सेई बांध टनल का काम अंतिम पड़ाव पर I pali news I rajasthan news

Last Updated:June 17, 2026, 21:36 IST
Sei Dam tunnel : उदयपुर के कोटड़ा क्षेत्र में बन रही 6.7 किलोमीटर लंबी सेई बांध टनल का 95% काम पूरा हो चुका है और शेष 90 मीटर कार्य 15 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. टनल चौड़ी होने के बाद सेई बांध का अतिरिक्त मानसूनी पानी अब गुजरात में बहने के बजाय सीधे जवाई बांध तक पहुंचेगा. इससे जल निकासी क्षमता 328 क्यूसेक से बढ़कर 1376 क्यूसेक हो जाएगी और 74 एमसीएफटी पानी मात्र 22 दिनों में जवाई बांध तक पहुंच सकेगा. इस परियोजना से पाली, सिरोही और जालोर जिलों को पेयजल व सिंचाई के लिए बड़ा लाभ मिलेगा.
पाली. मारवाड़ के जल संकट को हमेशा-हमेशा के लिए खत्म करने वाले भगीरथ प्रयास का काउंटडाउन अब शुरू हो चुका है. उदयपुर के कोटड़ा क्षेत्र में बन रहे ‘सेई बांध टनल’ (सुरंग) का काम अब अपने अंतिम पड़ाव पर है. यानी अब मानसून का जो पानी बहकर बेकार में गुजरात चला जाता था, वो पानी अब गुजरात नहीं जाएगा, बल्कि सीधे हमारे जवाई बांध में आएगा. सरकार ने बजट में इस 6.7 किलोमीटर लंबी सुरंग को चौड़ा करने के लिए 100 करोड़ रुपए का बजट दिया है. आपको बता दें, कि पिछले 3 साल से चल रहे इस काम का 95 फीसदी हिस्सा पूरा हो चुका है और अब सिर्फ 90 मीटर का काम बाकी है, जिसे आगामी 15 जुलाई तक हर हाल में पूरा करने का अल्टीमेटम दिया गया है. वर्तमान में टनल सकरी होने के कारण सेई बांध से जवाई बांध तक पानी पहुंचने में 45 से 50 दिन का लंबा समय लग जाता था, लेकिन इस प्रोजेक्ट के बाद मात्र 22 दिन में ही जवाई बांध को 74 MCFT पानी मिल जाएगा. यानी बांध दोगुनी रफ्तार से भरेगा.
सेई और जवाई बांध का अटूट रिश्ताउदयपुर के कोटड़ा में स्थित सेई बांध और इसकी टनल मारवाड़ क्षेत्र, विशेषकर पाली जिले के लिए किसी जीवनदायिनी से कम नहीं है. इस पूरी परियोजना का मुख्य उद्देश्य कोटड़ा के सेई बांध में एकत्र होने वाले पानी को टनल (सुरंग) के जरिए डाइवर्ट करके पाली के जवाई बांध तक पहुंचाना है. गौरतलब है कि जवाई बांध ही पाली शहर, सुमेरपुर, जालोर और जोधपुर के कई ग्रामीण इलाकों की प्यास बुझाता है. ऐसे में सेई बांध का मजबूत होना सीधे तौर पर पूरे मारवाड़ को सशक्त बनाना है.
क्यों जरूरी था टनल की चौड़ाई बढ़ाना?जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों के अनुसार, वर्तमान में टनल सकरी होने के कारण इसकी जल निकासी क्षमता बेहद कम थी. इसके चलते मानसून के दौरान जब सेई बांध में पानी की भारी आवक होती थी, तो अतिरिक्त पानी टनल में न जाकर व्यर्थ बहता हुआ गुजरात की तरफ चला जाता था. अब टनल की चौड़ाई बढ़ने से पानी का प्रवाह रिकॉर्ड तेजी से बढ़ेगा. मानसून की एक-एक बूंद व्यर्थ बहने से बचेगी, जिससे जवाई बांध बेहद कम समय में और अपनी पूरी क्षमता के साथ भरा जा सकेगा. यह कदम पाली सहित पूरे मारवाड़ क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई संकट का स्थाई समाधान साबित होगा.
टनल विस्तार के 3 सबसे बड़े और चमत्कारी आंकड़ेइस टनल का विस्तार होने से पानी की निकासी क्षमता 328 क्यूसेक से सीधे बढ़कर 1376 क्यूसेक हो जाएगी. क्षमता 4 गुना बढ़ने से अब मानसून का पानी गुजरात नहीं, मारवाड़ आएगा. वर्तमान में टनल सकरी होने के कारण सेई बांध से जवाई बांध तक पानी पहुंचने में 45 से 50 दिन का लंबा समय लगता था. लेकिन यह कार्य पूरा होने के बाद मात्र 22 दिन में ही जवाई बांध को 74 MCFT पानी मिलने लगेगा. इस टनल के अपग्रेड होने से पश्चिमी राजस्थान के तीन प्रमुख जिलों— पाली, सिरोही और जालोर को सिंचाई और पीने के लिए भरपूर पानी मिल सकेगा.
अब ‘इको-टूरिज्म’ हब बनेगा सेई बांध क्षेत्रनिरीक्षण के दौरान कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने एक और बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि सरकार सिर्फ पानी लाने तक सीमित नहीं है. अब इस पूरे बांध क्षेत्र को ‘इको-टूरिज्म’ (Eco-Tourism) और स्थानीय पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित करने का खाका तैयार किया जा रहा है. इसके तहत सेई बांध की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और अरावली की वादियों का उपयोग कर पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं, सेल्फी पॉइंट्स और सुंदरीकरण का विस्तार किया जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
न्यूजलेटर
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें
Location :
Pali,Pali,Rajasthan



