवयानी सरोवर के चारों ओर कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार यह स्थान शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी से जुड़ा है, जिनका कच से प्रेम प्रसंग और दोनों के श्राप की कथा बेहद चर्चित है. कच शुक्राचार्य से संजीवनी विद्या सीखने आए थे. असुरों द्वारा कई बार उनकी हत्या किए जाने के बावजूद शुक्राचार्य उन्हें जीवित करते रहे. सावन में सरोवर में पानी भरने, हरियाली और धार्मिक गतिविधियों के कारण देवयानी तीर्थ का नजारा और भी खास हो जाता है.

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जयपुर: राजधानी जयपुर से करीब 70 किलोमीटर दूर सांभर में ऐसा एक प्राचीन तीर्थ मौजूद है, जिसे तीर्थों की नानी और छोटा पुष्कर के नाम से जाना जाता है. इस स्थान का नाम है देवयानी तीर्थ. सावन के महीने में इस स्थान की रौनक देखते ही बनती है. बारिश के बाद हरियाली, ठंडी हवाएं और पानी से भरा देवयानी सरोवर यहां के वातावरण को और मनमोहक बना देते हैं. लेकिन इस तीर्थ की सबसे बड़ी खासियत इसकी प्राकृतिक सुंदरता नहीं, बल्कि इससे जुड़ी वह पौराणिक कहानी है. यह जगह से प्रेम, श्राप और देव-असुर कि रोचक कहानी जुड़ी है.

स्थानीय मान्यताओं और मंदिर से जुड़े पुजारियों के अनुसार देवयानी तीर्थ को सभी तीर्थ स्थलों में बेहद प्राचीन माना जाता है. इसी वजह से इसे तीर्थों की नानी कहा जाता है. मान्यता है कि जो व्यक्ति सभी तीर्थों की यात्रा नहीं कर पाता, वह यहां आकर स्नान और पूजा-अर्चना करे तो उसे अनेक तीर्थों के समान पुण्य प्राप्त होता है. यही वजह है कि धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों के लिए देवयानी तीर्थ का खास महत्व है. सांभर झील के पास स्थित यह सरोवर धार्मिक दृष्टि से बहुत खास है. सरोवर के चारों तरफ अलग-अलग देवी-देवताओं के मंदिर बने हुए हैं. इनमें सबसे प्रमुख मंदिर देवयानी का है. इस मंदिर में उनकी देवयानी देवी की रोजाना पूजा-अर्चना और श्रृंगार किया जाता है.

असुरों के गुरु शुक्राचार्य की बेटी हैं देवयानी

देवयानी तीर्थ की कहानी सीधे पौराणिक कथाओं से जुड़ती है. यहां असुरों के गुरु शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी का मंदिर है. पौराणिक परंपरा में देवयानी का उल्लेख महाभारत से जुड़े प्रसंगों में भी मिलता है. आगे चलकर उनका विवाह राजा ययाति से हुआ, जिन्हें कौरवों के पूर्वजों की वंश परंपरा से जोड़ा जाता है. मान्यता के अनुसार देवताओं के गुरु बृहस्पति और असुरों के गुरु शुक्राचार्य थे. शुक्राचार्य को संजीवनी विद्या का ज्ञान था. इस विद्या के जरिए युद्ध में मारे गए असुरों को दोबारा जीवित कर दिया जाता था. इससे देवताओं के लिए असुरों को पराजित करना मुश्किल हो जाता था. इस विद्या को सीखने के लिए देवताओं ने बृहस्पति के पुत्र कच को शुक्राचार्य के पास भेजा. कच ने शुक्राचार्य के आश्रम में शिष्य बनकर रहना शुरू किया. इसी दौरान शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी को कच से प्रेम हो गया.

कच को मारते रहे असुर, हर बार जीवित करते रहे शुक्राचार्य

जब असुरों को पता चला कि कच शुक्राचार्य से संजीवनी विद्या सीख रहा है तो उन्होंने उसका विरोध किया. पौराणिक कथा के अनुसार असुरों ने कई बार कच की हत्या की, लेकिन देवयानी के आग्रह पर शुक्राचार्य अपनी संजीवनी विद्या से उसे फिर जीवित कर देते थे. ऐसे में जब असुर कच की हत्या कर उसके शरीर को जला देते हैं और उसकी भस्म व अस्थियों का चूर्ण मदिरा में मिलाकर शुक्राचार्य को पिला देते हैं. जब शुक्राचार्य कच को पुकारते हैं तो उसकी आवाज उनके पेट के भीतर से आती है. देवयानी के दुख को देखकर शुक्राचार्य कच को जीवित करने के लिए संजीवनी विद्या का प्रयोग करते हैं. कथा के अनुसार कच शुक्राचार्य के पेट को फाड़कर बाहर निकलता है, जिससे शुक्राचार्य की मृत्यु हो जाती है. इसके बाद कच स्वयं संजीवनी विद्या का प्रयोग कर शुक्राचार्य को पुनर्जीवित कर देता है.

दोनों ने एक-दूसरे को दिया श्राप

शुक्राचार्य से विद्या सीखने के बाद जब कच देवलोक लौटने लगा तो देवयानी ने उसके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा. कच ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया. इससे नाराज देवयानी ने कच को श्राप दिया कि वह शुक्राचार्य से सीखी संजीवनी विद्या का उपयोग किसी को जीवित करने के लिए नहीं कर सकेगा. इसके बाद कच ने भी देवयानी को श्राप दिया कि उसका विवाह किसी ब्राह्मण से नहीं होगा. आगे चलकर देवयानी का विवाह राजा ययाति से हुआ.

सावन में क्यों खास हो जाता है देवयानी तीर्थ?

सावन के महीने में देवयानी सरोवर की धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं. कांवड़िए यहां पहुंचकर पवित्र जल लेते हैं और आसपास के शिवालयों में जलाभिषेक के लिए जाते हैं. बारिश के कारण सरोवर और आसपास का प्राकृतिक वातावरण भी बेहद आकर्षक नजर आता है. बादलों से घिरा आसमान, सरोवर का पानी, मंदिरों की घंटियां और श्रद्धालुओं की आवाजाही इस जगह को अलग ही आध्यात्मिक रंग दे देती है. सांभर झील की मौजूदगी इसे पर्यटन की दृष्टि से भी खास बनाती है.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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Jaipur,Rajasthan

First Published :

August 11, 2026, 09:37 IST

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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