8 करोड़ का सीवरेज प्लांट बना अभिशाप; कुड़ला गांव में खेत हुए बंजर, बेटियों के रिश्ते भी टूटने लगे

Last Updated:August 06, 2026, 11:02 IST
Barmer Ground Report: बाड़मेर के कुड़ला गांव में 2016 में 8 करोड़ रुपये की लागत से बना सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है. प्लांट बंद रहने और सीवरेज का पानी खेतों में भरने से उपजाऊ जमीन बंजर हो रही है. बदबू और मच्छरों के कारण बीमारियां फैल रही हैं तथा पशुधन की मौत हो रही है. हालात इतने खराब हैं कि लोग गांव में बेटी का रिश्ता करने से भी कतरा रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द स्थायी समाधान की गुहार लगाई है.
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Barmer Ground Report: बाड़मेर शहर के गंदे पानी और सीवरेज को साफ करने के उद्देश्य से बनाया गया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) आज कुड़ला गांव के निवासियों के लिए सबसे बड़ा अभिशाप बन गया है. ट्रीटमेंट प्लांट की विफलता और विभागीय अनदेखी के कारण दूषित पानी अब किसानों के उपजाऊ खेतों में फैल रहा है. इससे न केवल एकड़ के हिसाब से उपजाऊ जमीन बंजर हो रही है, बल्कि गांव में फैली तेज बदबू, गंदगी और मच्छरों के आतंक से ग्रामीणों का जीना दुश्वार हो गया है.
बाड़मेर शहर के सीवरेज वेस्ट को ट्रीट करने के लिए वर्ष 2016 में कुड़ला गांव में करीब 8 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया गया था. हालांकि, निर्माण के एक दशक बाद भी यह प्लांट अपनी क्षमता के अनुसार काम करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है. रख-रखाव के अभाव और क्षमता से अधिक पानी आने के कारण अब सीवरेज का पानी ट्रीट होने के बजाय सीधा खेतों और आबादी क्षेत्रों में बह रहा है. मशीनों के बंद पड़े होने से व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है.
नरकीय जीवन जीने को मजबूर ग्रामीण, बीमारियां और पशुहानि बढ़ीकुड़ला गांव की बुजुर्ग निवासी शेरू देवी ने बताया कि दूषित पानी से आने वाली बदबू इतनी भीषण होती है कि लोगों को दिन-रात अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखनी पड़ती हैं. गंदे पानी के जलभराव के कारण गांव में मलेरिया, डेंगू और डायरिया जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियां तेजी से फैल रही हैं. इतना ही नहीं, सीवरेज के इस जहरीले पानी और जलभराव के गड्ढों में गिरकर आए दिन बेजुबान पशुधन की भी मौत हो रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
सामाजिक ताने-बाने पर संकट: बेटी की शादी से कतरा रहे लोगइस प्रशासनिक विफलता का सबसे दर्दनाक सामाजिक पहलू यह है कि अब लोग कुड़ला गांव में अपनी बेटियों का रिश्ता करने से कतराने लगे हैं. स्थानीय ग्रामीण ईश्वर सिंह के अनुसार, जब भी कोई परिवार यहां शादी का रिश्ता लेकर आता है, तो गांव में चारों तरफ फैला गंदा पानी, बदबू और मच्छरों का जमावड़ा देखकर बिना रिश्ता तय किए ही वापस लौट जाता है. दूषित पानी के कारण गांव का सामाजिक और आर्थिक दायरा पूरी तरह प्रभावित हो चुका है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अविलंब ट्रीटमेंट प्लांट की मरम्मत कराने और पानी की सही निकासी सुनिश्चित करने की मांग की है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Barmer,Barmer,Rajasthan
First Published :
August 06, 2026, 11:02 IST



