Rajasthan

हनुमानगढ़ एथेनॉल फैक्ट्री विवाद फिर भड़का, किसानों ने खारिज की सहमति, 17 दिसंबर को महापंचायत का ऐलान

हनुमानगढ़. राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र के राठीखेड़ा गांव में निर्माणाधीन एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर किसानों का आंदोलन एक बार फिर उफान पर आ गया है. कल जिला कलेक्ट्रेट में प्रशासन, भाजपा नेताओं और किसान प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई लंबी वार्ता में बनी सहमति को किसान नेताओं ने पूरी तरह खारिज कर दिया. उन्होंने इसे महज खानापूर्ति करार देते हुए फैक्ट्री का निर्माण स्थाई रूप से बंद करने की मांग दोहराई. साथ ही, 17 दिसंबर को जिला कलेक्ट्रेट में विशाल महापंचायत आयोजित करने का ऐलान किया है. इस महापंचायत में राष्ट्रीय किसान नेता राकेश टिकैत सहित कई बड़े किसान नेताओं के शामिल होने का दावा किया जा रहा है.

किसान नेता कॉमरेड बलवान पूनिया ने सहमति को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन ने केवल रिव्यू का आश्वासन दिया, लेकिन फैक्ट्री को पूरी तरह बंद करने या हटाने पर कोई ठोस वादा नहीं किया. उन्होंने गांवों में संपर्क अभियान शुरू करने की बात कही और चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र होगा. कई किसान यूनियनों और संगठनों ने महापंचायत में शामिल होने की घोषणा की है. किसानों का कहना है कि ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड की यह फैक्ट्री क्षेत्र में भारी प्रदूषण फैलाएगी, भूजल को जहरीला करेगी और कृषि भूमि को बंजर बना देगी. वे फैक्ट्री को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट करने या पूरी तरह बंद करने की मांग पर अड़े हैं.

10 दिसंंबर को चरम पर पहुंच गया था आंदोलन

यह विवाद 10 दिसंबर को उस समय चरम पर पहुंच गया था, जब किसानों की महापंचायत के बाद प्रदर्शनकारी फैक्ट्री स्थल पर पहुंचे और दीवार तोड़कर वाहनों में आग लगा दी. पुलिस की लाठीचार्ज और आंसू गैस से जवाबी कार्रवाई में कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया सहित दर्जनों लोग घायल हो गए. हिंसा में 16 से अधिक वाहन जलाए गए और कई क्षतिग्रस्त हुए. इसके बाद प्रशासन ने इंटरनेट सेवा बंद कर दी और भारी पुलिस बल तैनात किया. 12 दिसंबर को हुई वार्ता में एडीजीपी वीके सिंह, आईजी हेमंत शर्मा, जिला कलेक्टर और एसपी ने किसानों से बात की. भाजपा विधायक गुरवीर सिंह बराड़ की मध्यस्थता से रिव्यू तक निर्माण रोकने पर सहमति बनी थी, लेकिन किसान इससे संतुष्ट नहीं हुए.

किसानों का आरोप- सहमति केवल समय काटने के लिए थी

किसान नेताओं का आरोप है कि सहमति केवल समय काटने के लिए थी. कॉमरेड बलवान पूनिया ने कहा कि गांव-गांव जाकर किसानों को जुटाया जा रहा है. महापंचायत में हजारों किसान शामिल होंगे और राकेश टिकैत जैसे बड़े नेता मंच से संबोधित करेंगे. अन्य संगठनों ने भी समर्थन दिया है. किसानों ने स्पष्ट किया कि जब तक फैक्ट्री स्थाई रूप से बंद नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा. वे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी पर सवाल उठा रहे हैं और कह रहे हैं कि केंद्र की एथेनॉल नीति के नाम पर स्थानीय पर्यावरण और आजीविका को खतरे में डाला जा रहा है.

प्रशासन का पक्ष है कि फैक्ट्री को सभी आवश्यक मंजूरियां मिली हुई हैं और यह 450 करोड़ का प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की हरित ऊर्जा नीति का हिस्सा है. जिला कलेक्टर ने कहा कि रिव्यू के लिए टीम गठित की जाएगी, लेकिन किसानों की यह प्रतिक्रिया अप्रत्याशित है. इलाके में पुलिस जाब्ता तैनात है और इंटरनेट सेवा अभी बहाल नहीं की गई. फैक्ट्री परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

17 दिसंबर को होने वाले महापंचायत पर टिकी नजरें

यह आंदोलन पिछले 16 महीनों से चल रहा है. किसान ‘एथेनॉल फैक्ट्री हटाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले एकजुट हैं. 10 दिसंबर की हिंसा के बाद 107 लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई और कई गिरफ्तारियां हुईं. किसानों ने पुलिस पर आरोप लगाया तो प्रशासन ने बाहरी तत्वों को जिम्मेदार ठहराया. अब 17 दिसंबर की महापंचायत पर सभी की नजरें टिकी हैं. यदि बड़ी संख्या में किसान जुटे तो स्थिति फिर तनावपूर्ण हो सकती है. प्रशासन अब राज्य सरकार से दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहा है. फिलहाल टिब्बी क्षेत्र में शांति है, लेकिन महापंचायत से पहले तनाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है. किसान नेताओं की यह सख्ती आंदोलन को नई दिशा दे सकती है.

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