राजस्थान में बाड़ेबंदी खेल जारी, कुचेरा से भरतपुर तक सियासी ड्रामा, BJP-कांग्रेस में वार-पलटवार

राजस्थान में 309 नगर निकायों के अध्यक्षों का चुनाव 21 सितंबर को होना है. लेकिन इससे पहले बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है. पार्षदों की बाड़ेबंदी, कथित खरीद-फरोख्त और पुलिस की कार्रवाई को लेकर दोनों पार्टियां आमने-सामने हैं.
कांग्रेस ने बीजेपी पर पार्षदों को 2-2 करोड़ रुपये में खरीदने और पुलिस के जरिए परेशान करने का आरोप लगाया है. वहीं, बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कांग्रेस और निर्दलीय पार्षद विकास के लिए बीजेपी के बोर्ड को समर्थन दे रहे हैं.
कुचेरा में बाड़ेबंदी वाले रिसोर्ट में पहुंची पुलिस
राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव से पहले बाड़ेबंदी और पुलिस की तलाश को लेकर हाई वोल्टेज ड्रामा जारी है. नागौर के कुचेरा में कांग्रेस की बाड़ेबंदी वाले रिसोर्ट में पुलिस पहुंची, जिसके बाद दोनों पक्षों में तकरार देखने को मिली.
पुलिस ने ली रिसोर्ट की तलाशी
पुलिस कांग्रेस पार्षद लिंबाराम की तलाश में रिसोर्ट पहुंची थी. लिंबाराम के साले महेंद्र ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि लिंबाराम और उनकी पत्नी का अपहरण कर लिया गया है. शिकायत में आशंका जताई गई कि उन पर दबाव बनाकर वोट डलवाया जा सकता है. इसके बाद कांग्रेस ने लिंबाराम का वीडियो जारी किया. वीडियो में लिंबाराम ने खुद को सुरक्षित बताया और कहा कि वह अपनी मर्जी से रह रहे हैं.
इस पूरे मामले को लेकर पुलिस और कांग्रेस के अध्यक्ष पद के दावेदार तेजपाल मिर्धा के बीच भी विवाद हुआ. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कई आरोप लगाए. डोटासरा ने दावा किया कि तेजपाल मिर्धा की कार को पहले टक्कर मारी गई थी. उन्होंने कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री शकुंतला रावत की चैट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस उनका पीछा कर रही है.
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर पार्षदों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया. गहलोत का दावा है कि पार्षदों को 2-2 करोड़ रुपये में खरीदने की कोशिश की जा रही है और बीजेपी का बोर्ड बनाने के लिए जिला कलेक्टरों पर दबाव डाला जा रहा है.
बीजेपी ने आरोपों को बताया गलत
कांग्रेस के इन आरोपों को बीजेपी ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. बीजेपी नेता अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि खरीद-फरोख्त के आरोप गलत हैं. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और निर्दलीय पार्षद अपने इलाकों के विकास के लिए बीजेपी के बोर्ड का समर्थन करना चाहते हैं.
चतुर्वेदी ने कहा कि अगर किसी पार्षद के परिवार की ओर से शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो पुलिस को मामले की जांच करने का अधिकार है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी परिजन ने शिकायत की है और पुलिस जांच के लिए पहुंच रही है, तो इसमें गलत क्या है.
बीजेपी नेता ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए पूछा कि क्या अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते पिछले निकाय चुनाव पुलिस की मदद से जीते गए थे. उन्होंने कांग्रेस में फूट और गुटबाजी का दावा करते हुए कहा कि कुछ कांग्रेस और निर्दलीय पार्षद विकास के लिए बीजेपी के पक्ष में आ रहे हैं.
25 निकायों में निर्विरोध बोर्ड
राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस के बीच पार्षदों को अपने-अपने पाले में लाने की होड़ जारी है. दोनों पार्टियां अपने बोर्ड बनाने के लिए पार्षदों की बाड़ेबंदी कर रही हैं और निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही हैं. इस बीच, बीजेपी 309 में से 25 नगर निकायों में निर्विरोध बोर्ड बनाने में कामयाब रही है. इनमें भरतपुर नगर निगम भी शामिल है.
भरतपुर में निर्दलीय पार्षदों की संख्या बीजेपी और कांग्रेस के पार्षदों से अधिक बताई जा रही है. इसके बावजूद बीजेपी निर्दलीय प्रत्याशी को नामांकन वापस लेने के लिए मनाने में सफल रही.
अब सभी की नजरें 21 सितंबर पर हैं. इसी दिन राजस्थान के 309 नगर निकायों में अध्यक्षों का चुनाव होगा. चुनाव से पहले आरोप-प्रत्यारोप और सियासी खींचतान के बीच यह देखना अहम होगा कि किस पार्टी को कितने पार्षदों का समर्थन मिलता है और कितने निकायों में किसका बोर्ड बनता है.



