5 साल की देरी और 3 करोड़ का नुकसान, आंखें खोल देगा एसआईपी का ये सच, निवेश करने जा रहे तो जानना जरूरी

Last Updated:April 10, 2026, 12:59 IST
Investment Tips : अगर आप एसआईपी में निवेश करने की सोच रहे तो एक बाद हमेशा याद रखना कि इसमें राशि से ज्यादा समय का महत्व होता है. अगर दो लोग एकसमान राशि निवेश करना शुरू करते हैं, लेकिन उनके निवेश की अवधि में सिर्फ 5 साल का अंतर हो तो रिटायरमेंट तक तैयार होने वाले उनके कॉर्पस में दोगुने का अंतर दिखाई देगा.
एसआईपी पर चक्रवृद्धि ब्याज की वजह से बड़ा कॉर्पस तैयार होता है.
नई दिल्ली. अगर आपसे कोई कहे कि 5 साल की देर करने पर आपको 3 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है तो शायद ही किसी को यकीन होगा. ज्यादातर तो यही कहेंगे कि 3 करोड़ रुपये बनाने में तो जिंदगी बीत जाती है तो फिर 5 साल में कैसे इतना बड़ा नुकसान हो सकता है. लेकिन, जब आप सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी की बात करते हैं तो यह आंकड़ा न सिर्फ मुमकिन लगने लगता है, बल्कि छोटा भी दिखाई देता है. अभी भी यकीन नहीं तो हम आपको इस दावे को आंकड़ों से बाहर निकालकर हकीकत के रूप में दिखाते हैं.
फर्ज कीजिए कि एक साथ नौकरी शुरू करने वाले दो मित्रों ने एकसमान निवेश राशि के साथ अपनी एसआईपी यात्रा शुरू की. दोनों ने ही हर महीने 10 हजार रुपये एसआईपी में निवेश करने का फैसला किया और उन्हें सालाना 12 फीसदी का एकसमान रिटर्न भी मिल रहा है. बस दोनों में ही फर्क था कि एक ने 25 साल की उम्र में निवेश करना शुरू कर दिया था, जबकि दूसरे ने यह फैसला 30 साल की उम्र में लिया. बाकी सभी चीजें दोनों के लिए ही समान थी, लेकिन एक लंबे समय बाद जब उनका कॉर्पस देखा गया तो इसमें जमीन-आसमान जितना अंतर दिखाई दिया.
रिटायरमेंट तक कितना किया निवेशअब दोनों दोस्तों के रिटायरमेंट कॉर्पस पर नजर डालते हैं. यह बात तो आपको पता ही होगी कि जिसने 25 साल की उम्र में अपनी एसआईपी शुरू की, उसका निवेश 35 साल तक चला जबकि 30 साल की उम्र में इसे शुरू करने वाले ने निवेश भी 30 साल किया. दोनों की रिटायरमेंट उम्र एकसमान यानी 60 साल की रही और जब वे रिटायर हुए तो एसआईपी के निवेश ने कॉर्पस में बड़ा अंतर पैदा कर दिया. निवेश के लिहाज से देखा जाए तो दोनों के कुल इनवेस्टमेंट में सिर्फ 6 लाख रुपये का अंतर दिखा.
60 साल की उम्र में कितना रहा कॉर्पसअब बात करते हैं रिटायरमेंट तक किए गए कुल निवेश और तैयार हुए फंड की. जिस व्यक्ति ने 25 साल की उम्र में निवनेश करना शुरू किया था, उसने 35 साल तक हर महीने 10 हजार रुपये एसआईपी में डाले और कुल 42 लाख का निवेश किया. दूसरी ओर, 30 साल की उम्र में निवेश शुरू करने वाले ने 60 साल की उम्र तक कुल 36 लाख रुपये का निवेश किया. दोनों को ही सालाना 12 फीसदी का रिटर्न मिला लेकिन रिटायरमेंट पर 35 साल तक निवेश करने वाले के पास 6.49 करोड़ रुपये का फंड तैयार हो गया था, जबकि 30 साल तक निवेश करने वाले युवक के पास 3.52 करोड़ रुपये का कॉर्पस तैयार हुआ. इस लिहाज से दोनों के बीच का अंतर करीब 3 करोड़ रुपये रहा, जबकि निवेश की गई राशि का अंतर महज 6 लाख रुपये था.
आखिरी 10 साल में होता है सारा खेलएसआईपी में निवेश करते समय राशि से ज्यादा समय महत्वपूर्ण होता है. देखने-सुनने में सिर्फ यह 5 साल का अंतर होता है लेकिन इसका असर दोगुना दिखाई देता है. निवेश के शुरुआती 10 से 20 साल तक उतना असर नहीं दिखता, जितना आखिर के 10 साल में होता है. ऐसा इसलिए, क्योंकि तब तक निवेश के रूप में बड़ी राशि एकत्र हो जाती है और इस पर हर साल मिलने वाला कम्पाउंड इंट्रेरेस्ट राशि को दिन-प्रतिदिन बड़ा करता जाता है. अगर आप एसआईपी में अपनी निवेश राशि को हर साल 10 फीसदी बढ़ाते जाएं तो 30 साल में यही कॉर्पस 8.83 करोड़ और 35 साल में 17.76 करोड़ रुपये हो जाएगा.
About the AuthorPramod Kumar Tiwari
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
April 10, 2026, 12:59 IST



