Success Story: रीढ़ की बीमारी से जूझे, फिर नहीं मानी हार, सीकर के रामेश्वर ने लद्दाख में दौड़कर रचा इतिहास

सीकर. उम्र के 70वें पड़ाव पर जहां जिंदगी की रफ्तार धीमी पड़ने लगती है, वहीं सीकर के रामेश्वर जाखड़ आज भी सुबह 4 बजे उठते हैं. दौड़, साइकिलिंग और योग उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. इसी फिटनेस रूटीन के दम पर उन्होंने लद्दाख मैराथन 2026 में 11.2 किलोमीटर की दौड़ 1 घंटे 14 मिनट में पूरी की. ऊंचाई वाले इलाके और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में उनका औसत रनिंग पेस करीब 6 मिनट 36 सेकंड प्रति किलोमीटर रहा, उन्होंने 70 प्लस कैटेगरी में पहला स्थान हासिल किया है.
रामेश्वर जाखड़ ने दौड़ना 69 साल की उम्र में नवंबर 2025 में शुरू किया था. दिसंबर में नाहरगढ़ मैराथन में 5 किलोमीटर की दौड़ 28 मिनट में पूरी की. इसके बाद 7 किलोमीटर की दौड़ के दौरान गिरने से उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया. परिवार ने आराम की सलाह दी, लेकिन जाखड़ ने हिम्मत नहीं छोड़ी. ठीक होते ही करीब एक महीने बाद ही फिर वे अपने दोस्तों के साथ जयपुर मैराथन में हिस्सा लेने चले गए. यहां उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया और मेडल जीता, इसके बाद 9 अगस्त 2026 को माउंट आबू में 21.2 किलोमीटर की मैराथन 2 घंटे 41 मिनट में पूरी की. अब तक वे 8 से 9 मैराथन में हिस्सा ले चुके हैं.
डॉक्टरों ने कहा था 5-7 लाख का खर्च, योग ने बदली जिंदगी
मूल रूप से जेतपुरा गांव के रहने वाले रामेश्वर फिलहाल बेटे-बहू के साथ सीकर शहर में रहते हैं. बीकॉम तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने जीवन में आर्थिक संघर्ष भी देखा. पिता का कम उम्र में निधन होने के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. वर्ष 2004 में रोजगार के लिए इटली गए. लगातार काम के कारण उन्होंने रीढ़ की समस्या होने लगी. इसके बाद 2005 में वे वापस अपने गांव लौट आए. वापस लौटकर वे जयपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के लिए गए. डॉक्टरों ने इलाज में 5 से 7 लाख रुपए खर्च होने की बात कही, लेकिन रामेश्वर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण वे अपना इलाज नहीं करवा पाए.
योग, व्यायाम, दौड़ और आयुर्वेद ने बदल दी जिंदगी
इसी दौरान एक हेल्थ एक्सपर्ट ने उन्हें योग और व्यायाम की सलाह दी. इसके बाद उन्होंने इसे दिनचर्या में शामिल कर लिया. शुरुआत मॉर्निंग वॉक से हुई और धीरे-धीरे दौड़ तक पहुंच गए. योग, व्यायाम और दौड़ से उनकी जिंदगी बदलती गई. अब उनकी रीढ़ की हड्डी की समय भी धीरे धीरे कम होने लगी. इसके लिए उन्होंने आयुर्वेदिक तरीके भी अपनाए, इसके बाद उन्होंने 2008 में सीकर शहर में अपना आईटीआई कॉलेज भी शुरू किया.
रोज 8-10 KM रनिंग, 15-20 KM साइकिलिंग
आज भी रामेश्वर सप्ताह में तीन दिन रनिंग और तीन दिन साइकिलिंग करते हैं. रोजाना 8 से 10 किलोमीटर दौड़ना और 10 से 20 किलोमीटर साइकिल चलाना उनकी दिनचर्या है. वे रात करीब 9 से 10 बजे तक सो जाते हैं और खान-पान भी साधारण रखते हैं. स्मृति वन में साथियों के साथ दौड़ लगाने के अलावा उनका स्मार्ट योगा ग्रुप लोगों को निशुल्क योग और व्यायाम करवाता है. अब उनका अगला लक्ष्य 28 किलोमीटर की दिल्ली मैराथन में हिस्सा लेना है. इसके लिए उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी है. जाखड़ कहते हैं कि उम्र सिर्फ एक नंबर है. नियमित अभ्यास, योग, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ शरीर को लंबे समय तक सक्रिय रखा जा सकता है.



