शो ‘तारक मेहता’ के ‘गोकुलधाम’ की नकल कर रहीं कम्युनिटी, असित मोदी का खुलासा- ‘मैं और जेठालाल चॉल में रहे हैं’

Last Updated:August 08, 2026, 17:48 IST
शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ ने न सिर्फ लोगों का मनोरंजन किया, बल्कि एक ऐसा समाज विकसित करने में मदद की, जहां सब मिलजुल कर रहते हैं. शो में दिखाई गई कॉलोनी ‘गोकुलधाम’ से तमाम कम्युनिटी प्रभावित हैं. प्रोड्यूसर असित मोदी ने इसके 18 साल पूरे होने पर अपने जज्बात खुलकर बयां किए.
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शो को प्रसारित होते हुए 18 साल बीत गए हैं. (फोटो साभार: Instagram@kalpenn)
नई दिल्ली: शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ टीवी पर बीते 18 सालों से प्रसारित हो रहा है. इसमें कई बदलाव हुए, मगर मिजाज अभी भी पहले जैसा दिलचस्प है. इसका हर एक किरदार अपने-आप में खास है. शो को सफल बनाने में इसके प्रोड्यूसर असित मोदी का बड़ा रोल है. हालांकि, उन पर वक्त-बेवक्त तमाम तरह के आरोप लगते रहे. उन्होंने शो के 18 साल पूरे होने पर अपने खास विचार साझा किए.
प्रोड्यूसर असित मोदी ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि उनके शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ ने कई कम्युनिटी को प्रेरणा दी. उनका कहना है कि शो ने सोसायटी में साथ रहने के तौर -तरीकों को हर किसी को प्रभावित किया. उन्होंने कहा, ‘हमारे शो का नजरिया सफल रहा है. इसी भावना के साथ कई कॉलोनियां बनी हैं. लोगों ने हमें बताया कि वे ऐसी कम्युनिटी बनाने के लिए हमारे शो से प्रेरित हुए हैं. मुझे राजकोट की एक कॉलोनी में जाने का न्योता भी मिला है. हम सभी को इस बारे में सोचना चाहिए कि हम साथ-साथ कैसे रह सकते हैं. भले ही विचारों में मतभेद हों, लेकिन हमें बहस में नहीं पड़ना चाहिए. हम सभी को यह सोचना चाहिए कि हम शांति से एक-दूसरे के साथ कैसे रह सकते हैं.’
असित मोदी की बड़ी सीखप्रोड्यूसर असित मोदी ने समाज में बढ़ते धर्म, जाति और भाषा के मोह पर तंज कसते हुए कहा कि लोगों को खुद को सबसे पहले भारतीय मानना चाहिए. इससे आपसी भाईचारा बढ़ेगा और साथ मिलकर रहने की भावना मजबूत होगी. प्रोड्यूसर का मानना है कि आज के समय में हम, जब किसी से भी मिलते हैं, तो सबसे पहले यही सवाल रहता है कि आप किस धर्म से हैं, जाति क्या है, किस समुदाय से आते हैं या फिर कौन सी भाषा बोलते हैं? मैं हमेशा कहता हूं कि अगर हम सबसे पहले कहें कि मैं भारतीय हूं, तो यह समस्या हल हो जाएगी और सब लोग मिल-जुलकर रह सकेंगे.
चॉल में रहते थे असित मोदीअसित मोदी ने अपनी बचपन की बातों को याद करते हुए कहा कि जब हम मुंबई की चॉल में रहते थे, तब वहां पर पड़ोसियों को परिवार की तरह माना जाता था. उन्होंने कहा, ‘मैं और दिलीप भाई हम दोनों चॉल में रहे हैं. मुंबई में चाहे भूलेश्वर हो, कालबादेवी हो या दादर, हम सब चॉलों में रहते थे. पड़ोसी ही हमारा परिवार बन जाते थे, क्योंकि घर छोटे होते थे. आज की तरह न्यूक्लियर फैमिली का कॉन्सेप्ट तब नहीं था. आज भी मैं उन पड़ोसियों से जुड़ा हुआ हूं जो मेरे छह या सात साल की उम्र में मेरे पड़ोसी थे.’
पड़ोसियों की समझाई अहमियतअसित मोदी ने कहा, ‘जब आप अपने पड़ोसियों के साथ रहते हैं तो आपको कई चीजें छोड़नी पड़ती हैं. आप मिल-जुलकर रहना सीखते हैं. मुझे लगता है कि साथ मिलकर रहना बेहद जरूरी है. आज मुझे लगता है कि हमारे देश के लिए यह बहुत अहम है. आजकल लोग यह भी नहीं जानते कि उनके पड़ोस में कौन रहता है. कई लोग तो वॉचमैन या लिफ्ट ऑपरेटर से मुस्कुराकर बात तक नहीं करते. हमें वॉचमैन, लिफ्टमैन और हमारी सेवा करने वाले हर व्यक्ति का आभारी होना चाहिए. हमारा पड़ोसी ही हमारा पहला परिवार होता है. पड़ोसी ही सब कुछ है.’
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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…
New Delhi,Delhi
First Published :
August 08, 2026, 17:48 IST



