Success Story: पिता ने दी किडनी, बेटे ने जीता दुनिया का दिल, झुंझुनूं के भवानी सिंह ने ट्रांसप्लांट के बाद रचा इतिहास

Last Updated:August 05, 2026, 08:47 IST
झुंझुनूं के जाखल गांव के भवानी सिंह शेखावत की कहानी हौसले और संघर्ष की मिसाल है. 18-19 साल की उम्र में गलत इलाज के कारण दोनों किडनियां खराब होने के बाद उनके पिता ने अपनी किडनी दान कर उन्हें नई जिंदगी दी. इसके बाद भवानी सिंह ने मेहनत, पढ़ाई और खेल के दम पर न सिर्फ सरकारी सेवा में मुकाम हासिल किया, बल्कि वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में पदक जीतकर राजस्थान का नाम रोशन किया. आज वे ट्रांसप्लांट के बाद नई जिंदगी जी रहे लोगों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं.
झुंझुनूं. जिले के जाखल गांव के रहने वाले भवानी सिंह शेखावत की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से काम नहीं है. उनकी कहानी जिंदगी से जंग जीतने की मिसाल है. महज 18-19 साल की उम्र में जब एक गलत इलाज के बाद उनकी दोनों किडनियां खराब हो गई, तब परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. हालात इतने गंभीर हो गए कि जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष शुरू हो गया. ऐसे कठिन समय में उनके पिता घनश्याम सिंह शेखावत ने अपनी एक किडनी दान कर बेटे को नया जीवन दिया.
इसी नए जीवन को भवानी सिंह ने मेहनत और खेल के दम पर नई पहचान दिलाई. आज उनका नाम विश्व ट्रांसप्लांट खेलों में सम्मान के साथ लिया जाता है. किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अधिकांश लोग सामान्य जीवन जीने की कोशिश करते हैं, लेकिन भवानी सिंह ने अपनी कमजोरी को ही ताकत बना लिया. जीवनभर दवाइयों के सहारे रहने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और मेहनत के दम पर राजकीय सेवा में मेरिट से चयन हासिल किया. वर्तमान में वे नवलगढ़ क्षेत्र की जाखल सीएचसी में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं.
2016 में राष्ट्रीय ट्रांसप्लांट खिलो में बनाई जगह सरकारी नौकरी के साथ उन्होंने खेलों में भी ऐसा सफर तय किया, जिसने देशभर के ट्रांसप्लांट खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद पैदा कर दी. उनकी खेल यात्रा वर्ष 2016 में राष्ट्रीय ट्रांसप्लांट खेलों से शुरू हुई, जहां उन्होंने पहला रजत पदक जीता. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. बैंकॉक, ऑस्ट्रेलियन ट्रांसप्लांट गेम्स और जर्मनी के ड्रेसडेन में आयोजित विश्व ट्रांसप्लांट प्रतियोगिताओं सहित कई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलो मे शानदार प्रदर्शन किया. अब तक भवानी सिंह 19 पदक अपने नाम कर चुके हैं, इनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के भी कई मेडल शामिल है.
वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में मेडल जितने वाले पहले राजस्थानीअप्रैल 2023 में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में आयोजित 13वें वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में उन्होंने पेटांक व्यक्तिगत स्पर्धा में सिल्वर और लॉन बॉल में रजत मेडल जीतकर इतिहास रचा था. वे राजस्थान के पहले खिलाड़ी बने, जिन्होंने वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में मेडल जीता था. भवानी सिंह का मानना है कि ट्रांसप्लांट किसी व्यक्ति की जिंदगी का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत हो सकती है. यही संदेश वे हर मंच से युवाओं, दिव्यांगों और ट्रांसप्लांट खिलाड़ियों तक पहुंचाते हैं.
2020 में पिता का हो चुका निधन भवानी सिंह के पिता घनश्याम सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं, साल 2020 में उनका निधन हो गया. लेकिन उनका दिया जीवनदान आज भी हजारों लोगों के लिए इंस्प्रेशन बन गया है. भवानी सिंह भी अपने पिता की सीख को समाजसेवा के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं. वे अपने गांव की सरकारी स्कूल में 10वीं और 12वीं बोर्ड के टॉपर को स्कॉलोसिलिप और आर्थिक सहयोग देते हैं. इसके अलावा गांव के सरकारी अस्पताल में अपनी ओर से जरूरी उपकरण भी उपलब्ध करवा चुके हैं.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Jhunjhunu,Rajasthan
First Published :
August 05, 2026, 08:47 IST



