Rajasthan

Shaili Agrawal Motivational Story | Karauli Shaili Agrawal Story

Last Updated:May 04, 2026, 08:35 IST

Karauli Shaili Agrawal Story: करौली की शैली अग्रवाल ने हादसे में पैर गंवाने के बाद भी हार नहीं मानी. आज वे 100 गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा देकर उनका भविष्य संवार रही हैं. वनस्थली में पढ़ाई के दौरान घुड़सवारी हादसे का शिकार हुई शैली अब व्हीलचेयर पर बैठकर अपनी पाठशाला चलाती हैं. उनका लक्ष्य एक निशुल्क प्राइमरी स्कूल खोलना है ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे. शैली का यह जज्बा साबित करता है कि इरादे मजबूत हों तो शारीरिक अक्षमता कभी आड़े नहीं आती.

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Karauli Shaili Agrawal Story: करौली की रहने वाली शैली अग्रवाल की कहानी उन लाखों लोगों के लिए एक जीवंत प्रेरणा है जो जीवन की छोटी-छोटी चुनौतियों से घबरा जाते हैं. शैली बचपन से दिव्यांग नहीं थीं. वे एक होनहार छात्रा और घुड़सवारी की शौकीन थीं. वनस्थली विद्यापीठ में पढ़ाई के दौरान एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में वे घोड़े से गिर गईं. इस घटना ने उनकी मांसपेशियों को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया और तब से वे अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाईं. शरीर व्हीलचेयर तक सीमित हो गया, लेकिन उनके सपनों ने लंबी उड़ान भरना नहीं छोड़ा.

अपनी बेबसी को दूसरों की ताकत बनाने के संकल्प के साथ शैली ने एक अनोखी पहल शुरू की. उन्होंने सबसे पहले अपनी कामवाली की बेटी को पढ़ाना शुरू किया. धीरे-धीरे उनके पढ़ाने के अंदाज और निस्वार्थ भाव की चर्चा पूरे इलाके में फैल गई. आज यह एक छोटा सा प्रयास एक बड़े कारवां में बदल चुका है, जहाँ करीब 100 गरीब और जरूरतमंद बच्चे रोजाना उनसे शिक्षा ले रहे हैं.

शिक्षा के साथ संस्कार और सर्वांगीण विकासशैली की यह पाठशाला केवल किताबों तक सीमित नहीं है. यहाँ पढ़ने वाली छात्रा सना खान बताती है कि “दीदी” उन्हें स्कूल से भी बेहतर तकनीक से पढ़ाती हैं. शैली बच्चों को ड्राइंग, डांस और खेल-कूद के जरिए जीवन के जरूरी हुनर सिखाती हैं. हर रविवार को होने वाली विशेष गतिविधियां बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम करती हैं. शैली का मुख्य उद्देश्य इन बच्चों को मानसिक और रचनात्मक रूप से मजबूत बनाना है.

भविष्य का लक्ष्य: कोई भी बच्चा न रहे अनपढ़शैली के पिता कैलाश चंद अग्रवाल को अपनी बेटी पर नाज है. वे कहते हैं कि शैली ने कभी भी व्हीलचेयर को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. अब शैली का एकमात्र सपना एक बड़ा प्राइमरी स्कूल खोलना है, जहाँ वे उन बच्चों को शिक्षा दे सकें जो पैसों के अभाव में स्कूलों से दूर रह जाते हैं. करौली की यह बेटी आज समाज के लिए एक सशक्त उदाहरण पेश कर रही है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो हर बाधा को पार किया जा सकता है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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