1947 का वो दस्तावेज आया सामने, जब पाकिस्तान से विमान में 65 हिंदू शरणार्थी पहुंचे थे बीकानेर

Last Updated:August 14, 2026, 21:52 IST
Story Of Partition Of India : नवंबर 1947 में पाकिस्तान के बहावलपुर से 65 हिंदू शरणार्थियों को विमान से बीकानेर लाया गया था. यह दस्तावेज विभाजन के बाद विस्थापितों के पुनर्वास में बीकानेर की भूमिका बताता है. विमान नाल एयरपोर्ट पर उतरा, जहां से सभी 65 लोगों को बीकानेर के रिफ्यूजी कैंप पहुंचाया गया. इसके बाद पुनर्वास प्रक्रिया के तहत उन्हें बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों में बसाया गया.
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बीकानेर. भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी सिर्फ जमीन और सीमाओं के बंटवारे की कहानी नहीं थी, बल्कि यह उन लाखों परिवारों के उजड़ने की दास्तान भी है, जिन्होंने रातोंरात अपना घर, कारोबार और पुश्तैनी रिश्ते छोड़ दिए. बीकानेर के इतिहास से जुड़ा ऐसा ही एक दस्तावेज सामने आया है, जो बताता है कि नवंबर 1947 में पाकिस्तान के बहावलपुर स्टेट से 65 हिंदू शरणार्थियों को विमान के जरिए बीकानेर लाया गया था.
इस ऐतिहासिक घटना का उल्लेख 4 नवंबर 1947 को जारी बीकानेर सरकार के तत्कालीन आदेश में मिलता है. आदेश में भारत सरकार के उस निर्णय का जिक्र है, जिसके तहत पाकिस्तान से गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को तेजी से भारत लाने के लिए हवाई सेवा की व्यवस्था की गई थी. आजादी के करीब 79 साल बाद सामने आया यह दस्तावेज बताता है कि विभाजन के बाद बीकानेर ने किस तरह विस्थापित परिवारों को अपने यहां जगह दी. बहावलपुर से उड़ान भरने वाले उन 65 शरणार्थियों की कहानी उस दौर की पीड़ा, विस्थापन और नई जिंदगी की शुरुआत का ऐतिहासिक दस्तावेज है.
नाल एयरपोर्ट पर उतरा था विमान, रिफ्यूजी कैंप पहुंचाए गए 65 लोग
राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डॉ. नितिन गोयल ने बताया कि बहावलपुर स्टेट से इन शरणार्थियों को हवाई मार्ग से बीकानेर लाया गया था. विमान नाल एयरपोर्ट पर उतरा, जहां से सभी 65 लोगों को बीकानेर के रिफ्यूजी कैंप पहुंचाया गया. इसके बाद पुनर्वास प्रक्रिया के तहत उन्हें बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों में बसाया गया. दस्तावेज के मुताबिक 7 और 10 नवंबर को प्रतिदिन 65 शरणार्थियों को बहावलपुर स्टेट के कनपुर/अनपुर क्षेत्र से बीकानेर लाया जाना था. बीकानेर प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि नाल एयरड्रोम पर पहुंचने वाले शरणार्थियों के लिए वहां से रिफ्यूजी कैंप तक परिवहन की व्यवस्था की जाए.
एक कागज की लकीर ने छीन लिए घर और रिश्ते
डॉ. गोयल ने बताया कि विभाजन की सबसे बड़ी त्रासदी यह थी कि बहावलपुर और उसके आसपास के इलाकों में रहने वाले अनेक हिंदू परिवारों ने अपना सब कुछ वहीं बनाया था. कई परिवार दशकों से वहां रह रहे थे. उनके व्यापार थे, सामाजिक रिश्ते थे और पुश्तैनी घर थे. लेकिन 1947 में भारत और पाकिस्तान के बीच नई सीमा खिंचने के बाद उन्हें अपना सब कुछ छोड़कर विस्थापित होना पड़ा. जिस जगह को वे अपना घर समझते थे, वह अचानक दूसरे देश का हिस्सा बन गई.
नाल एयरपोर्ट बना शरणार्थियों की नई जिंदगी का पहला पड़ावबहावलपुर से विमान में आए इन 65 लोगों के लिए नाल एयरपोर्ट भारत में नई जिंदगी की शुरुआत का पहला पड़ाव बना. एयरपोर्ट से उन्हें बीकानेर के रिफ्यूजी कैंप ले जाया गया और आगे पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू हुई. राजस्थान सरकार की नवंबर 1947 की फाइलों में सुरक्षित दस्तावेज इस बात की गवाही देते हैं कि बीकानेर उस दौर में पाकिस्तान से आए विस्थापितों के पुनर्वास का महत्वपूर्ण केंद्र बना था. यह दस्तावेज विभाजन के उस दौर की याद दिलाता है, जब हजारों परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर अनजान जगहों पर नई जिंदगी शुरू करनी पड़ी थी.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Bikaner,Bikaner,Rajasthan
First Published :
August 14, 2026, 21:52 IST



