सलाम: बाढ़ में डूब रहा था किसान, अपनी लाइफ जैकेट देकर बचाई जान, अन्नदाता के लिए खुद को कुर्बान कर गए राजेश

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उफनती नदी में फंसे किसान को अपनी लाइफ जैकेट देकर बचाया, खुद बह गए राजेश
Last Updated:August 06, 2026, 11:08 IST
केरल में मानवीयता का बड़ा उदाहरण सामने आया है. यहां एक रिवर राफ्टिंग प्रशिक्षक राजेश ने एक किसान को बचाने के लिए अपनी लाइफ जैकेट दी और खुद उफनती नदी में बह गए. 37 वर्षीय राजेश के बलिदान पर आज पूरा राज्य शोक मना रहा है. मुख्यमंत्री वीडी सतीसन उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार का फैसला किया है. उफनती नदी में फंसे किसान को अपनी लाइफ जैकेट देकर बचाया, खुद बह गए, 37 साल के राजेश के लिए रो रहा पूरा राज्य
मानवता और भलाई के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे लेकिन केरल के रहने वाले राजेश की इंसानियत ने आज पूरे राज्य को रुला दिया है. 37 साल के इस नौजवान ने नदी की बाढ़ में फंसे एक अजनबी किसान को बचाने के लिए अपनी लाइफ जैकेट दे दी और खुद बह गया. राजेश की इस महानता पर केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीसन ने उनके पार्थिव शरीर को राजकीय सम्मान के साथ विदाई देने का फैसला किया है.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक शनिवार को जब राजेश और उनके साथी रिवर राफ्टिंग की ट्रेनिंग देकर घर लौट रहे थे तो कन्नूर जिले में कोझिचाल के पास तेजस्विनी नदी के आसपास लोगों की भीड़ जमा थी, उन्होंने बताया कि अचानक नदी की बाढ़ आने के कारण एक स्थानीय किसान बेनी लंबे समय से गर्दन तक पानी में फंसा हुआ है और नारियल के पेड़ से चिपका हुआ है. यह सुनकर एक अनुभवी एडवेंचरिस्ट और रैपलिंग प्रशिक्षक और कई रेस्क्यू ऑपरेशनों में हिस्सा ले चुके 37 वर्षीय राजेश ने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में छलांग लगा दी. वे किसान तक पहुंच गए.
चूंकि किसान को तैरना नहीं आता था इसलिए उन्होंने अपनी लाइफ जैकेट उतारकर किसान को पहना दी और खुद बिना जैकेट के उस बाढ़ के पानी को पार करने लगे. नदी खतरनाक धाराओं से दूसरों को दूर रहने की सलाह देने वाले राजेश ने इंसानियत की खातिर उस उस दिन अपनी सुरक्षा को दरकिनार कर दिया और शायद नियति इसी दिन का इंतजार कर रही थी.
किसान बेनी तो सुरक्षित बाहर निकल आया और उसकी जान बच गई लेकिन राजेश वहीं भंवर में फंसकर रह गए. काफी देर बाद भी वे बाहर नहीं निकलें. हालांकि कई बचाव अभियानों में हिस्सा ले चुके, 2024 के वायनाड लैंडस्लाइड में लोगों को बचा चुके, एडवेंचर क्लबों, एनसीसी कैडेटों और छात्रों को ट्रेकिंग व रैपलिंग सिखाने वाले राजेश नदी के इस पार नहीं आ पाए और उसी नदी की उफनती धारा में बह गए.
राजेश के परिवार और दोस्तों को शुरू में उम्मीद थी कि इतने अनुभवी व्यक्ति जरूर लौट आएंगे. लेकिन समय बीतने के साथ उम्मीद कम होती गई. आखिरकार तीन दिन की खोज के बाद मंगलवार शाम को उनके शरीर को नदी के निचले हिस्से से बरामद किया गया. बुधवार को जब उनका पार्थिव शरीर उनके गृहनगर तिरुवनंतपुरम के कल्लियूर पहुंचा, तो पूरे केरल में मातम पसर गया.
खुद मरकर इंसानियत को जिंदा रखने वाले राजेश को लेकर मुख्यमंत्री वी डी सतीसन ने कहा कि उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा. उनकी मृत्यु अत्यंत पीड़ादायक है. सरकार उनके अधूरे घर का निर्माण भी पूरा करेगी. विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने कहा कि राजेश ने बलिदान और मानवता का एक अमर प्रतीक छोड़ दिया है. उन्होंने लिखा, “उन्होंने किसी अन्य की जान बचाने के लिए अपना लाइफ जैकेट दे दिया. उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा.”
बता दें कि राजेश अपने पीछे पत्नी शफिया और स्कूली उम्र के दो बेटों अर्शान व अभिषेक को छोड़ गए हैं. एक अजनबी किसान को बचाने के लिए अपनी जान दे देने वाले इस साहसी व्यक्ति की कहानी केरल ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए मिसाल है.
About the Authorप्रिया गौतमSenior Correspondent
Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi..com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …
और पढ़ेंFirst Published :
August 06, 2026, 10:26 IST



